Brahma Kumaris News
चौथी बटालियन सीएएफ कैंप माना
– अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर चौथी बटालियन सीएएफ कैंप माना रायपुर में ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा विशेष योग एवं राजयोग सत्र आयोजित
– गीता युद्घशास्त्र नहीं योगशास्त्र है…ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी
रायपुर, 22 जून 2026: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा चौथी बटालियन छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ कैंप माना) रायपुर में एक विशेष योग एवं राजयोग मेडिटेशन सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ पुलिस सशस्त्र बल के 110 जवानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में एडिशनल एसपी श्रीमती रमा पटेल, एडिशनल डीएसपी श्रीमती प्रतिभा चंद्राकर, कमांडर श्री सत्य भूषण सिंह ब्रह्माकुमारी जागृति दीदी और ब्रह्माकुमार अनुपम भाई उपस्थित रहे।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी ने कहा कि श्रीमद भगवत गीता में भगवान ने अर्जुन को इसी राजयोग का परिचय दिया था और समझाया था कि इस योग को साधकर मनुष्य स्वयं पर विजय प्राप्त कर सकता है। आत्मबल से संपन्न हो सकता है और अपनी कर्मेन्द्रियों का सच्चा राजा बन सकता है। इसी कारण श्रीमद भगवत गीता को ‘योगशास्त्र’ कहा जाता है ‘युद्धशास्त्र’ नहीं।
उन्होंने वर्तमान समय की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज जब पूरी दुनिया तनाव, असंतुलन और मानसिक दबाव से गुजर रही है तब हमें उस योग को अपने जीवन में धारण करना चाहिए जिसे भारत ने विश्व को विरासत के रूप में दिया है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि जीवन में संतुलन, स्थिरता और आंतरिक शान्ति प्राप्त करने की कला है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय मानसिक संतुलन की अत्यधिक आवश्यकता है, क्योंकि मानसिक असंतुलन के कारण व्यक्ति के संबंधों, व्यवहार, निर्णय क्षमता और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। मन की दुर्बलता से इम्युनिटी पावर कमजोर होने लगती है।
राजयोग की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि राजयोग एक विज्ञान भी है और एक कला भी। यह कर्मेन्द्रियों को शुद्ध संस्कार देने का विज्ञान है तथा मन को अपना मित्र बनाने की कला भी है। जब हम अपने मन को सकारात्मक विचारों और सकारात्मक ऊर्जा से भरते हैं तो मन हमारा मित्र बन जाता है लेकिन जब मन में नकारात्मक विचारों का प्रवाह बढ़ जाता है तो वही मन व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु बन जाता है।
प्रारम्भ में ब्रह्माकुमार अनुपम भाई द्वारा जवानों को सूर्य नमस्कार का अभ्यास कराया गया। अन्त में ब्रह्माकुमारी जागृति दीदी ने सभी जवानों को राजयोग मेडिटेशन की गहन अनुभूति कराई। कार्यक्रम के बाद कई प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कुछ ही मिनटों के इस योग और राजयोग अभ्यास से उन्हें अत्यंत शांति, हल्कापन और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ।
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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस
ब्रह्माकुमारी संस्थान के साधकों ने शान्ति सरोवर में किया योग का अभ्यास…
– पूरे विश्व में दस लाख लोग राजयोग अपनाकर तनावमुक्त जीवन जी रहे…ब्रह्माकुमारी सविता दीदी
– कोविड के दौरान हुई क्षति को ठीक करने के लिए योग लाभदायी… डॉ. सरिता बाजपेयी
रायपुर, 21 जून 2026: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के सदस्यों ने आज सुबह विधानसभा मार्ग स्थित शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर में योग का अभ्यास किया। योग प्रशिक्षक आचार्य प्रदीप सिन्हा और कैलाश सिन्हा ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का मार्गदर्शन करते हुए शारीरिक स्वास्थ्य के लिए विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्घजन उपस्थित थे।
इस अवसर पर रायपुर स्थित सेवाकेन्द्रों की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि जैसे बिजली प्राप्त करने के लिए पावर हाउस से कनेक्शन करना होता है। पानी के लिए नलघर से कनेक्शन जरूरी होता है। ठीक वैसे ही आत्मा में शक्ति भरने के लिए सर्वशक्तिवान परमात्मा से सम्बन्ध जोडऩे की जरूरत होती है। परमात्मा से सम्बन्ध जोडऩे के लिए राजयोग मेडिटेशन अच्छा माध्यम है।
उन्होंने कहा कि योग दिवस मनाने के कारण लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हुए हैं। लेकिन हमारा शरीर भी स्वस्थ तब होगा जब हमारा मन स्वस्थ होगा। उन्होंने नकारात्मक और व्यर्थ विचारों से बचने की सलाह देते हुए कहा कि इससे आत्मा की शक्तिनष्ट होती है। उन्होंने बतलाया कि ब्रह्माकुमारी संस्थान से पूरे विश्व में दस लाख से अधिक लोग जुड़े हुए हैं जो कि राजयोग को अपनाकर तनावमुक्त और शान्तिमय जीवन जी रहे हैं। मन की शान्ति के लिए मेडिटेशन के अलावा अन्य कोई दूसरा उपाय नहीं है।
आर्ट ऑफ लिविंग की सीनियर फैकल्टी डॉ. सरिता बाजपेयी ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की धरोहर है जो कि योग दिवस के माध्यम से जन-जन तक पहुंच रहा है। कोविड से शरीर को जो क्षति पहुंची है उसे हम योग से ठीक कर सकते हैं। योग सिर्फ शारीरिक व्यायाम नहीं है। जब शरीर, मन, आत्मा और भावनाएं मिलकर एक हो जाती हैं तब वह समत्व ही योग है। शारीरिक रूप से स्वस्थ तथा मानसिक रूप से शान्त और भावनात्मक रूप से मजबूत होना ही योगी की निशानी है।
भारतीय योग संस्थान के प्रान्तीय प्रमुख मुकेश सोनी ने कहा कि इस वर्ष योग दिवस का थीम है स्वस्थ वृद्घावस्था के लिए योग। तन और मन दोनों का शोधन योग के द्वारा सम्भव है। तन के शोधन के लिए पातंजलि ने तीन सूत्र बतलाए हैं। जिनका अनुपालन कर हम स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकते हैं।
अन्त में कु. शारदा नाथ ने योग पर आधारित गीत प्रस्तुत कर मेडिटेशन कराया। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी रूचिका दीदी ने किया।
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विश्व रक्तदाता दिवस
– रक्तदान सबसे बड़ा दान, इससे बड़ी कोई सेवा नही… राज्यपाल श्री रमेन डेका
– विश्व रक्तदाता दिवस पर राज्यपाल ने ब्रह्माकुमारी सविता दीदी का किया सम्मान..
– लोकभवन में आयोजित हुआ सम्मान समारोह…
रायपुर, 14 जून 2026 :
दूसरों के जीवन की रक्षा करना मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है और यह अपने ही रक्त के एक बूंद से हो सके तो इससे बड़ा कोई पुण्य नहीं है। रक्त का दान सबसे बड़ा दान होता है। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज प्रदेश के स्वैच्छिक रक्तदाताओं का सम्मान करते हुए उक्त बातें कहीं।
विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी छत्तीसगढ़ राज्य शाखा द्वारा स्वैच्छिक रक्तदाताओं को सम्मानित करने के लिए लोकभवन में समारोह आयोजित किया गया। जिसमें छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस के अध्यक्ष राज्यपाल श्री डेका ने सर्वाधिक रक्तदान करने वाले प्रदेश के 30 स्वैच्छिक रक्तदाताओं सहित विभिन्न संगठनों और संस्थाओं के सदस्यों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की ओर से रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी और तिल्दा की संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रियंका दीदी को प्रशस्ति पत्र कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम को संबोधित करने हुए राज्यपाल ने कहा कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है और यह केवल स्वस्थ व्यक्ति के स्वैच्छिक दान से ही उपलब्ध हो सकता है। राज्यपाल ने कहा कि थैलेसीमिया, सिकल सेल, एनीमिया, हिमोफिलिया, कैंसर तथा दुर्घटना जैसी आपात स्थिति में रक्त की आवश्यकता जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करती है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ के रक्तदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि यहां के लोगों में जो सेवा भाव है वह दूसरी जगह देखने को नहीं मिलती। रक्तदाताओं ने वर्षो से नि:स्वार्थ भाव से रक्तदान कर अनेक लोगों को नया जीवन दिया है। ऐसे रक्तदाता समाज के लिए प्रेरणा हैं और उनकी सेवा भावना आने वाली पीढिय़ों के लिए उदाहरण है। राज्यपाल ने रेडक्रॉस ब्लड बैंक और उसकी टीम के कार्यो की भी सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था वर्षो से जरूरत मंदों तक जीवनदायी रक्त पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।
कार्यक्रम में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस के उपाध्यक्ष श्री रूपेश पाणिग्रही, कोषाध्यक्ष श्री संजय पटेल, रेडक्रॉस ब्लड सेंटर रायपुर के प्रभारी डॉ. सत्यनारायण पाण्डेय, पूर्व चेयरमेन श्री अशोक अग्रवाल रेडक्रॉस के पदाधिकारी, स्वैच्छिक रक्तदाता तथा सहयोगी, संस्थानों तथा संगठनों के सदस्य उपस्थित थे।
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Columbia Proofessional University
कोलंबिया प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में ब्रह्माकुमारीज़ के युवा प्रभाग (Youth Wing) के बैनर तले भीनमाल, राजस्थान की बीके गीता दीदी द्वारा “डिजाइन योर डेस्टिनी” (Design Your Destiny) विषय पर एक विशेष व्याख्यान सह वर्कशॉप का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम के मुख्य बिंदु और संक्षिप्त समाचार नीचे दिए गए हैं .
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स्वयं की सराहना (Appreciate The Self): बीके गीता दीदी ने अपने व्याख्यान में इस बात पर जोर दिया कि बदलाव की शुरुआत सकारात्मकता और ताकत के आधार पर होनी चाहिए। स्वयं के भीतर और आसपास की दुनिया में सर्वश्रेष्ठ को खोजकर ही हम एक प्रेरणादायक भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
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आत्म-परिवर्तन का 4D चक्र (The 4D Cycle): उन्होंने जीवन को एक नया मोड़ देने के लिए चार महत्वपूर्ण चरणों (4D) को विस्तार से समझाया:
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डिस्कवर (Discover/खोज): अपने भीतर की मुख्य शक्तियों, गुणों और वर्तमान के सबसे सकारात्मक स्वरूप को पहचानना और उसकी सराहना करना।
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ड्रीम (Dream/सपना): खोजे गए सकारात्मक पहलुओं के आधार पर एक सुंदर, प्रेरक और महत्वाकांक्षी भविष्य की कल्पना और विज़ुअलाइज़ेशन करना।
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डिजाइन (Design/योजना): एक सशक्त जीवन शैली और दिनचर्या निर्धारित करना, साथ ही भविष्य की राह में आने वाली बाधाओं को पार करने के लिए मानवीय मूल्यों को चुनना।
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डेस्टिनी (Destiny/भाग्य): अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए साप्ताहिक और मासिक चरणों में एक साल का रोडमैप तैयार करना और नवाचार (Innovation) के साथ उसे धरातल पर उतारना।
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प्रायोगिक गतिविधियाँ (Interactive Focus): इस सत्र के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों से व्यावहारिक समूह गतिविधियाँ भी कराई गईं, जिसमें उन्होंने अपने जीवन के सबसे सुखद क्षणों और आंतरिक गुणों को एक-दूसरे के साथ साझा किया।
मुख्य संदेश: “जीवन में जोखिम उठाएं, यदि आप जीतते हैं तो नेतृत्व कर सकते हैं, और यदि आप हारते हैं, तो दूसरों का मार्गदर्शन कर सकते हैं।”
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