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समर कैम्प : डांस कांपीटिशन में बच्चों ने शानदार प्रस्तुति देकर रंग जमाया…
सादर प्रकाशनार्थ
समर कैम्प : डांस कांपीटिशन में बच्चों ने शानदार प्रस्तुति देकर रंग जमाया…
रायपुर, 11 मई: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा चौबे कालोनी में आयोजित प्रेरणा समर कैम्प के सातवें दिन डांस काम्पीटिशन में बच्चों ने शानदार प्रस्तुति देकर मन मोह लिया।
आज सभा में बच्चे रंग -बिरंगे ड्रेस पहनकर उपस्थित हुए थे। समर कैम्प में उनके लिए डांस काम्पीटिशन रखा गया था। वह लोग अपनी वेशभूषा से लोगों को आकर्षित तो कर ही रहे थे साथ ही सभागृह की शोभा को भी बढ़ा रहे थे। विशेष बात यह रही कि डांस के स्टेप बच्चों ने खुद तैयार किए थे। डांस काम्पीटिशन के निर्णायक के रूप में ब्रह्माकुमारी रश्मि और नीलम दीदी उपस्थित थीं।
सबसे पहले कु. कृतिका मेघानी ने जो है अलबेला मृगनयनों वाला वो कृष्णा है… गीत पर अपना नृत्य प्रस्तुत किया। उसके बाद कु. पी. सौम्या नायडू ने राधा कैसे न जले… गीत पर नृत्य पेश किया। कु. पूरवी नागदेव ने नमो नमो जी शंकरा, आदि देव शंकरा गीत पर सुन्दर नृत्य प्रदर्शित किया। कु.उन्नति शर्मा ने शिव ताण्डव सांग पर मनोरम नृत्य पेश कर सबको ताली बजाने पर मजबूर कर दिया।
कु. रूपाली साहू ने रास रचाए नटखट कान्हा, लीलाधर की लीला है… गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। कु. वैष्णवी साहू ने पिंगा द पोरी पिंगा… गीत पर नृत्य प्रस्तुत कर मन मोह लिया।
इसके पहले सत्र में ब्रह्माकुमारी स्नेहा दीदी ने क्रोध प्रबन्धन विषय पर बोलते हुए कहा कि हमें क्रोध करने से बचना चाहिए। क्रोधी व्यक्ति किसी को प्रिय नहीं होता। क्रोध का स्वास्थ्य पर भी बहुत गहरा असर पड़ता है। क्रोध से मनुष्य खुद भी जलता है और दूसरों को भी जलाता है।
ब्रह्माकुमारी स्नेहा दीदी ने बतलाया कि गुस्सा हमें दो कारणों से आता है। जब हमारी मर्जी का कार्य नहीं होता और दूसरा जब कोई बिना मतलब के हमेंं डाँटता है। उन्होंने क्रोध पर नियंत्रण पाने के उपायों की चर्चा करते हुए बतलाया कि क्रोध आने पर जोर-जोर से गहरी सांस लें। अपने मन को उस घटना से हटाकर अन्य किसी बातों पर विचार करना शुरू कर दें। अच्छे लोगों का संग करें। किसी के प्रति अपनी निश्चित धारणा बनाकर न रखें कि यह तो ऐसा ही खराब है। इसके साथ ही दयालु बनकर दूसरों को माफ करना सीखें। सहनशक्ति को बढ़ाने के लिए राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास करें।
उन्होंने बच्चों को अच्छा नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि गुणवान व्यक्ति ही दुनिया में महान कहलाता है। उनका समाज में इतना गहरा प्रभाव पड़ता है कि उनके न रहने पर भी लोग उन्हें याद करते हैं।
प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
फोन: 0771- 2253253, 2254254
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बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
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स्वयं को पहचानें और परमात्मा से जुड़ें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी: बी.के. श्रेया
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तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…
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अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…
रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया
दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।
तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।
दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।
शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:
सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।
भविष्य के लिए लिया संकल्प:
दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।
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