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Brahmakumaris Raipur

पर्यावरण महोत्सव

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पर्यावरण महोत्सव में पर्यावरण सरंक्षण पर चर्चा हुई…
– प्रकृति और संस्कृति दोनों को बचाने की जरूरत… रामसेवक पैकरा, अध्यक्ष वन विकास निगम
– प्लास्टिक से प्रकृति का दम घुट रहा है… प्रेम कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन सरंक्षक
– प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने के लिए दृढ़ संकल्पित होने की जरूरत… ब्रह्माकुमारी सविता

रायपुर,01 जून, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा विधानसभा रोड स्थित शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर में पर्यावरण दिवस पर परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में वन विकास निगम के अध्यक्ष राम सेवक पैकरा, वन विभाग के अपर प्रधान मुख्य वन सरंक्षक (वन्य जीवन) प्रेम कुमार और ब्रह्माकुमारी भावना दीदी ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने की। चर्चा का विषय था -पर्यावरण सरंक्षण और हमारा दायित्व।

इस अवसर पर बोलते हुए वन विकास निगम के अध्यक्ष राम सेवक पैकरा ने कहा कि प्रकृति ने हमें बहुमूल्य सम्पदा के रूप में अनेक उपहार दिए हैं। एक ओर विकास हो रहा है तो दूसरी ओर विनाश हो रहा है। प्रकृति को प्रदूषित करने के लिए हम सब दोषी हैं। प्राकृतिक वन को हमने उजाड़ा है। वन सरंक्षण के लिए लोगों में जन जागृति लाने की जरूरत है। हमें प्रकृति और संस्कृति दोनों को बचाने के लिए कार्य करना होगा।

उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश नदी-नालों और जंगलों से घिरा हुआ है। उन्हें सरंक्षित करने की आवश्यकता है। प्राकृतिक असन्तुलन के कारण हमें अतिवृष्टि और अनावृष्टि का सामना करना पड़ रहता है। इसी प्रकार खेती में रसायनिक खेती को छोड़कर जैविक खेती को अपनाने की जरूरत है। वन विकास निगम ने इस वर्ष औद्योगिक क्षेत्रों में 15 से 18 लाख वृक्ष लगाने का लक्ष्य रखा है।

अपर प्रधान मुख्य वन सरंक्षक (वन्य जीवन) प्रेम कुमार ने कहा कि वर्तमान समय प्रदूषण इतना विकराल रूप ले चुका है कि हरेक को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझने की जरूरत है। आजकल प्लास्टिक बहुत बड़ी समस्या बन चुका है। इससे प्रकृति का दम घुट रहा है। हर साल हम तिरालिस लाख टन प्लास्टिक कचरा धरती और नदियों में हम डाल रहे हैं। प्लास्टिक का कुछ अंश हमारे ब्लड में भी घुल चुका है।

उन्होंने कहा कि अगर जीवन में खुशी चाहते हैं तो अधिक से अधिक पेड़ लगाएं और उनका संवर्धन करें। लोग जंगलों में घूमने जाते हैं तो प्लास्टिक वहीं छोड़कर आ जाते हैं जिसको हिरन आदि जानवर खाकर मर रहे हैं। हमें अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

रायपुर केन्द्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि प्रकृति ने हमारी जरूरत के मुताबिक सब कुछ दिया है लेकिन जब हम लोभवश उसका अत्यधिक दोहन करने लगते हैं तब समस्या शुरू होती है। हमें पानी की कीमत तब पता चली जब वह बोतल में बिकने लगा। इसी प्रकार आक्सीजन का महत्व हमें कोविड के दौरान पता चली। आज दृढ़ संकल्पित होने की जरूरत है कि हम प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे। अपने साथ एक खाली कपड़े की थैली जरूर रखें।

इससे पहले ब्रह्माकुमारी भावना दीदी ने कहा कि जल, जंगल, जमीन और जानवरों की सुरक्षा से ही पर्यावरण सरंक्षण संभव है। उन्होंने बतलाया कि प्रकृति के साथ-साथ मन के प्रदूषण को भी खत्म करने की जरूरत है। किसी के घर में मृत्यु होने पर उसके नाम से एक पेड़ जरूर लगाएं।

इस अवसर पर वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा और अपर प्रधान मुख्य वन सरंक्षक प्रेमकुमार ने शान्ति सरोवर में वृक्षारोपण भी किया।

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समर कैम्प का समापन.

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ब्रह्माकुमारीज समर कैम्प –
रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ समर कैम्प का समापन…
– माता पिता की सीख जीवनभर हमारा मार्गदर्शन करती हैं…न्यायमूर्ति गौतम चौरडिय़ा
– बच्चों के चारित्रिक विकास में ब्रह्माकुमारीज का समर कैम्प मददगार… उज्जवल पोरवाल, अपर कलेक्टर
– बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आध्यात्मिक शिक्षा जरूरी..ब्रह्माकुमारी सविता दीदी
रायपुर, 11 मई 2026: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित प्रेरणा समर कैम्प का समापन रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ सम्पन्न हुआ। शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर मे आयोजित समापन समारोह में छ.ग. राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरडिय़ा,छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष विनोद अरोरा, अपर कलेक्टर उज्जवल पोरवाल, रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी, ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी और ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी ने विचार व्यक्त किए।
छ.ग. राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरडिय़ा ने समर कैम्प आयोजित करने के लिए ब्रह्माकुमारी संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि कोई एक दिन में महान नहीं बनता है। जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है। कभी कोई बच्चा फेल हो जाए तो पैरेन्ट्स नाराज न हों। बच्चे को मारे-पीटे नहीं बल्कि उसे प्यार से शिक्षा का महत्व समझाएं। मदर्स डे पर माँ को याद करते हुए उन्होंने बतलाया कि उनकी माँ ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी। गांव से आयी थी फिर भी बड़ी विनयवान, विद्वान और समझदार थी। उनकी माता जी के द्वारा दी गई मानवीय मूल्यों की शिक्षा आज भी उनका मार्गदर्शन करती है।
उन्होंने कहा कि बच्चे बहुत कोमल होते हैं उन्हें प्यार से शिक्षा और सावधानी देकर सम्भालिए। बच्चों को भयमुक्त बनाइए ताकि वह अपने मन की बात पैरेन्ट्स के साथ कर सकें। वह स्वयं भी कभी परीक्षा में असफल रहे किन्तु बाद में माँ की प्रेरणा से प्रावीण्य सूची में उत्तीर्ण हुए। वह आज जो कुछ भी हैं वह अपनी माँकी बदौलत ही हैं।
अपर कलेक्टर उज्जवल पोरवाल ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस समर कैम्प की विशेषता यह रही कि यहाँ पर बच्चों के व्यक्तित्व के हर पहलू पर ध्यान दिया गया। इसी का सबूत है कि आज सबने बहुत ही सुन्दर कल्चरल कार्यक्रम प्रस्तुत किया। उन्होंने आग्रह किया कि इसकी अवधि दस दिनों से बढ़ाकर पन्द्रह दिनों का कर देना चाहिए। वर्तमान समय पूरे विश्व में युद्घ का माहौल है। दुनिया में उथल-पथल मची हुई है। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है कि ऐसे समय पर बच्चों ने मेडिटेशन द्वारा शान्ति का अनुभव किया। बच्चों को राजयोग मेडिटेशन सिखलाया गया जिससे उनकी एकाग्रता बढ़ी है।
छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष विनोद अरोरा ने बच्चों के द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि इससे बच्चों में रचनात्मकता की झलक दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि जीवन में थोड़ा स्ट्रेस जरूरी है। इसके बिना जीवन में तरक्की नहीं कर सकते। तनाव को कम करने की कला सीखने की जरूरत है। बच्चों को असफलता से  परेशान होने की जरूरत नहीं है। यह आपको अनुभवी बनाने के लिए आता है। उन्होंने पैरेन्ट्स को सुझाव देते हुए कहा कि घर में मोबाईल में ही नही लगे रहें बच्चों के लिए भी समय निकालें।
रायपुर केन्द्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि माता-पिता और बच्चों के बीच प्रेम, सम्मान और समझ हो तो घर स्वर्ग जैसा हो जाता है। बच्चों के लिए पहली पाठशाला घर ही होता है। उन्होंने बतलाया कि राजयोग से बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है। बच्चों के साथ ही बड़ों के लिए भी राजयोग मेडिटेशन जरूरी है। इससे एकाग्रता बढ़ती है और मन को शान्ति मिलती है।
कार्यक्रम की शुरूआत में ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी ने मूल वक्तव्य दिया। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने किया। समर कैम्प में विजयी बच्चों को पुरस्कार व प्रमाण पत्र भी दिया गया।
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अन्तर्राष्ट्रीय नर्स दिवस

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– शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर रायपुर में अन्तर्राष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया गया…
– सेवा, त्याग और करूणा को नमन करने का दिन है नर्स दिवस… ब्रह्माकुमारी सविता दीदी
– नर्सिंग प्रोफेसन सेवा भाव, समर्पण और त्याग से जुड़ा हुआ कार्य हैै…डॉ. कुलदीप छाबड़ा
रायपुर, 12 मई 2026: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के मेडिकल विंग द्वारा शान्ति सरोवर रिट्रीट में अन्तर्राष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में श्री बालाजी नर्सिंग कालेज के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डॉ. कुलदीप छाबड़ा, प्राचार्या वर्तिका शोलोमन, उप प्राचार्या डॉ. कविता सिंह तोमर, छत्तीसगढ़ नर्सिंग कालेज  की मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डॉ. भारवि वैष्णव, रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी और ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी ने हिस्सा लिया। समारोह में बड़ी संख्या में नर्सिंग कालेज के छात्र-छात्राएं और शिक्षकगण उपस्थित थे।
इस अवसर पर रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि आज का दिन सेवा, त्याग और करूणा को नमन करने का दिन है। आज का दिन नर्सोंके लिए बहुत ही विशेष है। नर्स एक व्यवसाय नहीं बल्कि सेवा भावना है। वह दया, करूणा और ममता की मूर्ति होती है। नर्स सिर्फ दवाई नहीं देती हैं बल्कि टूटे हुए मन को आशा का सम्बल प्रदान करती है। वह केवल इन्जेक्शन नहीं लगाती है अपितु डर से कांप रहे मरीज को हिम्मत देती है। वह सिर्फ रिपोर्ट नहीं देखती है लेकिन मरीज के दर्द को गहराई से महसूस भी करती है। अस्पतालो में टेक्नालॉजी बढ़ गई है लेकिन मरीज को सबसे ज्यादा जरूरत मानवीय संवेदना की होती है जो कि नर्स ही दे सकती है। उन्होंने सभी को राजयोग मेडिटेशन सीखने का सुझाव देते हुए कहा कि जब आपका मन शान्त होगा तो और अच्छी तरह मरीज की सेवा कर सकेंगे। लोगों की दुआएं प्राप्त कर सकेंगे।
श्री बालाजी ग्रुप ऑफ हास्पीटल के मुख्य प्रशासनिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलदीप छाबड़ा ने कहा कि नर्सिंग प्रोफेसन मेडिकल प्रोफेसन की बैकबोन है। यह सेवा भाव, समर्पण और त्याग से जुड़ा हुआ प्रोफेसन है। इनके बिना चिकित्सा करना कठिन है। उन्होंने नर्स शब्द की व्याख्या करते हुए कि एन का मतलब होता है नोबल अर्थात उत्कृष्ठ, यू का मतलब होता है अण्डरस्टैण्डिंग अर्थात समझदारी, आर का मतलब होता है रिसपान्सिबिलिटी अर्थात जिम्मेदारी, एस का मतलब होता है सिम्पैथिटिक अर्थात दया से भरपूर, ई का मतलब होता है एफिसिएन्ट अर्थात दक्ष।
छत्तीसगढ़ नर्सिंग कालेज की मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डॉ. भारवी वैष्णव ने कहा कि वर्तमान समय नर्सिंग स्टॉफ को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई बार आठ-आठ घण्टे उन्हें खड़े होकर काम करना पड़ जाता है। उन्हें खाना, नाश्ता कुछ नहीं मिल पाता। लेकिन फिर भी नर्स मरीजों की देखभाल बड़े प्रेम से करती है। मरीज के अन्दर अगर कोई जीने की ईच्छा और आत्मविश्वास पैदा कर सकती है तो वह है नर्स।
श्री बालाजी नर्सिंग कालेज की उप प्राचार्या डॉ. कविता सिंह तोमर ने कहा कि मशहूर नर्स फ्लोरेन्स नाईटएंगल के जन्मदिन को नर्स दिवस के रूप में मनाते हैं। मरीज को सबसे अधिक नर्स की जरूरत होती है। हमें इन्हें अच्छी सुविधाएं देनी चाहिए ताकि यह लोग अच्छे से अपना काम कर सकें।

ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी ने कहा कि आजीविका के लिए बहुत से कार्य दुनिया में हैं लेकिन आपने नर्स बनने का फैसला किया क्योंकि आपके अन्दर सेवा भाव है। यह इतना श्रेष्ठ कार्य है जिसमें आपको दुआएं मिलती हैं। उन्होंने राजयोग मेडिटेशन सीखकर जीवन में धैर्यता, नम्रता, मधुरता और गम्भीरता आदि गुणों को धारण करने पर जोर दिया ताकि अपना कार्य अच्छे से कर सकें।

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एन.एच.गोयल स्कूल

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– एन.एच.गोयल स्कूल के शिक्षकों ने किया राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास…
– तनाव प्रबन्धन कला विषय पर भी हुई चर्चा…
– स्कूल हमारे शिक्षा के मन्दिर की तरह… ब्रह्माकुमारी सविता दीदी
– मोबाईल की तरह ही आत्मा रूपी बैटरी को रोजाना चार्ज करने की जरूरत…
रायपुर, 29 अप्रैल 2026: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के शान्ति सरोवर रिट्रीट में एन.एच.गोयल स्कूल के शिक्षकों ने राजयोग मेडिटेशन का लाभ लिया। कार्यक्रम में एन.एच.गोयल स्कूल के डायरेक्टर एस.के.तोमर, प्राचार्य डॉ. अविनाश पाण्डे सहित बड़ी संख्या में वहाँ के शिक्षक उपस्थित थे। इस दौरान रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी, अदिति दीदी, रश्मि दीदी और स्मृति दीदी ने शिक्षकों का मार्गदर्शन किया।
ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि स्कूल हमारे शिक्षा के मन्दिर हैं जहाँ पर शिक्षक बच्चों की प्रतिभा को शिल्पकार की तरह तराशने का काम करते हैं। इस प्रकार शिक्षक की भूमिका समाज और राष्ट्र के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी ने ठीक ही कहा है कि देश का निर्माण संसद या विधानसभा में नहीं अपितु स्कूल की कक्षाओं में होता है। शिक्षक उस दीपक की तरह होते हैं जो कि स्वयं जलकर दूसरों को मार्ग दिखाते हैं। स्कूल में हरेक बच्चे का लक्ष्य होता है डॉक्टर, इन्जीनियर बनना। उसी के अनुरूप वह पढ़ाई करता है।
उन्होने बतलाया कि ब्रह्माकुमारी संस्थान का लक्ष्य है जीवन में दैवीगुणों को धारण कर मनुष्य को देवतुल्य बनना। हमारा शिक्षक स्वयं परमपिता परमात्मा है। वही हमारा माता-पिता, शिक्षक और सद्गुरू है। अब हमें अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाना है। इसके लिए ब्रह्माकुमारीज में राजयोग मेडिटेशन की शिक्षा प्रदान की जाती है। राजयोग मेडिटेशन बहुत ही सहज और सरल है। मेडिटेशन से हमें अपनी आन्तरिक शक्ति की पहचान मिलती है। मन और बुद्घि को परमात्मा में एकाग्र करने से उनकी शक्तियाँ हमारे जीवन में आने लगती हैं। जिस प्रकार की बैटरी को रोजाना चार्ज करना पड़ता है ठीक उसी प्रकार आत्मा की बैटरी को भी राजयोग से रोजाना चार्ज करने की जरूरत है।
ब्रह्माकुमारी स्मृति दीदी ने कहा कि राजयोग ऐसी साधना है जो हमारी सोच को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। हमारे मन में सारे दिन में अनेक प्रकार के विचार पैदा होते हैं। इन विचारों का हमारे शरीर पर बहुत सूक्ष्म और गहरा प्रभाव पड़ता है। यह विचार ही हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। हमारी सोच सदैव रचनात्मक होना चाहिए। सिर्फ अपने लिए ही नहीं बल्कि सभी की भलाई के लिए सोचें। उन्होंने तनाव से बचने के लिए तीन बातें बतलाईं। पहला हर परिस्थिति को स्वीकार करें, उससे विचलित न हों। दूसरा अपने काम से प्यार करेें, उसको बोझ न समझें और तीसरा किसी से कोई अपेक्षा न रखें।
अन्त में अपने संस्मरण सुनाते हुए एन.एच.गोयल स्कूल के डायरेक्टर एवं प्राचार्य ने कार्यक्रम की मुक्त कण्ठ से प्रशंसा करते हुए संस्थान से आगे भी उनके लिए ऐसे आयोजन करने का अनुरोध किया। उन्होंने मानसिक शान्ति के लिए राजयोग मेडिटेशन को उपयोगी बतलाते हुए उसके बारे में और अधिक जानने की उत्कण्ठा व्यक्त की।
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