Brahma Kumaris News
प्रशासक वर्ग की सेवा के लिए एक दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम…
आध्यात्मिकता के समावेश से प्रशासन में उत्कृष्टता लायी जा सकती है… ब्रह्माकुमारी विधात्री दीदी
– सुखी जीवन के लिए मन की शान्ति जरूरी… राजू अगासीमनी, मुख्य वन सरंक्षक
– अध्यात्म हर परिस्थिति में शान्त रहना सिखाता है… विनय अग्रवाल, एडीशनल कलेक्टर
– अध्यात्म से सही निर्णय लेने में मदद मिलती है… हर्ष पाठक, एडीशनल कलेक्टर
– प्रशिक्षण में आसपास के शहरों के सैंकड़ों सदस्यों ने हिस्सा लिया…
रायपुर, 13 जनवरी 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के प्रशासक सेवा प्रभाग द्वारा विधानसभा रोड स्थित शान्ति सरोवर, रिट्रीट सेन्टर रायपुर में इस संस्थान के सदस्यों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में आसपास के शहरों से आए हुए प्रशासक प्रभाग के सदस्यों ने हिस्सा लिया।
प्रशिक्षण का शुभारम्भ नई दिल्ली की कार्यक्रम संयोजिका ब्रह्माकुमारी ख्याति दीदी और ब्रह्माकुमारी विधात्री दीदी, रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी, रायपुर सर्कल के मुख्य वन सरंक्षक राजू अगासीमनी (आईएफएस), एडीशनल कलेक्टर विनय अग्रवाल, बिलासपुर के अपर कलेक्टर हर्ष पाठक, धमतरी सेवाकेन्द्र्र की निदेशिका ब्रह्माकुमारी सरिता दीदी और जगदलपुर की निदेशिका ब्रह्माकुमारी मंजूषा दीदी ने दीप प्रज्वलित करके किया।
नई दिल्ली से आयी प्रशासक सेवा प्रभाग की मुख्य फैकल्टी मेम्बर ब्रह्माकुमारी विधात्री दीदी ने कहा कि यदि प्रशासकों में आध्यात्मिकता का समावेश हो जाए तो प्रशासन को संवेदनशील और उत्कृष्ट बनाया जा सकता है क्योंकि शासन की सबसे प्रमुख इकाई प्रशासक ही होते हैं। शासन की नीतियों और कार्यक्रमों को संचालित करने की मुख्य जिम्मेदारी इसी वर्ग पर होती है।
रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने बतलाया कि आने वाले समय में रायपुर से अलग-अलग जिलों में प्रशासक वर्ग की सेवा के लिए अभियान (कैम्पेन) निकाला जाएगा जिसके लिए हैण्ड तैयार करना ही इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य है।
एडीशनल कलेक्टर विनय अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय प्रशासन के क्षेत्र में अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन अगर जीवन में आध्यात्मिकता आ जाए तो वह आसानी से हर परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है। अध्यात्म हमें हर परिस्थिति में शान्त रहना, तनाव में नहीं आना और निष्पक्ष होकर निर्णय लेना सिखाना है।
रायपुर सर्कल के मुख्य वन सरंक्षक राजू अगासीमनी (आईएफएस) ने कहा कि सुखी जीवन के लिए मन की शान्ति जरूरी है। प्रशासक को कई प्रकार के दबाव के बीच काम करना होता है। चुनौतियाँ कुछ भी हों लेकिन हमारा मन शान्त हो यह सीख हमें अध्यात्म से मिलती है। व्यक्तिगत जीवन में भी इसका असर पड़ता है।
बिलासपुर के अपर कलेक्टर हर्ष पाठक ने कहा कि अध्यात्म हमें सही निर्णय लेने में मदद करता है। ब्रह्माकुमारी संस्थान हमारी सोच को सकारात्मक बनाने की शिक्षा प्रदान करती है। इससे हमारे शरीर और आत्मा दोनो को शक्ति मिलती है। अन्त में उन्होंने प्रशिक्षण की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं दी।
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महिला दिवस
ब्रह्माकुमारी संस्थान में महिला दिवस मनाया गया-
– बच्चों को माताएं बाल्यकाल से सही राह दिखाएं… श्रीमती कौशल्या देवी साय
– मातृशक्ति को आगे बढ़ाना है तो उन्हें शिक्षित करना होगा…श्रीमती डॉ. वर्णिका शर्मा
– ब्रह्माकुमारी संस्थान में आने से शान्ति मिलती है… श्रीमती ज्योति गौतम
– भौतिकता में ही न खो जाएं आध्यात्मिकता को भी जीवन में अपनाएं … श्रीमती श्वेता सिन्हा
– नारी अब अबला नही रही सबला बन गई है… ब्रह्माकुमारी सविता दीदी
– नारी व्यक्ति नहीं शक्ति है… शताब्दि पाण्डे
– महान चरित्रों को गढऩे में महिलाओं की अहम भूमिका… ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी
रायपुर: अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में प्रजापिता ब्रह्मïाकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के महिला प्रभाग द्वारा विधानसभा मार्ग स्थित शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर में महिला जागृति आध्यात्मिक सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सम्मेलन का शुभारम्भ मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय, बाल सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, पुलिस महानिदेशक की धर्मपत्नी श्रीमती ज्योति गौतम, पुलिस अधीक्षक श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा, रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी, बीजेपी प्रवक्ता श्रीमती शताब्दि पाण्डे और बीके रश्मि दीदी ने दीप प्रज्वलित करके किया। विषय था- वन्दे मातरम् से स्वर्णिम भारत।
समारोह में बोलते हुए मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय ने कहा कि बच्चे का पहला गुरू माता -पिता होते हैं। इसलिए यदि आपने बच्चे को बचपन से ही सही राह दिखा दी तो बहुत बड़ा काम कर लिया। बाहर बहुत शोर है। वह कानों को सुन्न कर रहा है। हम भौतिकता में लिप्त हो रहे हैं। अब इससे दूर रहकर साधना की जरूरत है। कल क्या होगा नहीं मालूम इसलिए वर्तमान को जीना सीखें। अच्छे विचारों को फैलाइए और मानव जीवन को सफल बनाइए। मार्ग कितना भी कठिन क्यों न हो उस मार्ग पर चलना जरूर है।
उन्होंने कहा कि जिन्दगी कठिन नहीं है सहज है। कठिन हम बना लेते हैं। राजयोग को जीवन में अपनाएं औरों को भी प्रेरणा दें। हमें बेटियों को अच्छी शिक्षा देनी है ताकि वह ससुराल में जाकर अपनी जिम्मेदारी समझे। उन्होंने घोषणा की कि वह जुलाई माह में ब्रह्माकुमारी आश्रम देखने माउण्ट आबू जाएंगी।
बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि यदि मातृशक्ति को आगे बढ़ाना है तो उन्हें शिक्षित करना होगा। मन विजय से रण विजय होगा। शिक्षा हमें डिग्री देती है। पैसा दिलाती है। अर्थपूर्ण जीवन उपलब्ध कराती है। लेकिन यह अपराविद्या है। लेकिन आज हम बात करेंगे पराविद्या की। यह आत्मावलोकन कराती है। इसके लिए आत्मा और परमात्मा का ज्ञान जरूरी है। योग विद्या से आत्मबोध होगा।
रायपुर सेवाकेन्द्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि नारी अब अबला नही रही वह सबला बन गई है। ब्रह्माकुमारी संस्थान पूरे विश्व में एकमात्र ऐसी संस्था है जिसका पूरा संचालन मातृ शक्ति द्वारा किया जाता है। परमपिता परमात्मा ने ज्ञान का कलश माता-बहनों के सिर पर रखा है। बाहरी चकाचौध में न खो जाएं अपने अन्दर भी झाँक कर देखें। थोड़ा समय निकालकर राजयोग का अभ्यास करें। यह मन को शक्तिशाली और बुद्घि को दिव्य बनाने का अच्छा माध्यम है।
पुलिस महानिदेशक की धर्मपत्नी श्रीमती ज्योति गौतम ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान में आने से शान्ति मिलती है। उन्होंने अपना निजी अनुभव बतलाते हुए कहा कि जब उन्होंने राजयोग सीखा तो सबसे पहले उनके मन से भय और चिन्ता दूर हो गई। उन्होंने सभा में उपस्थित महिलाओं से आध्यात्मिकता को अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि अपने जीवन में परिवर्तन लाकर ही हम स्वर्णिम भारत बनाने के कार्य में मददगार बन सकते हैं।
पुलिस अधीक्षक (आईपीएस) श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने कहा कि सनातन धर्म में पुरूष और नारी को समान दर्जा प्राप्त है। घर परिवार में बच्चे को शिक्षित करने का कार्य माताएं करती हैं। इसलिए महिलाओं के लिए शिक्षा का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। भौतिकता में ही न खो जाएं। आध्यात्मिकता को जीवन में अपनाएं। कोविड ने हमें दिखा दिया कि कष्ट के समय पैसा आदि कुछ भी काम नहीं आता है। ऐसे समय पर मेडिटेशन और साधना ने लोगों को नया रास्ता दिखलाया है।
भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता श्रीमती शताब्दि पाण्डे ने कहा कि नारी व्यक्ति नहीं शक्ति है। वह बचपन में खेलकूद, पहाड़ पर चढऩे आदि कार्यों में अत्यन्त कुशल थी लेकिन वह बहुत उग्र स्वभाव की थी। जब उन्होंने राजयोग सीखकर उसका अभ्यास करना शुरू किया तो उनका स्वभाव ही बदल गया। अब वह सबके प्रति अपनेपन का भाव रखती है। राजयोग से हमारे अन्दर की शक्तियाँ जागृत हो जाती है।
इससे पहले विषय को स्पष्ट करते हुए राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने कहा कि महान चरित्रों को गढऩे में महिलाओं की अहम भूमिका होती है। नारी परिवार की धूरी है। वह घर को स्वर्ग बनाने वाली और बच्चों को सुसंस्कारित करने वाली है।
इस अवसर पर नगर के बाल कालाकारों ने नारी शक्ति के महत्व को उजागर करते हुए सुन्दर नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी अदीति दीदी ने किया।
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