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जीवन का आनन्द लेने के लिए आत्म निरीक्षण कर कमजोरियों को दूर करना जरूरी….. ब्रह्माकुमार सूरज भाई
सादर प्रकाशनार्थ
रायपुर में योगसाधना कार्यक्रम का शुभारम्भ …
जीवन का आनन्द लेने के लिए आत्म निरीक्षण कर कमजोरियों को दूर करना जरूरी….. ब्रह्माकुमार सूरज भाई
रायपुर, 16 जुलाई 2022: माउण्ट आबू से पधारे वरिष्ठ राजयोगी ब्रह्माकुमार सूरज भाई ने कहा कि वर्तमान जीवन का आनन्द लेने के लिए आत्मनिरीक्षण कर अपनी कमी और कमजोरियों को दूर करना होगा। पुरूषार्थ में आगे बढऩे के लिए यह जानना जरूरी है कि कौन से संस्कार हमारे मार्ग में विघ्न स्वरूप बन रहे हैं? कई बार हम दैनिक जीवन में व्यस्तता और तनाव के कारण आत्म निरीक्षण करना भूल जाते हंै।
ब्रह्माकुमार सूरज भाई प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा शान्ति सरोवर में आयोजित गहन योग साधना कार्यक्रम ”व्यक्त से अव्यक्त की ओर” में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इस योग साधना शिविर में हमें आत्म निरीक्षण कर अपना कल्याण करना है क्योंकि आत्म कल्याण के बिना विश्व कल्याण नहीं हो सकता।
उन्होंने आगे कहा कि समाज में दिन प्रतिदिन तनाव और अवसाद बढ़ता जा रहा है। कुछ लोग बहुत ज्यादा सोचने लगे हैं। भगवान ने इन्सान के रूप में हमें दो प्रमुख शक्तियॉं दी हैं, जिन्हें सही ढंग से उपयोग करके जीवन को महान बनाया जा सकता है। यह दो शक्तियॉं है-समय और संकल्प शक्ति। समय का मूल्य समझकर उसका सदुपयोग करने वाले व्यक्ति का जीवन मूल्यवान बन जाता है। इसलिए समय को छोटी-छोटी बातों में व्यर्थ ही नहीं गंवाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समय के अलावा हमें अपने एक-एक संकल्प को भी महत्व देना होगा। हमारे हर संकल्प में रचनात्मक शक्ति छिपी हुई है। हम जैसा संकल्प करते हैं हमारा ब्रेन उसी के अनुरूप अपने को एडजस्ट कर लेता है। इसलिए जो हम चाहते हैं वही हमारा चिन्तन होना चाहिए। व्यर्थ बातों से हमारी आन्तरिक शक्तियॉं नष्ट होती हैं। हमारे आज के सुन्दर विचार कल के अच्छे भविष्य का निर्माण करेंगे। तनाव से बचने के लिए हमारे पास अच्छे विचारों का भण्डार होना चाहिए।
माउण्ट आबू की ही ब्रह्माकुमारी गीता दीदी ने कहा कि हमारे जीवन में जो भी समस्याएं आ रही हैं, उनका समाधान अच्छे संकल्पों से किया जा सकता है। सुबह का संकल्प पूरे दिन की दिनचर्या के लिए ‘बीज’ की तरह काम करता है। हम अपने जीवन रूपी वृक्ष को जैसा बनाना चाहते हैं, वैसे संकल्पों का बीज सवेरे -सवेरे तैयार करना चाहिए।
इससे पहले क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी ने सभी साधकों का स्वागत किया। ब्रह्माकुमारी कमला दीदी, गीता दीदी, पार्षद अमर बंसल और ब्रह्माकुमार रूपेश भाई ने दीप प्रज्वलित कर गहन योग साधना शिविर का शुुभारम्भ किया। इस शिविर में पूरे रायपुर शहर के सभी सेवाकेन्द्रों से आए हुए लोग हिस्सा ले रहे हैं।
मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
शान्ति सरोवर, रायपुर
फोन: 0771- 2253253, 2254254
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बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
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अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…
रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया
दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।
तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।
दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।
शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:
सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।
भविष्य के लिए लिया संकल्प:
दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।
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