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ब्रह्मा बाबा के समान सम्पूर्ण फरिश्ता भव:

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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर रायपुर में अपने नियमित सदस्यों के लिए 5 जनवरी से ब्रह्मा बाबा के समान सम्पूर्ण फरिश्ता भव: विषय पर तीन दिवसीय गहन योग साधना कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस गहन योग साधना कार्यक्रम में मधुबन तपोभूमि से पधारे ब्रह्माकुमार सूरज भाई ने आज ब्रह्मा वत्सों की बहुत ही सारगर्भित क्लास कराई और सभी को भट्ठी का लक्ष्य स्पष्ट किया। उसी क्लास का सार यहाँ पर आप सबके लाभार्थ प्रस्तुत कर रहे हैं, सो लाभ अवश्य लेना जी:

भाग्य बनाने के लिए निमित्त और निर्माण भाव तथा निर्मल स्वभाव जरूरी… बीके सूरज भाई

रायपुर, 07 जनवरी, 2024: शान्ति सरोवर रिट्रट सेन्टर रायपुर (छत्तीसगढ़) में भाईयों की योगभट्ठी का शुभारम्भ बीके सूरज भाई, ज्ञान सरोवर की बीके गीता दीदी, पुणे के बीके सन्दीप भाई और रायपुर संचालिका बीके सविता दीदी द्वारा दीप प्रज्वलित करके किया।

उद्घाटन सत्र में क्लास कराते हुए ब्रह्माकुमार सूरज भाई ने कहा कि समय, श्वांस और संकल्प यह तीन खजाने बाबा ने हमको यज्ञ में सफल करने के लिए दिए हैं। किन्तु अगर हमारे जीवन में निमित्त और निर्माण भाव तथा निर्मल स्वभाव नहीं है तो हमारा भाग्य नहीं बनता है। इन तीनों बातों का अभाव हमें आगे बढऩे नहीं देते और हमारी अध्यात्म की राह में अवरोध पैदा करते हैं।

निमित्त और निर्माण भाव तथा निर्मल स्वभाव अध्यात्म की बुनियाद (नींव) हैं। इन्हें धारण करने से जीवन योगयुक्त बनता है। यह बाबा के नजदीक पहुंचने में भी मददगार हैं। इसका आधार है स्वमान और स्वमान में स्थिति तब बनती है जब हम स्वमान को मन से स्वीकार करते हैं। सिर्फ उसे रटना नहीं है। बाबा ने हमें अनेक स्वमान दिए हैं। जैसे कि आप सृष्टि की महान आत्मा हो, हीरो एक्टर हो, सृष्टि को बल देने वाली हो, इस जहान् के नूर हो आपके बिना जहान् वीरान हो जाता, आप मास्टर ज्ञानसूर्य हो आपकी किरणों से माया के किटाणु नष्ट हो रहे हैं, आप ईष्ट देव और देवी हो जिनकी मन्दिरों में पूजा हो रही है, आपके जैसा भाग्यवान दुनिया में दूसरा कोई नहीं है, आप मास्टर सर्वशक्तिवान हो, आपने शक्ति के बल पर माया को बारम्बार जीता है, आप कल्प-कल्प के विजयी आत्मा हो, आप पवित्रता के फरिश्ते हो, आपको इस संसार को दु:खों से मुक्त करना है, आप साधारण आत्मा नहीं हो आदि-आदि। सारे दिन में कम से कम एक बार इन स्वमानों का अभ्यास जरूर करना है।

बीके सूरज भाई ने आगे कहा कि स्वमान के एक-एक महान संकल्प हमारे अनेक व्यर्थ संकल्पों को समाप्त करने में सक्षम हैं। बाबा ने अव्यक्त वाणी में कहा है कि आप व्यर्थ को अवाईड करो तो अवार्ड मिलेगा। इसलिए व्यर्थ को समाप्त करना हमारा लक्ष्य बन जाना चाहिए क्योंकि जब कोई लक्ष्य बना लेता है तो वह उसे छोडऩे का पुरूषार्थ करता है।

उन्होंने बतलाया कि हमारे हर संकल्प में एनर्जी समाहित होती है। जब हम स्वमान के संकल्प करते हैं तो उससे बहुत ज्यादा एनर्जी पैदा होती है। विचार करें कि मैं देवकुल की महान और निर्विकारी आत्मा हूँ। यह कल्पना नहीं है। यह सत्य है कि हम देव कुल में सम्पूर्ण निर्विकारी थे। इसे दिल से स्वीकार करें। इससे पाजिटिव एनर्जी पैदा होगी जो कि हमारे ब्रेन में जाएगी। इससे हमारा अनकांसियश माइण्ड (अन्र्तचेतना) जागृत हो जाएगी। जब हम संकल्प करते हैं कि मैं देवकुल की आत्मा हूँ तो हमारे अन्दर देवत्व जागृत हो जाएगा। स्वमान को बढ़ाएंगे तो व्यर्थ पीछे छूट जाएगा। व्यर्थ सकंल्प हमें कमजोर बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि मन का काम है विचार करना। इसलिए अच्छा होगा कि हम उसे संकल्प दें अन्यथा वह स्वत: ही व्यर्थ संकल्प करने लगेगा। हम संकल्प देंगे तो उसकी भागदौड़ समाप्त हो जाएगी। मैंने किया, मैं करता हूँ, यह चीज मेरी है आदि विचार छोटे विचार हैं। माताओं को बच्चों से बहुत लगाव होता है जो कि नेचुरल है। लेकिन हमेशा सोचो कि पिछले जन्म में मेरे बच्चे यह नहीं बल्कि दूसरे थे। अगले जन्म में भी यह नहीं बल्कि दूसरे लोग बच्चे बनेंगे। तो मोह निकल जाएगा। बच्चों को पालना, बड़ा करना और योग्य बनाना आपकी ड््यूटी है। इसलिए वह सब करो किन्तु उनसे लगाव नहीं रखो।

बीके सूरज भाई ने कहा कि किसी भी कार्य को मैं कर रहा हूँ यह मत सोचो। हमेशा सोचो कि करन करावनहार बाबा करा रहा है। हमारी बागडोर बाबा ने अपने हाथ में ले ली है। अगर मैंपन आया तो यह मैंपन की दीवार बाबा की शक्तियों को हमारे अन्दर प्रवेश नहीं करने देगी। इसलिए मैंपन की दीवार पैदा नहीं करो। बाबा करा रहा है यह भाव पक्का करो। निमित्त भाव को बढ़ाएं। कोई भी कार्य भारी पड़ रहा हो तो उसे बाबा को सौप दें। आपका काम आसान हो जाएगा। कार या बाईक में बैठ रहे हों तो बैठने से पहले बाबा का आह्वान करो फिर उसमें बैठो और गन्तव्य में पहुंचने पर बाबा का धन्यवाद करो कि उन्होंने आपको सकुशल पहुंचा दिया।

उन्होंने बतलाया कि हमारी श्रेष्ठ स्थिति और उनसे फैलने वाले प्रकम्पन सैंकड़ों आत्मों की सुरक्षा करेंगे। प्रकम्पन श्रेष्ठ बनेंगे स्वमान से। जितना स्वमान बढ़ेगा उतना अभिमान और मैंपन खत्म होगा। आप जितना स्वमान में रहेंगे उतना आपको सम्मान मिलेगा। जो बच्चे स्वमान में रहते हैं तो ज्ञानसूर्य की किरणें उनकी छत्रछाया बनकर रक्षा करेंगी। स्वमान की सीट में सेट रहने वाले बच्चों का जिम्मेवार बाबा है। जो अपसेट रहते हैं वह अपना जिम्मेदार स्वयं होते हैं। अमृतबेले से अपनी शुरूआत श्रेष्ठ स्वमान से करो। अमृतबेले को अच्छा बनाने के लिए रात्रि का भोजन हल्का और जल्दी कर लेना चाहिए। ताकि सुबह जब उठें तो तरोताजा रहें। उठते ही स्वमान के संकल्प करें। जिनका अमृतबेला सफल होगा उनका पूरा कल्प सफल होगा। बाबा से हमें क्या-क्या मिला है वह याद करें। उसके लिए बाबा का शुक्रिया करें। जो कुछ मेरे पास है वह प्रभु की देन है।

हमारे मन में अभिमान, ईर्ष्या, द्वेष होने से हमारे बोल बिगड़ जाते हैं। क्रोध मनुष्य की क्षमता को कम कर देते हैं। इसलिए भावनाओं को सुन्दर बनाएं। सबके लिए शुभ कामनाएं रखें। हमारे बोल दूसरों को प्रोत्साहित करने वाले हों। दूसरों की अच्छाइयों को एप्रीसिएट करें। ओमशान्ति।

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सुहाना सफर-एन एडवेन्चर इन टू अवेयरनेस

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जीवन की राह को आसान बनाने की अनूठी पहल…
– ब्रह्माकुमारीज के यातायात एवं यात्री प्रभाग का आयोजन…
– यात्री कृपया ध्यान दें – के अन्तर्गत सुहाना सफर कार्यक्रम हुआ…
– जीवन के सफर में हमारी मुस्कान ही हमारी असली पहचान… ब्रह्माकुमारी कविता दीदी

रायपुर, छत्तीसगढ़: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के यातायात एवं यात्रा प्रभाग द्वारा जीवन की यात्रा को आसान, आनन्दमय और सफल बनाने के लिए यात्री कृपया ध्यान दें -कार्यक्रम का आयोजन किया गया। चर्चा का विषय था सुहाना सफर-एन एडवेन्चर इन टू अवेयरनेस। इस कार्यक्रम के माध्यम से भौतिक यात्रा और जीवन यात्रा के बीच समानताएं दर्शाते हुए प्रतिभागियों को आन्तरिक शान्ति और खुशी का मार्ग बतलाया गया।

समारोह में मुम्बई से पधारी यातायात प्रभाग की नेशनल कोआर्डीनेटर ब्रह्माकुमारी कविता दीदी, विधायक पुरन्दर मिश्रा, पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला, एडीआरएम बजरंग अग्रवाल, सीनियर डीसीएम अवधेश कुमार त्रिवेदी, ब्रह्माकुमारी सविता दीदी और ब्रह्माकुमार सुवास भाई ने हिस्सा लिया।

यातायात प्रभाग की नेशनल कोऑर्डीनेटर ब्रह्माकुमारी कविता दीदी ने सभी को जीवन में होने वाले बदलाव को स्वीकार करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जिस प्रकार एक यात्री अपनी यात्रा के दौरान टिकट, पहचान पत्र और दवाईयाँआदि लेकर चलता है उसी प्रकार जीवन के सफर में हमारी मुस्कान ही हमारी असली पहचान है और लोगों से मिलने वाली दुआएं ही दवा का काम करती हैं। इस रोमांचक यात्रा में उन्होंने विभिन्न स्टेशन के माध्यम से मानवीय मूल्यों और जीवन दर्शन की शिक्षा भी दी।

आधुनिक चुनौतियों की चर्चा करते हुए उन्होंने पर्यावरण के प्रति जागरूकता और अपने कर्मों के प्रति सजगता बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने नो नेटवर्क जोन के माध्यम से डिजिटल दुनिया की बजाए वास्तविक सम्बन्धों और राजयोग मेडिटेशन को अपनाने पर जोर दिया। अन्त में प्रतिभागियों को राजयोग के अभ्यास द्वारा स्वयं को परमात्मा से जोडऩे का अनुभव कराया गया ताकि उनका हर पल सुहाना बन सके।

विधायक पुरन्दर मिश्रा ने कहा कि यातायात की समस्या एक जटिल समस्या है। इसे हल करने के लिए सबको संगठित रूप से प्रयास करने की जरूरत है। हमें देशहित और राज्य के हित में एकजुट होकर काम करना होगा इसी में हमारा स्वयं का हित भी निहित है। इसमें जनजागरण की प्रमुख भूमिका हो सकती है।

पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने कहा कि यातायात एक ऐसा प्रभाग है जो कि हम सबके जीवन से जुड़ा हुआ है। हम अक्सर यह सुनते आए हैं कि जितना कम सामान होगा उतना सफर आसान होगा। प्रकृति का स्वभाव है देना। वह हमें हवा, पानी प्रदान करती है। हमारा शरीर पांच तत्वों से बना है इसलिए हमारा स्वभाव भी देने का होना चाहिए। जीवन में कुछ पाना चाहते हैं तो दूसरों को देना सीखें।

अपर मण्डल प्रबन्धक (एडीआरएम) बजरंग अग्रवाल ने कहा कि हमारा जीवन सरल होना चाहिए जटिल नहीं। सरलता से जीवन में खुशी मिलती है। जीवन में जो कुछ मिला है उस पर सन्तोष रखें। ईश्वर का और प्रकृति का धन्यवाद करें।

वरिष्ठ वाणिज्य प्रबन्धक (सीनियर डीसीएम) अवधेश कुमार त्रिवेदी ने कहा कि जीवन और रेलगाड़ी में काफी समानताएं हैं। हमें पता नहीं है कि जीवन का लक्ष्य क्या है? सब भाग रहे हैं। लेकिन कहीं तो रूकना पड़ेगा। हमेेें ठहरकर जीवन की सार्थकता पर चिन्तन करना होगा।

प्रारम्भ में रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज के बाल कलाकारों द्वारा मनमोहक स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में यातायात प्रभाग से जुड़े लोग एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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सुरक्षा सेवा प्रभाग

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सादर प्रकाशनार्थ
– स्व सशक्तिकरण से राष्ट्र का सशक्तिकरण अभियान का शुभारम्भ हुआ…
– सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने व तनाव मुक्ति हेतु ब्रह्माकुमारीज का प्रयास…
– प्रत्येक कार्य को कर्तव्य समझकर पूरी निष्ठा और तन्मयता के साथ करें… अरूण देव गौतम
– अगले क्षण क्या हो जाए निश्चित नहीं, इसलिए इस क्षण को खुशी से जीयें…ई.वी. स्वामीनाथन
नवा रायपुर 07 जून, 2026: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के अनुषांगिक संगठन राजयोगा एजुकेशन एण्ड रिसर्च फाउण्डेशन के सुरक्षा प्रभाग द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में सुरक्षा बलों के मनोबल में वृद्घि करने तथा तनाव मुक्ति हेतु आयोजित विशेष अभियान का शुभारम्भ नवा रायपुर के सेक्टर-20 स्थित शान्ति शिखर में किया गया।
कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, सीआईएसएफ के कमाण्डेन्ट मनिन्दर सिंह, बीएसएफ के कमाण्डेन्ट एस.आर. खान सहित बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों के अधिकारी और जवान उपस्थित थे। विषय था: स्व-सशक्तिकरण से राष्ट्र का सशक्तिकरण (Self Empowerment to Nation Empowerment)।
पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम ने कहा कि मन में जब द्वन्द छिड़ा हो तो उसका समाधान गीता के माध्यम से प्राप्त होता है। मन बड़ा बलवान होता है। इसे बहुत अच्छी तरह से गीता में समझाया गया है। जिस दिन अपने मन को समझ जाएंगे उस दिन बहुत सारी दुविधाओं से मुक्त हो जाएंगे। कभी गुस्सा नहीं आए मन शान्त रहे यह बहुत बड़ी साधना है। प्रत्येक कार्य को कर्तव्य समझकर करें तो मन विचलित नहीं होगा। किसी से दुश्मनी निकालते हैं या मार देते हैं तो मन में पश्चाताप होता है किन्तु देशहित में दुश्मन को कर्तव्य समझकर करेंगे तो मन में पश्चाताप नहीं होगा। अपने कार्य को पूरी निष्ठा और तन्मयता के साथ करें।
उन्होंने योग और निद्रा की चर्चा करते हुए बतलाया कि योग में बुद्घि को जागृत रखें, सजग होकर कर्म करें और अपनी चेतना को बरकरार रखें तो आप जिन्दगी में कभी निराश नहीं होंगे कभी तनाव में नहीं आएंगे।
लाईफ कोच एवं ट्रेनर ई.वी. स्वामीनाथन ने कहा कि देश की रक्षा हम तब कर सकेंगे जब हम स्वयं सुरक्षित रहें और स्वयं की रक्षा के लिए शरीर और मन का स्वस्थ होना जरूरी है। अगर हमने अपने मन का ध्यान नहीं रखा तो कुछ समय बाद हृदयरोग और बाईपास की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए स्वस्थ जीवन शैली का अपनाना होगा ताकि मन के साथ-साथ शरीर भी स्वस्थ रहे। स्वास्थ्य के लिए व्यायाम बहुत महत्वपूर्ण है। जब से हम लोग योग दिवस मनाने लगे हैं तब से लोग ज्यादा हेल्थ कान्सियस हो गए हैं। सुबह-सुबह लोग पैदल चलते हैं लेकिन किस मानसिक अवस्था में वाकिंग कर रहे हैं वह बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। उस समय खुशी से अच्छे विचारों में रमण करते हुए वाकिंग करें।
उन्होंने कहा कि जब आप ड्यूटी पूरी करके घर जाते हैं तो आफिस के तनाव को घर लेकर न जाएं।  उन्होंने हर कार्य को बहुत खुशी से करने की सलाह देते हुए कहा कि हमारे जीवन में अगले क्षण क्या हो जाए कुछ भी निश्चित नहीं है इसलिए इस क्षण को खुशी के साथ वाह-वाह करके जीना सीखो।
क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने कहा कि स्वसशक्तिकरण के लिए स्व की पहचान जरूरी है। प्रेम, सुख, शान्ति आदि आत्मा के मूल गुण है। जब हम धैर्यपूर्वक बहुत सोच-समझकर कोई कार्य करते हैं तब सफलता मिलती है।
सुरक्षा सेवा प्रभाग की गतिविधियों की जानकारी देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के ज्वाइन्ट डायरेक्टर कैप्टन शिव सिंह ने सुरक्षा सेवा प्रभाग की सेवाओं की जानकारी देते हुए बतलाया कि यह विंग २००१ में बना और इसकी प्रेरणा स्वयं फौज के अधिकारी ने दी। आज यह विंग समय-समय पर अभियान के द्वारा कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक अपनी सेवाएं दे रहा है।
प्रारम्भ में रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। ब्रह्माकुमारी आशा दीदी ने आभार प्रदर्शन किया। सभा का कुशल संचालन सेवानिवृत्त कर्नल बी. सी. सती ने किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में बच्चों ने नृत्य नाटिका के द्वारा सैनिको के शौर्य और बलिदान को प्रदर्शित किया।
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समर कैम्प का समापन.

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ब्रह्माकुमारीज समर कैम्प –
रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ समर कैम्प का समापन…
– माता पिता की सीख जीवनभर हमारा मार्गदर्शन करती हैं…न्यायमूर्ति गौतम चौरडिय़ा
– बच्चों के चारित्रिक विकास में ब्रह्माकुमारीज का समर कैम्प मददगार… उज्जवल पोरवाल, अपर कलेक्टर
– बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आध्यात्मिक शिक्षा जरूरी..ब्रह्माकुमारी सविता दीदी
रायपुर, 11 मई 2026: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित प्रेरणा समर कैम्प का समापन रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ सम्पन्न हुआ। शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर मे आयोजित समापन समारोह में छ.ग. राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरडिय़ा,छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष विनोद अरोरा, अपर कलेक्टर उज्जवल पोरवाल, रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी, ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी और ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी ने विचार व्यक्त किए।
छ.ग. राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरडिय़ा ने समर कैम्प आयोजित करने के लिए ब्रह्माकुमारी संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि कोई एक दिन में महान नहीं बनता है। जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है। कभी कोई बच्चा फेल हो जाए तो पैरेन्ट्स नाराज न हों। बच्चे को मारे-पीटे नहीं बल्कि उसे प्यार से शिक्षा का महत्व समझाएं। मदर्स डे पर माँ को याद करते हुए उन्होंने बतलाया कि उनकी माँ ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी। गांव से आयी थी फिर भी बड़ी विनयवान, विद्वान और समझदार थी। उनकी माता जी के द्वारा दी गई मानवीय मूल्यों की शिक्षा आज भी उनका मार्गदर्शन करती है।
उन्होंने कहा कि बच्चे बहुत कोमल होते हैं उन्हें प्यार से शिक्षा और सावधानी देकर सम्भालिए। बच्चों को भयमुक्त बनाइए ताकि वह अपने मन की बात पैरेन्ट्स के साथ कर सकें। वह स्वयं भी कभी परीक्षा में असफल रहे किन्तु बाद में माँ की प्रेरणा से प्रावीण्य सूची में उत्तीर्ण हुए। वह आज जो कुछ भी हैं वह अपनी माँकी बदौलत ही हैं।
अपर कलेक्टर उज्जवल पोरवाल ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस समर कैम्प की विशेषता यह रही कि यहाँ पर बच्चों के व्यक्तित्व के हर पहलू पर ध्यान दिया गया। इसी का सबूत है कि आज सबने बहुत ही सुन्दर कल्चरल कार्यक्रम प्रस्तुत किया। उन्होंने आग्रह किया कि इसकी अवधि दस दिनों से बढ़ाकर पन्द्रह दिनों का कर देना चाहिए। वर्तमान समय पूरे विश्व में युद्घ का माहौल है। दुनिया में उथल-पथल मची हुई है। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है कि ऐसे समय पर बच्चों ने मेडिटेशन द्वारा शान्ति का अनुभव किया। बच्चों को राजयोग मेडिटेशन सिखलाया गया जिससे उनकी एकाग्रता बढ़ी है।
छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष विनोद अरोरा ने बच्चों के द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि इससे बच्चों में रचनात्मकता की झलक दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि जीवन में थोड़ा स्ट्रेस जरूरी है। इसके बिना जीवन में तरक्की नहीं कर सकते। तनाव को कम करने की कला सीखने की जरूरत है। बच्चों को असफलता से  परेशान होने की जरूरत नहीं है। यह आपको अनुभवी बनाने के लिए आता है। उन्होंने पैरेन्ट्स को सुझाव देते हुए कहा कि घर में मोबाईल में ही नही लगे रहें बच्चों के लिए भी समय निकालें।
रायपुर केन्द्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि माता-पिता और बच्चों के बीच प्रेम, सम्मान और समझ हो तो घर स्वर्ग जैसा हो जाता है। बच्चों के लिए पहली पाठशाला घर ही होता है। उन्होंने बतलाया कि राजयोग से बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है। बच्चों के साथ ही बड़ों के लिए भी राजयोग मेडिटेशन जरूरी है। इससे एकाग्रता बढ़ती है और मन को शान्ति मिलती है।
कार्यक्रम की शुरूआत में ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी ने मूल वक्तव्य दिया। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने किया। समर कैम्प में विजयी बच्चों को पुरस्कार व प्रमाण पत्र भी दिया गया।
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