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Brahmakumaris Raipur

ब्रह्मा बाबा की 56 वीं पुण्य तिथि श्रद्घापूर्वक मनायी गई…

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ब्रह्मा बाबा ने समाज के नवनिर्माण के लिए नारी शक्ति को आगे किया…
– सनातन संस्कृति से होगा स्वर्णिम भारत का निर्माण…
रायपुर, 18 जनवरी, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा की 56 वीं पुण्य तिथि श्रद्घापूर्वक मनायी गई। इस अवसर पर संस्थान की रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने बतलाया कि दादा लेखराज कृपलानी हीरे-जवाहरात के मशहूर व्यापारी थे। उनके जीवन में ऐसा महत्वपूर्ण मोड़ आया जब एकान्तवास के दौरान बनारस में हुए दिव्य साक्षात्कार ने उनके अन्दर वैराग्य उत्पन्न कर दिया। उन्होने कहा कि सनातन संस्कृति से ही स्वर्णिम भारत का निर्माण होगा।

पिताश्री ब्रह्मा बाबा ने अपना तन-मन-धन और सर्वस्व प्रभु अर्पण कर ईश्वरीय निर्देश का पालन करते हुए ब्रह्माकुमारी संस्थान की स्थापना की। उन्होंने परमात्मा द्वारा बतलाए गए मार्ग पर चलकर समाज को एक नई दिशा दी। उन्होने नारी शक्ति को आगे करके उनका मान बढ़ाया और महिला सशक्तिकरण का कार्य किया। उन्होंने महिलाओं में छिपी नैतिक और आध्यात्मिक शक्तियों को सामने लाकर उनको विश्व परिवर्तन के निमित्त बनाया।

ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने वैश्विक बदलाव की चर्चा करते हुए कहा कि जब सृष्टि प्रारम्भ हुई तो यह सतोप्रधान थी। उस समय यह दैवभूमि कहलाती थी। सभी मनुष्य दैवी गुणों से सम्पन्न होने के कारण देवी और देवता कहलाते थे। चहुं ओर सुख शान्ति व्याप्त थी। किन्तु द्वापर युग से समाज में नैतिक पतन होने से दु:ख-अशान्ति की शुरुआत हुई। तब विभिन्न धर्म पैगम्बरों ने अपने-अपने धर्मों की शिक्षा देकर नैतिक और सामाजिक गिरावट को रोकने का कार्य किया। इससे अधोपतन की गति में कमी जरूर आयी लेकिन पूरी तरह से उस पर रोक नही लग सकी।

उन्होंने कहा कि आज विश्व में भौतिक चकाचौंध बहुत है लेकिन दु:ख, अशान्ति, तनाव, बिमारी आदि की भी कमी नहीं है। अब यह सृष्टि इतनी पुरानी और जर्जर हो चुकी है कि इसका पुनर्निमाण ही एकमात्र समाधान है। यह परमपिता परमात्मा का कार्य है जो कि वह वर्तमान संगमयुग पर आकर कर रहे हैं। यह विश्व इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण संगमयुग का समय है जबकि निराकार परमपिता परमात्मा अपने साकार माध्यम प्रजापिता ब्रह्मा के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग की शिक्षा देकर संस्कार परिवर्तन और नई सतोप्रधान दुनिया की पुर्नस्थापना करा रहे हैं।

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शिवरात्रि पर्व घूमधाम से मनाया गया

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नवा रायपुर के शान्ति शिखर में
शिवरात्रि पर्व घूमधाम से मनाया गया –
रायपुर, 01 फरवरी 2026: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा नवा रायपुर के सेक्टर-20 स्थित एकेडमी फॉर ए पीसफुल वल्र्ड-शान्ति शिखर में आज शिवबाबा की 90 वीं जयन्ती बड़े ही धूमधाम से मनायी गई।
  इस अवसर पर ट्रीपल आई टी के डायरेक्टर भ्राता ओमप्रकाश व्यास जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी और राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी सहित विभिन्न दीदीयों के साथ केक कटिंग कर सभी को जन्मदिन की बधाई दी।
इस दौरान बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमार और ब्रह्माकुमारी भाई-बहनें उपस्थित थे।

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गणतंत्र दिवस

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गणतंत्र दिवस पर राजभवन में एट होम कार्यक्रम में
माननीय राज्यपाल महोदय और मुख्यमंत्री जी से मुलाकात…
रायपुर, 30 जनवरी 2026: गणतंत्र दिवस की शाम को राजभवन में माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा आयोजित  समारोह में माननीय राज्यपाल भ्राता रमेन डेका जी और माननीय मुख्यमंत्री भ्राता विष्णु देव साय जी से सौजन्य भेंट करने का अवसर मिला। इस अवसर पर इन्दौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी, रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी के साथ नवा रायपुर की ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी, ब्रह्माकुमारी वनिषा दीदी और ब्रह्माकुमार महेश भाई उपस्थित थे।
इस मुलाकात के दौरान ब्रह्माकुमारी बहनों ने नवा रायपुर में माननीय प्रधानमंत्री जी के हाथों नवनिर्मित शान्ति शिखर भवन के उद्घाटन कार्यक्रम को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने में शासन से मिले सहयोग के लिए माननीय राज्यपाल और मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देकर उनका आभार व्यक्त किया। बाद में राजभवन में उपस्थित मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, सेना के अधिकारीगण, प्रमुख सचिव-सचिवगण, सांसद, विधायक और राजधानी के अनेकानेक गणमान्य नागरिकों से भी मिलने व उनकी सेवा करने का अवसर मिला। इस अवसर के कुछ फोटोज अवलोकनार्थ संलग्न है।
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Brahma Kumaris News

बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला

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शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला

  • स्वयं को पहचानें और परमात्मा से जुड़ें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी: बी.के. श्रेया

  • तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…

  • अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…

रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया

दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।

तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।

दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।

शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।

राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:

सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।

भविष्य के लिए लिया संकल्प:

दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।

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