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Brahmakumaris Raipur

तनाव से बचने के लिए मन को अपना दोस्त बना लें… ब्रह्माकुमार शक्तिराज सिंह

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इन्टरनेशनल माइण्ड व मेमोरी मैनेजमेन्ट ट्रेनर ब्रह्माकुमार शक्तिराज सिंह ने बतलाया कि चिन्ता, तनाव, भय, दु:ख और अशान्ति के कारण बीमारियाँ बढ़ रही हैं। खुश रहने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि मन को अपना दोस्त बना लो। जब हम तनाव में होते हैं तो इससे हमारी धमनियों में ब्लाकेज होना शुरू हो जाता है। कोलस्ट्रोल बढ़ जाता है जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
   प्रजापिता ब्रह्मा

कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा इण्डोर स्टेडियम में जीवन प्रबन्धन कला पर आधारित तीन दिवसीय शिविर के दूसरे दिन ब्रह्माकुमार शक्तिराज भाई ने विचार परिवर्तन से संसार परिर्वन विषय पर व्याख्यान दिया।

   उन्होंने कहा कि हमारे विचारों का जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अपनी सोच को बदल लो तो जीवन बदल सकता है। उन्होंने बतलाया कि जब जेल में बन्द कैदियों से उन्होंने पूछा कि कैसे आना हुआ तो कैदियों ने उन्हें बतलाया कि माइण्ड में कन्ट्रोल नहीं होने से उनसे अपराध घटित हो गया। अब उसका पछतावा हो रहा है। अगर मन पर नियंत्रण करना जान जाते तो जेल में नहीं आना पड़ता।
  उन्होंने कहा कि इन्सान ने कम्प्यूटर को बनाया है। कम्प्यूटर ने इन्सान को नहीं बनाया है। तो सोचो हमारे अन्दर कितनी असीमित शक्तियाँ निहित हैं। हमारा अवचेतन मन एक जिन्न की तरह है। हम उसे जो भी कमाण्ड देंते हैं वह उसे ज्यों का त्यों स्वीकार कर लेता है। जरूरत अपनी शक्तियों को पहचानने की है। हनुमान जी की तरह हम भी अपनी शक्तियों को भूले हुए हैं। अब उसे पहचानने की आवश्यकता है। हमारे अन्दर एक हीरो छिपा हुआ है। हमारा माइण्ड सेट हो तो हम सब कुछ कर सकते हैं।

  मेडिटेशन से खराब रिलेशन भी सुधरते है:
  उन्होंने कहा कि निगेटिव एनर्जी से आत्मा रूपी बैटरी डिस्चार्ज होती है। घर में यदि कलह-क्लेष है इसका मतलब है कि बैटरी डिस्चार्ज है। मेडिटेशन के माध्यम से परमात्मा को याद करने से परमात्म शक्ति हमें प्राप्त होती है। उन्होंने बतलाया कि यदि लगातार इक्कीस दिनों तक खराब रिलेशन वाले व्यक्ति को पाजिटिव वायब्रेशन दिए जाएं तो उसके प्रभाव से खराब रिलेशन भी ठीक हो जाते हैं।
 

  अध्यात्म से भाई-चारा बढ़ता है :
  उन्होंने निगेटिविटी को दूर करने का सबसे अच्छा उपाय बतलाते हुए कहा कि हम सभी आत्माएं एक पिता परमात्मा की सन्तान होने के कारण आपस में भाई-भाई हैं। जब यह ईश्वरीय ज्ञान हमें मिल जाता है और  हम सामने वाले को जो है जैसा है स्वीकार कर लेते हैं तो अस्सी प्रतिशत झगड़ा समाप्त हो जाता है। आत्मा एक सूक्ष्म शक्ति है। वह शरीर के द्वारा कर्म करती है। हम सारे दिन में जितने भी लोगों के सम्पर्क में आते हैं उनके साथ हमारा कार्मिक एकाउण्ट बनता जाता है। जो कि हमें अपने जीवन में चुकाकर बराबर करना होता है। इसलिए जीवन में जब भी कोई विपरीत परिस्थिति आए, दु:ख या संकट आए तो सदैव यह समझना चाहिए कि पिछले जन्म का हिसाब-किताब खत्म हो रहा है। इससे तनाव मुक्त बने रहेंगे।