Brahma Kumaris News
शान्ति शिखर तनावग्रस्त लोगों को शान्ति की अनुभूति कराएगा… ब्रह्माकुमारी जयन्ती दीदी
3 नवंबर 2025
– शान्ति शिखर तनावग्रस्त लोगों को शान्ति की अनुभूति कराएगा… ब्रह्माकुमारी जयन्ती दीदी
– एकेडमी फार ए पीसफुल वर्ल्ड-शान्ति शिखर में जयन्ती दीदी का हुआ दिव्य उद्बोधन…
– देश-विदेश से आठ हजार लोग पहुंचे…
– माउण्ट आबू सहित अन्य जगहों से आए लोगों का हुआ सम्मान…
नवा रायपुर (अटल नगर): प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के नये भवन एकेडमी फॉर ए पीसफुल वर्ल्ड- शान्ति शिखर में आज संस्थान की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका ब्रह्माकुमारी जयन्ती दीदी और अतिरिक्त महासचिव ब्रह्माकुमार मृत्युजंय भाई का दिव्य उद्बोधन हुआ। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी जयन्ती दीदी ने माउण्ट आबू मुख्यालय की ओर से रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी को चांदी का कलश भेंट किया। स्टेज पर देश-विदेश से आए सदस्यों सहित शान्ति शिखर के निर्माण में सहयोगी लोगों का सम्मान भी किया गया।
अपने आशीर्वचन में अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका ब्रह्माकुमारी जयन्ती दीदी ने कहा कि इस समय दुनिया में अनेक समस्याएं हैं। परिस्थितियों से प्रभावित होकर लोग तनावग्रस्त हो रहेे हैं। शान्ति की तलाश में भटक रहे ऐसी अशान्त आत्माओं को यह भवन गहन शान्ति की अनुभूति कराएगा। यहाँपर परमात्म प्रेरणा से इतना विशाल और सुन्दर आडिटोरियम बना है तो इसके पीछे कोई विशेष प्रयोजन जरूर होगा। सबको यहां से परमात्मा शिवबाबा की पहचान मिलेगी। उन्हें शान्ति की अनुभूति होगी। तपस्वी ब्रह्माकुमार-कुमारियों ने अपना तन-मन-धन लगाकर इसे बनाया है जिसके कारण इस भवन के एक-एक पत्थर में प्रेम, शान्ति और पवित्रता के प्रकम्पन भरे हुए हैं। इसीलिए यहाँ पहुंचने पर बहुत ही सुखद अनुभूति होती है।
उन्होंने कहा कि संसार में भवन तो अनेक बनते हैं लेकिन यह भवन विश्व कल्याण की भावना से बनाया गया है। इसलिए लोग यहाँ शान्ति की तलाश में खींचे चले आएंगे। लोग जब यह महसूस करेंगे कि यहाँ कोई हमें भी सुनने वाला बैठा है। मन को शान्ति देने वाला बैठा है।
उन्होंने कहा कि मन की चंचलता को शान्त करने के लिए उसे ज्ञान की शक्ति से शीतल और शान्त बनाएं। पाजिटिव सोच रखें। ईश्वरीय ज्ञान का चिन्तन करें। एक परमात्मा से अपना सम्बन्ध जोडक़र रखे। मन में यह भाव हो कि जो पाना था वह पा लिया सिर्फ एक ही लक्ष्य रहे कि जो परमात्म सुख मुझे मिला है वह सबको मिले। हमारे योग से वातावरण शुद्घ हो जाता है। जितना हम योग में रहेंगे उतना हमारा त्वरित परिवर्तन होगा। आपके योग द्वारा यहाँ जो पवित्र और शुद्घ प्रकम्पन बन रहे हैं वह यहाँ आने वाले लोगो को भी परिवर्तन के लिए प्रेरित करेगा।
इस अवसर पर अतिरिक्त महासचिव ब्रह्माकुमार मृत्युजंय भाई ने कहा कि रायपुर सेवाकेन्द्र के भाई-बहनों ने तन, मन और धन इस सुन्दर भवन में लगाकर अपना पुण्य जमा किया है। हम राजयोग के साधक और तपस्वी हैं। तपस्वी लोगों की वाणी वरदान बन जाती है। इसलिए कहते हैं संकल्पों से सिद्घि मिलती है। दृष्टि से सृष्टि बनती है। हमारी दृष्टि में इतनी पवित्रता हो कि हम नयी सृष्टि बना सकें।
कार्यक्रम का संचालन इन्दौर की ब्रह्माकुमारी अनिता दीदी ने किया। माउण्ट आबू से आए बीके भानू और युगरत्न भाई ने गीत गाए। रायपुर की बाल कलाकारों ने यज्ञ की विरासत नामक नृत्य नाटक प्रस्तुत कर भाव विभोर कर दिया।
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बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
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स्वयं को पहचानें और परमात्मा से जुड़ें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी: बी.के. श्रेया
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तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…
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अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…
रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया
दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।
तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।
दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।
शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:
सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।
भविष्य के लिए लिया संकल्प:
दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।
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