Jivan Ka Sar Geeta Gyan , Usha Didi (08/12 – 14/12)

गीता तनाव और अवसाद से बाहर निकलने में मददगार … ब्रह्माकुमारी उषा दीदी
रायपुर, ९ दिसम्बर: ब्रह्माकुमारी उषा दीदी ने कहा कि मन के अन्दर गुण और अवगुण के बीच द्वन्द चलता रहता है। जब मन थका हुआ होता है तब वह आसुरी शक्तियों से लडऩे के लिए तैयार नही होता। वह तनाव अथवा अवसाद का शिकार हो जाता है। ऐसे समय में गीता का ज्ञान उसे मोटिवेट करके अवसाद से बाहर निकलने में मदद कर सकता है।
ब्रह्माकुमारी उषा दीदी प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा विधानसभा मार्ग पर स्थित शान्ति सरोवर में आयोजित गीता ज्ञान रहस्य प्रवचन माला में व्याख्यान दे रही थीं। विषय था-सांख्य योग अर्थात आत्म ज्ञान और स्थितप्रज्ञ अवस्था।
उन्होंने बतलाया कि गीता माना भगवान और अर्जुन का संवाद। जब किसी मनुष्य के जीवन में विषम परिस्थितियाँ आती हैं तो वह मन ही मन भगवान से संवाद करता है। हमने अपने जीवन को इतना जटिल बना दिया है कि जीवन में उलझन ही उलझन दिखाई देते हैं। यदि अपने जीवन के उद्देश्य को निश्चित कर लें तो हम जीवन के द्वन्द को समाप्त कर सकते हैं।
ब्रह्माकुमारी उषा दीदी ने कहा कि महाभारत में ऐसी अनेक चीजें हैं जिन पर हमने विचार ही नहीं किया है। भगवान हमारा मार्गदर्शन कर सकता है किन्तु हमारे कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करते। भगवान ने कहा है कि मैं तुम्हारे कर्मों में नहीं आउंगा। मैं तुम्हारा मार्गदर्शन करूंगा किन्तु कर्म तुम्हे ही करना होगा।
गीता में वर्णित सांख्य योग का वर्णन करते हुए ब्रह्माकुमारी उषा दीदी ने कहा कि यह शरीर ही कर्म करने का क्षेत्र है। इस शरीर द्वारा किए गए कर्म संस्कार के रूप में सामने आते हैं। जीवन में आने वाले सुख और दु:ख हमारे ही अच्छे या बुरे कर्मों का परिणाम हैं। गीता में हिंसक युद्घ की बात नहीं की गई है। जीवन में हर घड़ी संघर्ष करना पड़ता है। जब हम नकारात्मक भावना के साथ संघर्ष करते हैं तब जीवन कठिन लगने लगता है।
आत्मा की शास्वतता के बारे बोलते हुए उन्होंने कहा कि आत्मा अविनाशी है। वह कभी मरती नहीं है। प्रकृति के पांच तत्व भी उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकते। सांसारिक बन्धनों में बंधकर आत्मा कमजोर होती है। अवगुणों के वश होने से उसकी प्रभा कम हो जाती है। जैसे हम नया वस्त्र धारण करने के लिए पुराना वस्त्र उतार देते हैं। वैसे ही आत्मा भी नया शरीर धारण करने के लिए पुराने शरीर का त्याग करती है। इसीलिए देह त्याग करने पर दु:खी होने की जरूरत नहीं है। जब हम बाल्यावस्था से युवावस्था में और यौवनावस्था से बुढ़ापे में जाने पर दु:खी नहीं होते तो आत्मा के देह त्याग करने पर भी दु:खी नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हरेक व्यक्ति को सुख और शान्ति अच्छी लगती है क्योंकि यह हम आत्माओं का स्वधर्म है। स्वधर्म सुख देता है जबकि परधर्म दु:ख का कारण बन जाता है। आज विज्ञान का बोलबाला है किन्तु फिर भी आध्यात्मिकता की बहुत जरूरत है।

शान्ति सरोवर में आयोजित त्रि-आयामी स्वास्थ्य समारोह को डॉ. सतीश गुप्ता ने किया संबोधित

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१. हृदयरोग से बचने के लिए जीवनशैली में परिवर्तन जरूरी… डॉ. सतीश गुप्ता
२. हृदयरोग में भारतवासी वल्र्ड लीडर… डॉ. सतीश गुप्ता

रायपुर, २८ अगस्त, २०१७: त्रिआयामी हृदयोपचार कार्यक्रम के प्रणेता और ग्लोबल हास्पीटल माउण्ट आबू के हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश गुप्ता ने कहा कि हृदयरोग की बीमारी में हम भारतवासी वल्र्ड लीडर हैं। अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में दुनिया के कुल हृदयरोगियों में साठ प्रतिशत संख्या भारतीयों की होगी। हृदयरोग से बचने के लिए जीवनशैली को बदलना जरूरी है।
​​डॉ. सतीश गुप्ता प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा विधानसभा रोड स्थित शान्ति सरोवर में आयोजित त्रि-आयामी स्वास्थ्य समारोह में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने आँकड़े देते हुए कहा कि यूरोप और अमेरिकावासियों की तुलना में तीन से चार गुणा अधिक भारतीय हृदयरोग से ग्रसित हैं। शायद हृदयरोग को भारतीयों से ज्यादा लगाव है इसीलिए दस गुणा अधिक भारतीय युवाओं में यह रोग पाया गया है।
उन्होंने बाईपास सर्जरी को सिर्फ टाईम पास बतलाते हुए कहा कि हृदयरोग का प्रमुख कारण है तनाव, चिन्ता, गुस्सा और उदासी। उन्होंने बतलाया कि त्रि-आयामी हृदयोपचार में प्रतिपादित सोल, माइण्ड, बाडी और मेडिसीन के सिद्घान्त को भारत सरकार ने भी स्वीकार किया है। उन्होंने इसे नेशनल प्रोग्राम ऑफ लाईफस्टाइल्स घोषित किया है। बहुत जल्द ही यह स्कूलों में भी पढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हृदयरोग की जड़ मन में छुपी है। इसलिए अब मन को सुमन बनाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि हरेक व्यक्ति अपने स्वास्थ्य के लिए खुद जिम्मेदार होता है। डॉक्टर सिर्फ हमारी मदद करता है। देर रात तक जागना, सुबह देर से उठना और समय बेसमय भोजन खाना तथा तेल का ज्यादा सेवन करने से आट्र्ररिज में ब्लाकेज शुरू हो जाता है। उन्होंने शरीर के अन्दर की घड़ी को फालो करने का सुझाव देते हुए बतलाया कि ब्लॉकेज के कारण हार्ट अटैक नहीं आता है बल्कि निगेटिव विचारों से हार्ट अटैक आता है। ब्लॉकेज के उपरान्त भी अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर कोई भी व्यक्ति सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है।
डॉ. गुप्ता ने बतलाया कि स्वस्थ रहने के लिए सुबह आठ बजे से पहले अखबार नहीं पढ़ें और टी.वी. नहीं देखें। इस समय अच्छा चिन्तन करें, पूजा पाठ और मेडिटेशन करें क्योंकि इसी समय शरीर में स्ट्रेस हार्मोन्स रिलीज होते हैं, जो कि हमें बीमार करते हैं।
डॉ. सतीश गुप्ता ने बतलाया कि शरीर का भान मैं पन और मेरा पन की भावना पैदा करता है। तथा मेेरे पन से मोह, लोभ आदि विकार उत्पन्न होते हैं। ऐसे लोगों की इच्छाएं बहुत बढ़ जाती हैं। मेरे पास ये होना चाहिए, मुझे ये पसन्द है आदि। जब वह इन सबको प्राप्त नहीं कर पाता तो उसे अवसाद (उिप्रेशन) हो जाता है। देह अभिमानी व्यक्ति को कभी दूसरों पर विश्वास नहीं होगा। वह सारा बोझ अपने सिर पर लेकर चलेगा। इस प्रकार उसके उपर इतना ज्यादा बोझ आ जाता है कि या तो उसे हार्ट अटैक हो जाएगा या फिर और कोई बिमारी हो जाएगी। जैसे कि ब्लड प्रेशर, पेट दर्द, आँखों से कम दिखना, बाल सफेद होना, उम्र से पहले बुढ़ापा आना आदि-आदि।
इसके विपरीत जब हम अपनी आत्मा की स्मृति में स्थित होते हैं तो आत्मा के सातों गुणों की महसूसता होती है। ज्ञान, पवित्रता, सुख, शान्ति, आनन्द, प्रेम और शक्ति हम आत्माओं के सात निजी गुण हैं। जिस​जित ​के पास यह सातों गुण हैं-वही आदमी पूर्ण स्वस्थ है। लेकिन आज के इस आधुनिक युग में मनुष्य अपने निजी स्वरूप को भूल सा गया है। वह अपने स्वधर्म शान्ति को भी भूल गया है। राजयोग हमें आत्मा और परमात्मा की न सिर्फ अनुभूति कराता है, वरन हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं आर. प्रसन्ना ने कहा कि वर्तमान भागदौड़ की जिन्दगी में हम पैसों के पीछे भाग रहे हैं। शारीरिक स्वास्थ्य की ओर किसी का ध्यान नहीं है। इसी का दुष्परिणाम बिमारियों के रूप में सामने आता है। सुखी जीवन ब्यतीत करने के लिए शरीर का स्वस्थ रहना जरूरी है। उन्होंने जीवनशैली को बदलने पर जोर दिया।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर के डायरेक्टर डॉ. नितिन मोहन नागरकर ने कहा कि विदेशों में इस बात पर अनेकों रिसर्च हुए हैं जिससे यह सिद्घ हुआ है कि दवाई के बिना भी विभिन्न रोगों का उपचार किया जा सकता है। हमेशा बीमारी का इलाज कराने की बजाय उससे पहले से बचाव करना अच्छा माना जाता है। इसलिए बीमार पडऩे के बाद इलाज कराने से अच्छा है कि हम पहले से ही अपनी दिनचर्या को अच्छा बनाकर रखें।

Rakhi News: Raipur (CG)- Tying Rakhi to Governor, CM, Ministers, Chief Secretary & Security Personnels etc

Photo 1Respected B. K. Kamla Didi Director of Brahmakumaris Indore Zone, tied the sacred thread – Raakhi to the His Excellency Governor of Chhattisgarh Mr. Balram Ji Das Tandon, Hon’ble Chief Minister Dr. Raman Singh Ji and Women and Children Development Minister Smt. Ramshila Sahu. Then B. K. Savita Bahen Tied Rakhi to Chairman of Legislative Assembly Mr. Gourishankar Agrawal, Agriculture & Water Resources Minister Mr. Brijmohan Agrawal, Minister for PWD Mr. Rajesh Munat, Chief Secretary, Upper Chief Secretory, Director Aims, IIM, IIT etc.