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अच्छी सोच के लिए हमारा सोचना, बोलना और करना तीनों में समानता चाहिए…- ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी

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सादर प्रकाशनार्थ

– ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन से सभी का दिल जीत लिया…

– इण्डोर स्टेडियम में शिवानी दीदी को सुनने भारी तादात में लोग उमड़ पड़े…

– अच्छी सोच के लिए हमारा सोचना, बोलना और करना तीनों में समानता चाहिए…

रायपुर, २३ जुलाई, २०२३: जीवन प्रबन्धन विशेषज्ञा एवं मोटिवेशनल स्पीकर ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी ने कहा हमारा सोचना, बोलना और करना समान होना चाहिए तभी हमारे विचारों की तरंगें अच्छी होंगी। इसलिए सदैव अच्छा सोचें, सबके कल्याण का सोचें, सभी को दुआएं देंं। क्योंकि जो हम संकल्प करते हैं वह तरंगित होकर प्रकम्पन (वायब्रेशन) के रूप में दूसरों तक पहुंचते हैं। पुरानी बातों को क्षमा करें और भूल जाएं। उसे गांठ बांधकर न रखें।

 

इण्डोर स्टेडियम में शिवानी दीदी को सुनने के लिए पूर्व मंत्री एवं विधायक बृजमोहन अग्रवाल, विधायक एवं छ.ग. गृहनिर्माण मण्डल के अध्यक्ष कुलदीप जुनेजा, संसदीय सचिव विकास उपाध्याय, महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती किरणमयी नायक, शदाणी दरबार के सन्त साईंयुधिष्ठिर लाल, पूर्व मंत्री चन्द्रशेखर साहू, आर्मी के ब्रिगेडियर विग्नेश सिंह, केन्द्रीय सुरक्षा बल के उपमहानिरीक्षक संजय सिंह, महापौर एजाज ढेबर, नगर निगम के सभापति प्रमोद दुबे, पूर्व विधायक श्रीचन्द सुन्दरानी, छ.ग. सिंधी  अकादमी के अध्यक्ष राम गिडलानी, क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता, बीके आशा, बीके सविता सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी ने अच्छी सोच बेहतर जिन्दगी विषय पर बोलते हुए कहा कि हमें अपने दिन की शुरूआत सकारात्मक विचारों के साथ राजयोग मेडिटेशन से करना चाहिए। निज स्वरूप की याद से हमारी सोच अच्छी बनेगी। उन्होंने बतलाया कि हमारी स्क्रीन को देखने की आदत बन गई है। हम सारा दिन मोबाईल और टेलीविजन की स्क्रीन को देखते हैं जिससे हमारी आंखों पर बुरा असर पड़ता है। यह भी एक तरह का नशा बन गया है जो कि हमारी आदत में शामिल हो चुका है। इसे बदलने की जरूरत है। हम अपने संस्कार को बदलकर दूसरों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन सकते हैं। इसे लीडरशीप क्वालिटी कहते हैं।

उन्होंने कहा कि हम अपना निरीक्षण करने की बजाए दूसरों को देखने लगते हैं और उनकी गल्तियाँनिकालने लगते हैं। इसलिए हमें अपने ऐसे बुरे संस्कारों को बदलने की जरूरत है। संस्कार कैसे बनता है यह प्रोग्रामिंग ज्ञात होने पर संस्कार बदलना आसान हो जाएगा। उन्होंने बतलाया कि आत्मा तीन कार्य करती है। मन, बुद्घि और संस्कार इसकी तीन शक्तियाँ हैं। मन का कार्य है विचार करना। उन विचारों में से बुद्घि निर्णय करती है कि कौन सा उचित है और कौन सा अनुचित? जैसे आज बरसात होने पर सभी के मन में विचार चला होगा कि कार्यक्रम में जाएं या न जाएं? ऐसे मौसम में भी आप लोग इतनी अधिक संख्या में आए यह प्रशंसनीय है। किसी काम को बार-बार करने से वह हमारे संस्कार बन जाते हैं। हम अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के बल पर अपने संस्कार को भी बदल सकते हैं।

इस अवसर पर क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि जीवन का सारा खेल हमारी सोच पर आधारित है। हमारी सोच के अनुसार हमारे विचारों पर आधारित तरंगें किसी को सुकून देते हैं तो किसी को कष्ट भी पहुंचाते हैं। हमारे सोच से प्रकृति और वायुमण्डल बनता है।

 

२४ से २६ जुलाई ब्रह्माकुमार शक्तिराज भाई का शिविर होगा:

शिवानी दीदी के कार्यक्रम के बाद इण्डोर स्टेडियम में ही २४ से २६ जुलाई तक माउण्ट आबू से पधारे मोटिवेशनल स्पीकर ब्रह्माकुमार शक्तिराज भाई श्रेष्ठ मन श्रेष्ठ भविष्य (Super Mind Super Future) विषय पर शिविर कराएंगे। शिविर का समय सुबह एवं शाम को ७ से ८.३० बजे रखा गया है।

 

प्रेषक: मीडिया प्रभाग,

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी$ज रायपुर सम्पर्क: ९४२५५-०२२५५

 

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महिला दिवस

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ब्रह्माकुमारी संस्थान में महिला दिवस मनाया गया-
– बच्चों को माताएं बाल्यकाल से सही राह दिखाएं… श्रीमती कौशल्या देवी साय
– मातृशक्ति को आगे बढ़ाना है तो उन्हें शिक्षित करना होगा…श्रीमती डॉ. वर्णिका शर्मा
– ब्रह्माकुमारी संस्थान में आने से शान्ति मिलती है… श्रीमती ज्योति गौतम
– भौतिकता में ही न खो जाएं आध्यात्मिकता को भी जीवन में अपनाएं … श्रीमती श्वेता सिन्हा
– नारी अब अबला नही रही सबला बन गई है… ब्रह्माकुमारी सविता दीदी
– नारी व्यक्ति नहीं शक्ति है… शताब्दि पाण्डे
– महान चरित्रों को गढऩे में महिलाओं की अहम भूमिका… ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी
रायपुर: अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में प्रजापिता ब्रह्मïाकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के महिला प्रभाग द्वारा विधानसभा मार्ग स्थित शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर में महिला जागृति आध्यात्मिक सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सम्मेलन का शुभारम्भ मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय, बाल सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, पुलिस महानिदेशक की धर्मपत्नी श्रीमती ज्योति गौतम, पुलिस अधीक्षक श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा, रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी, बीजेपी प्रवक्ता श्रीमती शताब्दि पाण्डे और बीके रश्मि दीदी ने दीप प्रज्वलित करके किया। विषय था- वन्दे मातरम् से स्वर्णिम भारत।
समारोह में बोलते हुए मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय ने कहा कि बच्चे का पहला गुरू माता -पिता होते हैं। इसलिए यदि आपने बच्चे को बचपन से ही सही राह दिखा दी तो बहुत बड़ा काम कर लिया। बाहर बहुत शोर है। वह कानों को सुन्न कर रहा है। हम भौतिकता में लिप्त हो रहे हैं। अब इससे दूर रहकर साधना की जरूरत है। कल क्या होगा नहीं मालूम इसलिए वर्तमान को जीना सीखें। अच्छे विचारों को फैलाइए और मानव जीवन को सफल बनाइए। मार्ग कितना भी कठिन क्यों न हो उस मार्ग पर चलना जरूर है।
उन्होंने कहा कि जिन्दगी कठिन नहीं है सहज है। कठिन हम बना लेते हैं। राजयोग को जीवन में अपनाएं औरों को भी प्रेरणा दें। हमें बेटियों को अच्छी शिक्षा देनी है ताकि वह ससुराल में जाकर अपनी जिम्मेदारी समझे। उन्होंने घोषणा की कि वह जुलाई माह में ब्रह्माकुमारी आश्रम देखने माउण्ट आबू जाएंगी।
बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि यदि मातृशक्ति को आगे बढ़ाना है तो उन्हें शिक्षित करना होगा। मन विजय से रण विजय होगा। शिक्षा हमें डिग्री देती है। पैसा दिलाती है। अर्थपूर्ण जीवन उपलब्ध कराती है। लेकिन यह अपराविद्या है। लेकिन आज हम बात करेंगे पराविद्या की। यह आत्मावलोकन कराती है। इसके लिए आत्मा और परमात्मा का ज्ञान जरूरी है। योग विद्या से आत्मबोध होगा।
रायपुर सेवाकेन्द्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि नारी अब अबला नही  रही वह सबला बन गई है। ब्रह्माकुमारी संस्थान पूरे विश्व में एकमात्र ऐसी संस्था है जिसका पूरा संचालन मातृ शक्ति  द्वारा किया जाता है। परमपिता परमात्मा ने ज्ञान का कलश माता-बहनों के सिर पर रखा है। बाहरी चकाचौध में न खो जाएं अपने अन्दर भी झाँक कर देखें। थोड़ा समय निकालकर राजयोग का अभ्यास करें। यह मन को शक्तिशाली और बुद्घि को दिव्य बनाने का अच्छा माध्यम है।
पुलिस महानिदेशक की धर्मपत्नी श्रीमती ज्योति गौतम ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान में आने से शान्ति मिलती है। उन्होंने अपना निजी अनुभव बतलाते हुए कहा कि जब उन्होंने राजयोग सीखा तो सबसे पहले उनके मन से भय और चिन्ता दूर हो गई। उन्होंने सभा में उपस्थित महिलाओं से आध्यात्मिकता को अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि अपने जीवन में परिवर्तन लाकर ही हम स्वर्णिम भारत बनाने के कार्य में मददगार बन सकते हैं।
पुलिस अधीक्षक (आईपीएस) श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने कहा कि सनातन धर्म में पुरूष और नारी को समान दर्जा प्राप्त है। घर परिवार में बच्चे को शिक्षित करने का कार्य माताएं करती हैं। इसलिए महिलाओं के लिए शिक्षा का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। भौतिकता में ही न खो जाएं। आध्यात्मिकता को जीवन में अपनाएं। कोविड ने हमें दिखा दिया कि कष्ट के समय पैसा आदि कुछ भी काम नहीं आता है। ऐसे समय पर मेडिटेशन और साधना ने लोगों को नया रास्ता दिखलाया है।
भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता श्रीमती शताब्दि पाण्डे ने कहा कि नारी व्यक्ति नहीं शक्ति है। वह बचपन में खेलकूद, पहाड़ पर चढऩे आदि कार्यों में अत्यन्त कुशल थी लेकिन वह बहुत उग्र स्वभाव की थी। जब उन्होंने राजयोग सीखकर उसका अभ्यास करना शुरू किया तो उनका स्वभाव ही बदल गया। अब वह सबके प्रति अपनेपन का भाव रखती है। राजयोग से हमारे अन्दर की शक्तियाँ जागृत हो जाती है।
इससे पहले विषय को स्पष्ट करते हुए राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने कहा कि महान चरित्रों को गढऩे में महिलाओं की अहम भूमिका होती है। नारी परिवार की धूरी है। वह घर को स्वर्ग बनाने वाली और बच्चों को सुसंस्कारित करने वाली है।
इस अवसर पर नगर के बाल कालाकारों ने नारी शक्ति के महत्व को उजागर करते हुए सुन्दर नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी अदीति दीदी ने किया।
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जन्मदिन की शुभकामनाये… मुख्यमंत्री

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बी.के सविता दीदी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाये दी .

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द्वादश ज्योतिर्लिंग झांकी,नवा रायपुर

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नवा रायपुर में द्वादश ज्योतिर्लिंग झांकी का शुभारंभ प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने किया।

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