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सर्व का दिल जीतने हमारा स्वभाव मिलनसार और व्यवहार मधुर होना चाहिए… प्रियंका दीदी
सादर प्रकाशनार्थ
सर्व का दिल जीतने हमारा स्वभाव मिलनसार और व्यवहार मधुर होना चाहिए… प्रियंका दीदी
रायपुर, 07 मई : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा चौबे कालोनी में आयोजित प्रेरणा समर कैम्प के चौथे दिन सर्व का दिल जीतने की कला विषय पर बोलते हुए ब्रह्माकुमारी प्रियंका दीदी ने बच्चों को उपयोगी टिप्स दिए।
उन्होंने कहा कि हमारा व्यवहार सबके साथ मुधर होना चाहिए। जो बच्चे मीठा स्वभाव वाले होते हैं वह सबको प्यारे लगते हैं। हम अपने अच्छे व्यवहार से सबका दिल जीत सकते हैं। जो बच्चे जिद्दी होते हैं, गुस्सा करते हैं वह किसी को प्रिय नहीं हो सकते। इसके अलावा हेल्पिंग नेचर वाले बच्चे भी सबको अच्छे लगते हैं।
उन्होंने कहा कि कई लोगों के अन्दर यह विशेषता होती है कि वह एक-दूसरे को परस्पर सहयोग करते हैं और उनके सुख-दुख में साथी बनते हैं। यह बहुत अच्छा गुण है। ऐसा स्वभाव हमको लोकप्रिय बनाता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। इसलिए एकान्त में रहने का स्वभाव ठीक नहीं है। ऐसा स्वभाव हमें समाज में अकेला कर देगा। हमें मिल जुलकर रहने वाला मिलनसार व्यक्ति बनना होगा। यदि हम दूसरों के काम नहीं आएंगे तो विपदा आने पर कोई भी हमारा साथ नहीं देगा। कहते भी हैं सुख बाँटने से बढ़ता है और दु:ख बाँटने से घटता है।
प्रियंका दीदी ने आगे कहा कि आप कितने भी पढ़े लिखे क्यों न हों लेकिन यदि आपका व्यवहार उचित नहीं है तो आपको सम्मान नहीं मिल सकेगा। सम्मान मांगने की वस्तु नहीं है। हमें गुरूजनों का, माता-पिता का और अपने से बड़ों का सम्मान करना ही चाहिए। इसके साथ -साथ अपने काम का और समय का भी आदर करना सीखना होगा। यदि हम ऐसा जीवन बनाएंगे तो सम्मान स्वत: प्राप्त होगा किसी से मांगना नहीं पड़ेगा।
इसके अगले सत्र में आज आजादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर विषय पर ड्राइंग और पेटिंग प्रतियोगिता में बच्चों ने भाग लिया।
प्रेषक : मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
फोन: ०७७१-२२५३२५३, २२५४२५४
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बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
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स्वयं को पहचानें और परमात्मा से जुड़ें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी: बी.के. श्रेया
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तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…
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अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…
रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया
दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।
तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।
दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।
शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:
सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।
भविष्य के लिए लिया संकल्प:
दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।
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