Brahma Kumaris News
राजयोग से परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है… ब्रह्माकुमारी रजनी दीदी
रायपुर, 4 नवम्बर 2024: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के जापान एवं फिलिपीन्स स्थित सेवाकेन्द्रों की इन्चार्ज ब्रह्माकुमारी रजनी दीदी ने बतलाया कि राजयोग श्रेष्ठ योग पद्घति है। इससे विपरीत परिस्थितियों का सामना करने में मदद मिलती है। विदेशियों को यह काफी आकर्षित करता है।
ब्रह्माकुमारी रजनी दीदी शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर में अपना अनुभव सुना रही थीं। वह इन दिनों जापान से खास छत्तीसगढ़ में ब्रह्माकुमारी संस्थान की सेवाओं को देखने के लिए यहाँ आयी हुई हैं। आगे वह भिलाई, दुर्ग और राजनांदगांव भी जाएंगी।
उन्होंने आगे बतलाया कि जापान में बहुतांश लोग बौद्घ धर्म को मानने वाले हैं। वह लोग ईश्वर को नहीं मानते हैं। ऐसे देश में उनको हिन्दू फिलासफी को समझाना कठिन होता है। भारत में तो सभी लोग रामायण महाभारत और गीता आदि शास्त्र पढ़े हुए होते हैं अत: उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान सुनाना और उनकी सेवा करना आसान होता है लेकिन विदेश में जहाँ की संस्कृति रहन-सहन और खान-पान सब कुछ भिन्न होता है। वहाँपर हमको सप्ताह कोर्स कराने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है। इसमें काफी समय लग जाता है। इतना ही नहीं वहाँ ज्ञान पर सुनाने के साथ-साथ लोगों को शुद्घ शाकाहारी और सात्विक भोजन बनाना भी सिखाना पड़ता है।
उन्होंने बतलाया कि जापान में भूकम्प आने पर सुरक्षा की दृष्टि से बिजली पानी आदि सब सुविधाएं बन्द हो जाती हैं। ऐसे ही एक अवसर पर आश्रय स्थल में उन्हें सत्तर लोग मिले। जहाँ पर ब्रह्माकुमारी बहनों को बिना विचलित हुए निश्चिन्त बैठे देखकर लोगों ने पूछा कि आप इतना निश्चिन्त कैसे हैं? जब उन्हें पता चला कि हम राजयोगी हैं तो उन्होंने भी राजयोग सीखने की इच्छा प्रकट की। इस प्रकार राजयोग हमें हर परिस्थिति में शान्त रहना सीखाता है। उन्होंने कहा कि भारत के सारे त्यौहार वह लोग विदेशों में भी मनाते हैं लेकिन वहाँ इतना धूमधाम नहीं होता है। मकानों में इतनी सजावट भी नहीं होती है। भारत में तो सभी त्यौहार बहुत ही उमंग-उत्साह के साथ मनाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान में आने से आध्यात्मिकता को अपनाने से हमारे जीवन में बदलाव आया है। हम सब बहुत भाग्यशाली आत्माएं हैं जो कि हमें बाबा का ज्ञान मिला। परिवर्तन का आधार पवित्रता है। यही हमारे आध्यात्मिक जीवन की बुनियाद भी है। हमारे मन में किसी के भी प्रति दुर्भावना अथवा वैमनस्यता न हो। मन से सब मैल निकाल दो। दिवाली मनाना माना अन्दर की सफाई करना। चूँकि अब नया युग शुरू होना है इसलिए कुछ भी पुराना हमारे मन में बचा हुआ न रहे। तब आत्मा एकदम शुद्घ, पवित्र और सुख शान्ति से भरपूर होकर वापिस अपने घर परमधाम जाएगी। उन्होंने कहा कि पवित्रता में इतनी शक्ति है कि इससे हमारे दु:ख और अशान्ति समाप्त हो जाते हैं। पवित्रता हमारे जीवन में सुख और शान्ति की जननी है।
इस अवसर पर रायपुर के बाल कलाकारों ने ब्रह्माकुमारी रजनी दीदी के स्वागत में जापान और भारत की संस्कृति को मिलाकर बहुत ही सुन्दर मनोरंजक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
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बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
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स्वयं को पहचानें और परमात्मा से जुड़ें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी: बी.के. श्रेया
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तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…
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अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…
रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया
दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।
तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।
दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।
शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:
सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।
भविष्य के लिए लिया संकल्प:
दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।
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