Brahma Kumaris News
नवा रायपुर के सेक्टर-20 में समर कैम्प शुरू हुआ-
ब्रह्माकुमारीज द्वारा नवा रायपुर के सेक्टर-20 में समर कैम्प शुरू हुआ-
– खेल-खेल में बच्चों को मिल रही अध्यात्म और राजयोग की शिक्षा…
– समर कैम्प के माध्यम से देश का भविष्य संवर रहा है…
– स्कूलों में सिर्फ किताबी शिक्षा मिल रही है…
नवा रायपुर 6 मई 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा नवा रायपुर के सेक्टर-20 स्थित एकेडमी फॉर ए पीसफुल वर्ल्ड शान्ति शिखर में आयोजित समर कैम्प का शुभारम्भ श्री सत्यसाईं हास्पीटल के चेयरमैन श्रीनिवास राव, कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलसचिव संदीप गाँधी, छात्र कल्याण अधिकारी श्रीमती विभा चन्द्राकर, अपेक्स बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर कमल नारायण काण्डे, रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी और ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने दीप प्रज्वलित करके किया।
बच्चों को सम्बोधित करते हुए श्री सत्यसाईं हास्पीटल के चेयरमैन श्रीनिवास राव ने ब्रह्माकुमारी बहनों के तपस्वी जीवन और समर कैम्प की सराहना करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में दैवी गुणों से सम्पन्न बहनों को देखकर मैं आश्चर्यचकित रह जाता हूँ। यहाँ के शान्त और पवित्र वातावरण को देखकर मेरा भी समर कैम्प में शामिल होने का मन कर रहा है। मेरा मानना है कि दुनिया में ब्रह्माकुमारी$जजैसी अन्य कोई दूसरी संस्था नहीं है।
कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलसचिव संन्दीप गाँधी ने समर कैम्पके फायदे गिनाते हुए कहा कि बच्चों को इस समर कैम्प से अनुशासन के साथ-साथ मनोरंजन और मेडिटेशन सीखने का भी लाभ मिलने वाला है। आप बच्चे बहुत अधिक भाग्यशाली हैं कि आपको इतनी श्रेष्ठ संस्थान द्वारा आयोजित समर कैम्प में शामिल होने का अवसर मिला है।
अपेक्स बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर कमलकान्त काण्डे ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं। ब्रह्माकुमारी संस्था समर कैम्प के माध्यम से देश के भविष्य को संवारने का श्रेष्ठ कार्य कर रही हैं। उन्होंने बच्चों को नैतिक मूल्यों के साथ ही घर और स्कूल में स्वच्छता और पर्यावरण पर भी ध्यान देने पर जोर दिया। हमारा लक्ष्य सिर्फ डॉक्टर इन्जीनियर बनना ही नहीं बल्कि अच्छा इन्सान बनने का होना चाहिए।
रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि आजकल स्कूलों में सिर्फ किताबी ज्ञान ही दिया जाता है। इसलिए वर्तमान शिक्षा सिर्फ रोजगार प्रदान करने तक सीमित हो गई है। हम बच्चों को समर कैम्प के माध्यम से नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की शिक्षा देते हैं जो कि आगे चलकर उनके जीवन में बहुत काम आने वाली है। उन्होंने बच्चों से कहा कि बड़ा आदमी बनना है तो कभी गुस्सा मत करना। झूठ नहीं बोलना और सबका सहयोगी बनकर रहना।
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बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
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स्वयं को पहचानें और परमात्मा से जुड़ें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी: बी.के. श्रेया
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तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…
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अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…
रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया
दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।
तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।
दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।
शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:
सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।
भविष्य के लिए लिया संकल्प:
दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।
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