Brahmakumaris Raipur
World Environment Day
पृथ्वी को बचाने के लिए जंगल को बचाना होगा… प्रेम कुमार, सचिव वन विभाग
– हरेक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी… भानु प्रताप सिंह, मुख्य वन सरंक्षक
– विश्व पृथ्वी दिवस पर सभी ने धरती को स्वच्छ रखने और पर्यावरण सरंक्षण का लिया संकल्प…
रायपुर, 23 अप्रैल: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ग्राम विकास प्रभाग द्वारा विश्व पृथ्वी दिवस पर विधानसभा मार्ग स्थित शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर में परिचर्चा आयोजित की गई जिसमें वन एवं पर्यावरण विभाग के सचिव प्रेम कुमार, मुख्य वन सरंक्षक भानु प्रताप सिंह, रायपुर केन्द्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी और ब्रह्माकुमारी दीक्षा दीदी सहित बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
इस अवसर पर वन एवं पर्यावरण विभाग के सचिव प्रेमकुमार ने ब्रह्माकुमारी संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान सम्पूर्ण मानवता के लिए समर्पित संस्था है। इसीलिए आध्यात्मिकता के साथ-साथ लोगों की मौलिक जरूरतों पर भी समाज का ध्यान आकर्षित करती है। हमें पृथ्वी को बचाना है तो जंगल को बचाना होगा। उन्होंने कहा कि धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है अगर चार डिग्री भी तापमान बढ़ा तो धरती रहने लायक नहीं रह रह जाएगी। अब हमें कार्बन उत्सर्जन को जीरो पर लाना होगा। यह तभी संभव होगा जब जितना कार्बन हम छोड़ते हैं वह सभी पेड़ों द्वारा अवशोषित हो जाएं। इसके लिए हमें खूब पेड़ लगाने होंगे। इसी प्रकार पानी को सरंक्षित करने के लिए नदियों को अविरल बहने दें। उसमें शहरों और कारखानों का प्रदूषित जल न छोड़ें।
श्री प्रेम कुमार ने बतलाया कि अभी कुछ दिन पहले हमारे देश में विदेश से चीतों को लाकर बसाने का कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही टायगर प्रोजेक्ट का पचासवाँ वर्ष मनाया गया। दरअसल पर्यावरण के लिए बाघ, चीता आदि जानवरों का रहना बहुत जरूरी है। हमारे राजकीय पशु वनभैसों को भी असम से लाकर सरंक्षित किया जा रहा है। इसी प्रकार शासन द्वारा प्लास्टिक पर प्रतिबन्ध लगाकर सराहनीय कार्य किया जा रहा हे। यहाँ पर गोबर से पेंट बनाने का कार्य किया जा रहा है जो कि बहुत ही अच्छी पहल है।
मुख्य वन सरंक्षक भानु प्रताप सिंह ने कहा कि पर्यावरण कोई समस्या नहीं है। समस्या हम स्वयं हैं। हरेक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। हम नल खोलकर अनावश्यक पानी न बहाएं। हमेशा पानी को बचाने का प्रयास करें। भोजन करते हैं तो आधा ही खाकर आधा छोड़ देते हैं। इस प्रकार अन्न की बरबादी करते हैं। विश्व पृथ्वी दिवस एक दिन मनाने का कार्य नहीं है। बल्कि इसे पूरे वर्ष अटेन्शन देना होगा। हम कभी भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का कार्य न करें।
रायपुर केन्द्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि यह सोचने की बात है कि हमें विश्व पृथ्वी दिवस मनाने की जरूरत क्यों पड़ी? एक समय था कि संसार का वायुमण्डल शुद्घ था। नदियों का पानी स्वच्छ था। प्रकृति हमारी सारी जरूरतों को पूरा कर रही थी। लेकिन हमने अपने स्वार्थवश इसे प्रदूषित कर दिया। इन दिनों ब्रह्माकुमारी संस्था बिना रसायनिक खाद के जैविक खेती पर बहुत काम कर रही है। हमारी संस्थान से जुड़े किसानों ने जब जैविक खेती की शुरूआत की तो उनकी पैदावार प्रति एकड़ डेढ़ गुणा बढ़ गई।
इससे पहले ब्रह्माकुमारी दीक्षा दीदी ने बतलाया कि धरती को प्रदूषण मुक्त और सुरक्षित करने के लिए विश्व पृथ्वी दिवस की शुरूआत वर्ष १९७० में अमेरिका में हुई। प्रकृति को प्रभु का उपहार समझकर उपयोग करें तो उसका दुरूपयोग रूक जाएगा। अन्त में ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी ने राजयोग का अभ्यास कराया। संचालन ब्रह्माकुमारी स्नेहा बहन ने किया।
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गणतंत्र दिवस
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बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
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स्वयं को पहचानें और परमात्मा से जुड़ें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी: बी.के. श्रेया
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तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…
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अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…
रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया
दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।
तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।
दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।
शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:
सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।
भविष्य के लिए लिया संकल्प:
दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।
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