Brahma Kumaris News
यदि कोई हिंसा करे या गलत उद्देश्य से छुए तो तत्काल विरोध करें… श्रीमती आभा बघेल, कौंसिलर
सादर प्रकाशनार्थ
– यदि कोई हिंसा करे या गलत उद्देश्य से छुए तो तत्काल विरोध करें… श्रीमती आभा बघेल, कौंसिलर
– बच्चों को गुड टच और बैड टच सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी…
– अपने सबसे करीबी परिचित के मोबाईल नम्बर याद रखें, चाइल्ड हेल्पलाईन की सहायता लें…
रायपुर, 12 मई: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा चौबे कालोनी में आयोजित प्रेरणा समर कैम्प के आठवें दिन राजकुमार कालेज की कौंसिलर श्रीमती आभा बघेल ने हिंसा से बचाव विषय पर बोलते हुए बच्चों को गुड टच और बैड टच सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी।
कौंसिलर श्रीमती आभा बघेल ने कहा कि यदि कोई हमारे साथ दुव्र्यवहार करे तो उसे सहन करने और चुप रहने की बजाय उसका पुरजोर विरोध करना चाहिए। चुप रहने से लोगों की हिम्मत और अधिक बढ़ सकती है लेकिन आप विरोध करेंगे तो वह फिर दुबारा वैसा करने से पहले दस बार सोचेंगे। जब भी कहीं कोई खतरा महसूस हो तो भाग कर किसी सुरक्षित स्थान पर जाने का प्रयास करना चाहिए। उसके बाद परिचित व्यक्ति को घटना के बारे में बतलाना है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई अपरिचित व्यक्ति बेवजह मारपीट करे या गलत जगह छुए तो पहले तो बिना झिझके उसे आगाह कर दें कि यह सब आपको पसन्द नहीं है और दुबारा उसे ऐसा करने से सख्ती के साथ मना कर दें। यदि फिर भी वह व्यक्ति नहीं मानें तो तत्काल अपने किसी परिचित को पुकारें और उन्हें घटना की पूरी जानकारी दें। अच्छा होगा कि हम अपने सबसे अधिक करीबी चार-पांच लोगों के मोबाईल नम्बर लिख कर या याद करके रखें। हमें अपनी सुरक्षा के प्रति सजग होकर चलना होगा।
श्रीमती आभा बघेल ने बच्चों को बतलाया कि भौतिक रूप से किसी व्यक्ति को हानि पहुंचाने वाला आचरण हिंसा कहलाता है। उन्होंने चाइल्ड हेल्प लाईन की जानकारी देते हुए कहा कि आप चाहें तो 1098 डायल करके मदद मांग सकते हैं। हमें प्रशासन और संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का ज्ञान जरूरी है तब ही उसका पूरा लाभ उठा सकेंगे।
इसके बाद अन्य सत्र में ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी ने इन्टरनेट और इनरनेट के बारे में बतलाया। उन्होंने कहा कि जैसे इन्टरनेट जैसे इन्स्टाग्राम, फेसबुक, ट्वीटर आदि सोशल मीडिया का जाल है वैसे ही इनरनेट अर्थात आत्मा के अन्दर गुणों और शक्तियों का भण्डार है।
उन्होंने इन्टरनेट की बजाय इनरनेट को दोस्त बनाने का सुझाव देते हुए बतलाया कि इन्टरनेट हमें डिप्रेशन,अनिद्रा और तनाव आदि बिमारियाँ देता है। जबकि इनरनेट यानि राजयोग द्वारा अन्तरात्मा में झाँकने का गुण हमें एकाग्रता और क्रिएटिविटी प्रदान करता है। उन्होंने बच्चों से प्रतिज्ञा कराई कि वह इन्टरनेट के जाल में नहीं फसेंगे और उसका जरूरत के मुताबिक ही इस्तेमाल करेंगे।
प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
फोन: 0771- 2253253, 2254254
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बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
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तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…
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अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…
रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया
दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।
तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।
दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।
शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:
सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।
भविष्य के लिए लिया संकल्प:
दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।
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