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ब्रह्माकुमारी संस्थान समाज को दिशा देने का कार्य कर रही है … राम विचार नेताम, राज्यसभा सांसद

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सादर प्रकाशनार्थ

 

– ब्रह्माकुमारी संस्थान समाज को दिशा देने का कार्य कर रही है …

– वैदिक काल से ही भारत शान्ति का अग्रदूत …

– अशान्ति का प्रमुख कारण मनुष्य के व्यर्थ विचार …

– भौतिक साधनों से सुख और शान्ति की प्राप्ति नहीं हो सकती …

रायपुर, 11 सितम्बर, 2022: आज की भागदौड़ भरी दिनचर्या में समाज का नैतिक पतन मन को विचलित कर देता है। ऐसे समय पर ब्रह्माकुमारी संस्थान अपनी शिक्षाओं के द्वारा समाज को दिशा देने और लोगों को संस्कारित करने का शुभ कार्य कर रही है जो कि हम सब के लिए अनुकरणीय है।

 

यह विचार राज्यसभा सांसद राम विचार नेताम ने आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा शान्ति सरोवर में आयोजित परिचर्चा में व्यक्त किए। विषय था -विश्व शान्ति का अग्रदूत भारत। उन्होंने आगे कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था विश्व शान्ति के लिए पूरे सालभर में अनेक कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को शान्ति का सन्देश दे रही है। जिस शान्ति के लिए लोग भटक रहे हैं वह यहाँ शान्ति सरोवर में सहज ही मिल जाती है। यहाँ पर आने से ही शान्ति की अनुभूति होने लगती है।

 

छ.ग. राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग की रजिस्ट्रार श्रीमती उदय लक्ष्मी सिंह परमार ने कहा कि न सिर्फ आज बल्कि वैदिक काल से ही भारत शान्ति का अग्रदूत रहा है। जब हमारा देश आजाद हुआ तो विश्व दो गुटों में बटा हुआ था किन्तु भारत ने निर्णय किया कि वह किसी गुट के साथ न होकर गुट निरपेक्ष रहेगा।

 

उन्होंने कहा कि मन की शान्ति के लिए हमें धर्म अथवा अध्यात्म के पथ पर आगे बढऩा होगा क्योंकि शान्तचित्त रहने से ही हम स्वयं के व्यक्तित्व का निर्माण कर सकेंगे और विश्व शान्ति के लिए अपना योगदान दे सकेंगे। उनके स्वयं के व्यक्तित्व विकास में ब्रह्माकुमारी संस्थान का बड़ा योगदान रहा है। यह संस्थान विश्व शान्ति के लिए भी सराहनीय योगदान कर रही है।

 

ब्रह्माकुमारी संगठन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी ने कहा कि विश्व शान्ति का भारत हमेशा से ही पक्षधर रहा है। व्यक्ति समाज की इकाई है इसलिए उसके अन्दर शान्ति होने से विश्व में शान्ति हो सकती है। लेकिन आज वह काम क्रोध लोभ मोह और अहंकार से ग्रसित होने के कारण तनाव और अवसाद का शिकार हो रहा है। मन की शान्ति उससे दूर हो गई है। अशान्ति का प्रमुख कारण उसके व्यर्थ विचार हैं। आज यह प्रतिज्ञा करने की जरूरत है कि मैं मन वचन कर्म और सम्बन्ध सम्पर्क से कभी अशान्त नहीं होउंगा। इस तरह एक-एक व्यक्ति के शान्त होने से पूरा समाज, देश और फिर विश्व में शान्ति हो सकती है।

 

राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी स्मृति दीदी ने कहा कि शान्ति को हम भौतिक वस्तुओं में ढूंढते हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि अच्छा मकान बना लेंगे तो शान्ति मिल जाएगी कुछ लोग महंगी गाडिय़ों में उसे पाने का प्रयास करते हैं। किन्तु भौतिक साधनों से सुख और शान्ति की प्राप्ति नहीं हो सकती। शान्ति आन्तरिक अनुभूति है। वास्तव में आत्मा है ही शान्त स्वरूप। आत्मा का सही परिचय नही होने के कारण हम अपनी पहचान और संस्कृति को भूल गए हैं।

 

कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी ने किया।

 

प्रेषक: मीडिया प्रभाग,

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय

रायपुर फोन : 94255-02255

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महिला दिवस

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ब्रह्माकुमारी संस्थान में महिला दिवस मनाया गया-
– बच्चों को माताएं बाल्यकाल से सही राह दिखाएं… श्रीमती कौशल्या देवी साय
– मातृशक्ति को आगे बढ़ाना है तो उन्हें शिक्षित करना होगा…श्रीमती डॉ. वर्णिका शर्मा
– ब्रह्माकुमारी संस्थान में आने से शान्ति मिलती है… श्रीमती ज्योति गौतम
– भौतिकता में ही न खो जाएं आध्यात्मिकता को भी जीवन में अपनाएं … श्रीमती श्वेता सिन्हा
– नारी अब अबला नही रही सबला बन गई है… ब्रह्माकुमारी सविता दीदी
– नारी व्यक्ति नहीं शक्ति है… शताब्दि पाण्डे
– महान चरित्रों को गढऩे में महिलाओं की अहम भूमिका… ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी
रायपुर: अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में प्रजापिता ब्रह्मïाकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के महिला प्रभाग द्वारा विधानसभा मार्ग स्थित शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर में महिला जागृति आध्यात्मिक सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सम्मेलन का शुभारम्भ मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय, बाल सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, पुलिस महानिदेशक की धर्मपत्नी श्रीमती ज्योति गौतम, पुलिस अधीक्षक श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा, रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी, बीजेपी प्रवक्ता श्रीमती शताब्दि पाण्डे और बीके रश्मि दीदी ने दीप प्रज्वलित करके किया। विषय था- वन्दे मातरम् से स्वर्णिम भारत।
समारोह में बोलते हुए मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय ने कहा कि बच्चे का पहला गुरू माता -पिता होते हैं। इसलिए यदि आपने बच्चे को बचपन से ही सही राह दिखा दी तो बहुत बड़ा काम कर लिया। बाहर बहुत शोर है। वह कानों को सुन्न कर रहा है। हम भौतिकता में लिप्त हो रहे हैं। अब इससे दूर रहकर साधना की जरूरत है। कल क्या होगा नहीं मालूम इसलिए वर्तमान को जीना सीखें। अच्छे विचारों को फैलाइए और मानव जीवन को सफल बनाइए। मार्ग कितना भी कठिन क्यों न हो उस मार्ग पर चलना जरूर है।
उन्होंने कहा कि जिन्दगी कठिन नहीं है सहज है। कठिन हम बना लेते हैं। राजयोग को जीवन में अपनाएं औरों को भी प्रेरणा दें। हमें बेटियों को अच्छी शिक्षा देनी है ताकि वह ससुराल में जाकर अपनी जिम्मेदारी समझे। उन्होंने घोषणा की कि वह जुलाई माह में ब्रह्माकुमारी आश्रम देखने माउण्ट आबू जाएंगी।
बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि यदि मातृशक्ति को आगे बढ़ाना है तो उन्हें शिक्षित करना होगा। मन विजय से रण विजय होगा। शिक्षा हमें डिग्री देती है। पैसा दिलाती है। अर्थपूर्ण जीवन उपलब्ध कराती है। लेकिन यह अपराविद्या है। लेकिन आज हम बात करेंगे पराविद्या की। यह आत्मावलोकन कराती है। इसके लिए आत्मा और परमात्मा का ज्ञान जरूरी है। योग विद्या से आत्मबोध होगा।
रायपुर सेवाकेन्द्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि नारी अब अबला नही  रही वह सबला बन गई है। ब्रह्माकुमारी संस्थान पूरे विश्व में एकमात्र ऐसी संस्था है जिसका पूरा संचालन मातृ शक्ति  द्वारा किया जाता है। परमपिता परमात्मा ने ज्ञान का कलश माता-बहनों के सिर पर रखा है। बाहरी चकाचौध में न खो जाएं अपने अन्दर भी झाँक कर देखें। थोड़ा समय निकालकर राजयोग का अभ्यास करें। यह मन को शक्तिशाली और बुद्घि को दिव्य बनाने का अच्छा माध्यम है।
पुलिस महानिदेशक की धर्मपत्नी श्रीमती ज्योति गौतम ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान में आने से शान्ति मिलती है। उन्होंने अपना निजी अनुभव बतलाते हुए कहा कि जब उन्होंने राजयोग सीखा तो सबसे पहले उनके मन से भय और चिन्ता दूर हो गई। उन्होंने सभा में उपस्थित महिलाओं से आध्यात्मिकता को अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि अपने जीवन में परिवर्तन लाकर ही हम स्वर्णिम भारत बनाने के कार्य में मददगार बन सकते हैं।
पुलिस अधीक्षक (आईपीएस) श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने कहा कि सनातन धर्म में पुरूष और नारी को समान दर्जा प्राप्त है। घर परिवार में बच्चे को शिक्षित करने का कार्य माताएं करती हैं। इसलिए महिलाओं के लिए शिक्षा का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। भौतिकता में ही न खो जाएं। आध्यात्मिकता को जीवन में अपनाएं। कोविड ने हमें दिखा दिया कि कष्ट के समय पैसा आदि कुछ भी काम नहीं आता है। ऐसे समय पर मेडिटेशन और साधना ने लोगों को नया रास्ता दिखलाया है।
भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता श्रीमती शताब्दि पाण्डे ने कहा कि नारी व्यक्ति नहीं शक्ति है। वह बचपन में खेलकूद, पहाड़ पर चढऩे आदि कार्यों में अत्यन्त कुशल थी लेकिन वह बहुत उग्र स्वभाव की थी। जब उन्होंने राजयोग सीखकर उसका अभ्यास करना शुरू किया तो उनका स्वभाव ही बदल गया। अब वह सबके प्रति अपनेपन का भाव रखती है। राजयोग से हमारे अन्दर की शक्तियाँ जागृत हो जाती है।
इससे पहले विषय को स्पष्ट करते हुए राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने कहा कि महान चरित्रों को गढऩे में महिलाओं की अहम भूमिका होती है। नारी परिवार की धूरी है। वह घर को स्वर्ग बनाने वाली और बच्चों को सुसंस्कारित करने वाली है।
इस अवसर पर नगर के बाल कालाकारों ने नारी शक्ति के महत्व को उजागर करते हुए सुन्दर नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी अदीति दीदी ने किया।
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जन्मदिन की शुभकामनाये… मुख्यमंत्री

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बी.के सविता दीदी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाये दी .

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द्वादश ज्योतिर्लिंग झांकी,नवा रायपुर

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नवा रायपुर में द्वादश ज्योतिर्लिंग झांकी का शुभारंभ प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने किया।

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