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सुखी रहने के लिए सद्गुणों को जीवन में अपनाना होगा…रामकुमार काकानी, डायरेक्टर आई.आई.एम.

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सादर प्रकाशनार्थ

 

सुखी रहने के लिए सद्गुणों को जीवन में अपनाना होगा…रामकुमार काकानी, डायरेक्टर आई.आई.एम.

रायपुर, 8 मई 2022: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित दया और करूणा के लिए आध्यात्मिक सशक्तिकरण वर्ष का शुभारम्भ आई.आई.एम. के डायरेक्टर रामकुमार काकानी, विधायक एवं छ.ग. गृह निर्माण मण्डल के अध्यक्ष कुलदीप जुनेजा, श्रीबालाजी सुपर स्पेशियालिटी हास्पीटल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. देवेन्द्र नायक और क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी ने संयुक्त रूप से किया।

इस अवसर पर बोलते हुए भारतीय प्रबन्धन संस्थान (आई.आई.एम.) के डायरेक्टर रामकुमार काकानी ने कहा कि सुखमय जीवन बनाने के लिए सद्गुणों को अपनाना होगा। हमारे मन में सिर्फ मनुष्यमात्र के लिए ही नहीं अपितु सभी प्राणियों के लिए दया और करूणा की भावना होनी चाहिए। जैसा कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्थान सोचती है। यह संस्थान स्व परिवर्तन पर ज्यादा जोर देती है। साथ ही इस बात पर भी ध्यान देती है कि हमारा जीवन सद्गुणों से भरपूर होना चाहिए।

विधायक एवं छ.ग. गृह निर्माण मण्डल के अध्यक्ष कुलदीप जुनेजा ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान सकारात्मक उर्जा का केन्द्र है। यहाँ आने मात्र से शान्ति की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि कोविड-१९ ने हमें दो वर्ष के लिए एक दूसरे से दूर कर दिया था। इस बिमारी ने क्या गरीब और क्या अमीर सबको बराबर कर दिया था। सभी दया की भीख मांग रहे थे। मैं उस दौरान भी घर में नहीं बैठा। सारा दिन लागों की मदद के लिए घूमता था। सुबह से मदद के लिए फोन आने लगते थे कोई अपने रिश्तेदार की अन्तिम क्रिया के लिए निकट का श्मसान मांगता था तो कोई यह कहता था कि गाड़ी को उनके घर के सामने से गुजार दें ताकि वह अन्तिम दर्शन कर सकें। लोगों की दुआओं का ही फल था कि दिनभर घूमने के बाद भी वह कोराना से बचे रहे।

श्रीबालाजी सुपर स्पेशियालिटी हास्पीटल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. देवेन्द्र नायक ने कहा कि मनुष्य की इच्छाएं अनन्त होती हैं जो कि अशान्ति पैदा करती है। इसलिए हमें सुखी रहने के लिए इन इच्छाओं को नियंत्रित करना सीखना होगा। जब इच्छाएं नियंत्रित होंगी तब आप दूसरों को देने के बारे में सोच सकेंगे। मेडिकल रिसर्च में यह पता चला है कि जो लोग इच्छाओं पर नियंत्रण करना जानते हैं उनकी उम्र बढ़ जाती है। हमारे हास्पीटल में बहुत से गम्भीर किस्म के मरीज आते हैं किन्तु वह अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर जल्दी ठीक हो जाते हैं। कोरोना काल में वही लोग बच सके जो अन्दर से स्ट्रांग थे।

उन्होंने कहा कि जितना हम शान्त और सन्तुष्ट रहेंगे मेडिटेशन करेंगे उतनी ही बिमारी से बचे रहेेंगे। स्वस्थ रहने के लिए पूरे दिन में एक घण्टा अपने लिए निकालिए और योग करिए। ब्रह्माकुमारी संस्थान में आने मात्र से निगेटिविटी खत्म हो जाती है और सकारात्मक सोचने की प्रेरणा मिलती है।

क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी ने कहा कि हमें सर्व प्राणी मात्र को मन से शान्ति और सुख का सहयोग देना है। सबके लिए शुभ और अच्छा सोचना है। कोई व्यक्ति कितना भी दूर क्यों न बैठा हो यदि हम सच्चे मन से संकल्प करेंगे तो हमारे वायब्रेशन्स उस तक जरूर पहुंचेंगे। वर्तमान समय जो तनाव और अवसाद बढ़ रहा है उसका प्रमुख कारण व्यर्थ सकंल्प हैं। अब हमें घृणा और नफरत को छोड़कर दया और करूणा को अपनाना है।

समारोह को ब्रह्माकुमारी दीक्षा बहन ने भी सम्बोधित किया। संचालन ब्रह्माकुमारी अदिति बहन ने किया।

 

प्रेषक: मीडिया प्रभाग,

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय

 

 

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शुभारम्भ समारोह…SEA WING

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वैज्ञानिक, अभियन्ता एवं आर्किटेक्ट प्रभाग का आयोजन…
– पर्यावरण सरंक्षण-आपदा प्रबन्धन अभियान का शुभारम्भ समारोह…
– छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने किया उद्घाटन…
– शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर में आयोजित समारोह में देश भर से आए लोगों ने हिस्सा लिया…
– पर्यावरण सरंक्षण के कार्य में समाज के अधिक से अधिक लोगों को जोडऩे की जरूरत…

रायपुर, 26 जुलाई 2026 : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के राजयोगा एजुकेशन एण्ड रिसर्च फाउण्डेशन के वैज्ञानिक, अभियन्ता एवं आर्किटेक्ट प्रभाग (SEA Wing) द्वारा आयोजित रायपुर से जबलपुर पर्यावरण सरंक्षण-आपदा प्रबन्धन राष्ट्रीय अभियान का शुभारम्भ  राज्यपाल रमेन डेका ने किया। विषय था -प्रकृति का ख्याल रखें और आपदा के लिए तैयार रहें।

राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि पर्यावरण सरंक्षण के इस अभियान में समाज के अधिक से अधिक लोगों को जोडऩे की जरूरत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि इस अभियान से लोगों में पर्यावरण के प्रति जागृति आएगी तथा वह आने वाली आपदा के प्रति सचेत हो सकेंगे। छत्तीसगढ़ की पावन भूमि से शुरू होकर मध्यप्रदेश तक जाने वाला यह जन जागरूकता अभियान दोनों राज्यों के नागरिको में पर्यावरण के प्रति नई चेतना का संचार करने में सफल होगा।

उन्होंने कहा कि आज का हमारा सन्देश कि प्रकृति का ख्याल रखें और आपदा के लिए तैयार रहें केवल एक नारा नहीं है बल्कि यह हमारे अस्तित्व को बचाने का महामंत्र है। वर्तमान समय पेड़ लगाना और जल सरंक्षण करना बहुत जरूरी है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की चर्चा करते हुए कहा कि यहाँ हमें जल की समस्या के बारे में आज सोचने की जरूरत है अन्यथा पच्चीस साल बाद जो जल की विपदा पैदा होने वाली है, उसे सम्भाल पाना मुश्किल होगा। अगर जल नहीं है तो कुछ नहीं है। उन्होंने अपने बचपन का जिक्र करते हुए बतलाया कि पचास साल पहले कहीं जाते थे तो प्यास लगने पर कहीं का भी पानी पी सकते थे। उन दिनों कोई प्रदूषण के बारे में जानता तक नहीं था।

उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि संकल्प करें कि पानी की एक-एक बूंद बचाएंगे। सिंगल यूज प्लास्टिक का त्याग करेंगे। वृक्षारोपण को जन आन्दोलन बनाते हुए कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं। आपकी यह छोटी सी पहल आने वाली पीढिय़ों के लिए सुरक्षित और खुशहाल भविष्य का निर्माण करेगी।

माउण्ट आबू से आए वैज्ञानिक, अभियन्ता सेवा प्रभाग के अध्यक्ष इन्जीनियर मोहन सिंघल ने अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि हमारे देश में पर्यावरण के महत्व को समझते हुए सरकार ने 1990 के दशक को पर्यावरण जागृति दशक घोषित किया था। तब से ही ब्रह्माकुमारी संस्थान इस दिशा में सक्रिय है। पूरे देश में वैज्ञानिक, अभियन्ता सेवा प्रभाग द्वारा पर्यावरण सरंक्षण एवं आपदा प्रबन्धन के लिए छ: राष्ट्रीय अभियान निकाले जाएंगे। उन्हीं में से यह एक अभियान है।

प्रारम्भ में क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने स्वागत भाषण दिया। रायपुर संचालिका बीके सविता दीदी ने माननीय राज्यपाल महोदय का अभिनन्दन किया। वैज्ञानिक, अभियन्ता सेवा प्रभाग की उपाध्यक्ष ब्रह्माकुमारी आशा दीदी ने आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन पानीपत से आए इन्जीनियर ब्रह्माकुमार भारत भूषण भाई ने किया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमार पियूश भाई, कुशाभाऊ  ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दयाल, एम्स के डायरेक्टर लेफ्टिनेन्ट जनरल अशोक जिन्दल सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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ट्रान्सपोर्ट एण्ड ट्रेवल्स विंग

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शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर रायपुर में ट्रान्सपोर्ट एण्ड ट्रेवल्स विंग की ओर से दो दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित…

रायपुर (छत्तीसगढ़) 27 जून, 2026: ट्रान्सपोर्ट एण्ड ट्रेवल्स विंग द्वारा यातायात कर्मियों की सेवा करने के लिए नेशनल प्रोजेक्ट यात्री कृपया ध्यान दे-का दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर रायपुर में किया गया है। प्रशिक्षण देने के लिए मुम्बई से यातायात प्रभाग की नेशनल कोआर्डीनेटर ब्रह्माकुमारी कविता दीदी और सुवास भाई रायपुर आए हुए हैं।

आज पहले सत्र में यातायात प्रभाग के ब्रह्माकुमार सुवास भाई ने आदर्श यात्री प्रदर्शनी की व्याख्या करते हुए कर्म एटीएम पर प्रकाश डाला। शाम के सत्र में ब्रह्माकुमारी कविता दीदी सुहाना सफ़र विषय पर प्रशिक्षण देंगी।

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चौथी बटालियन सीएएफ कैंप माना

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– अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर चौथी बटालियन सीएएफ कैंप माना रायपुर में ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा विशेष योग एवं राजयोग सत्र आयोजित
– गीता युद्घशास्त्र नहीं योगशास्त्र है…ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी

रायपुर, 22 जून 2026: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा चौथी बटालियन छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ कैंप माना) रायपुर में एक विशेष योग एवं राजयोग मेडिटेशन सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ पुलिस सशस्त्र बल के 110 जवानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में एडिशनल एसपी श्रीमती रमा पटेल, एडिशनल डीएसपी श्रीमती प्रतिभा चंद्राकर, कमांडर श्री सत्य भूषण सिंह  ब्रह्माकुमारी जागृति दीदी और ब्रह्माकुमार अनुपम भाई उपस्थित रहे।

इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी ने कहा कि श्रीमद भगवत गीता में भगवान ने अर्जुन को इसी राजयोग का परिचय दिया था और समझाया था कि इस योग को साधकर मनुष्य स्वयं पर विजय प्राप्त कर सकता है। आत्मबल से संपन्न हो सकता है और अपनी कर्मेन्द्रियों का सच्चा राजा बन सकता है। इसी कारण श्रीमद भगवत गीता को ‘योगशास्त्र’ कहा जाता है ‘युद्धशास्त्र’ नहीं।

उन्होंने वर्तमान समय की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज जब पूरी दुनिया तनाव, असंतुलन और मानसिक दबाव से गुजर रही है तब हमें उस योग को अपने जीवन में धारण करना चाहिए जिसे भारत ने विश्व को विरासत के रूप में दिया है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि जीवन में संतुलन, स्थिरता और आंतरिक शान्ति प्राप्त करने की कला है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय मानसिक संतुलन की अत्यधिक आवश्यकता है, क्योंकि मानसिक असंतुलन के कारण व्यक्ति के संबंधों, व्यवहार, निर्णय क्षमता और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। मन की दुर्बलता से इम्युनिटी पावर कमजोर होने लगती है।

राजयोग की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि राजयोग एक विज्ञान भी है और एक कला भी। यह कर्मेन्द्रियों को शुद्ध संस्कार देने का विज्ञान है तथा मन को अपना मित्र बनाने की कला भी है। जब हम अपने मन को सकारात्मक विचारों और सकारात्मक ऊर्जा से भरते हैं तो मन हमारा मित्र बन जाता है लेकिन जब मन में नकारात्मक विचारों का प्रवाह बढ़ जाता है तो वही मन व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु बन जाता है।

प्रारम्भ में ब्रह्माकुमार अनुपम भाई द्वारा जवानों को सूर्य नमस्कार का अभ्यास कराया गया। अन्त में ब्रह्माकुमारी जागृति दीदी ने सभी जवानों को राजयोग मेडिटेशन की गहन अनुभूति कराई। कार्यक्रम के बाद कई प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कुछ ही मिनटों के इस योग और राजयोग अभ्यास से उन्हें अत्यंत शांति, हल्कापन और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ।

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