Brahma Kumaris News
ब्रह्माकुमार ओमप्रकाश भाईजी की नौवीं पुण्यतिथि पर मीडिया परिसंवाद – इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया के लिए भी नियामक आयोग बने… प्रो. मान सिंह परमार
रायपुर 12 दिसम्बर 2024: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर में मीडिया परिसंवाद का आयोजन किया गया। यह परिसंवाद ब्रह्माकुमारी संस्थान के मीडिया प्रभाग के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रह्माकुमार ओमप्रकाश भाईजी की नौवीं पुण्यतिथि पर आयोजित था। विषय था-नई सामाजिक व्यवस्था के लिए दृष्टि एवं मूल्य निर्धारण में मीडिया की भूमिका (Vision & Values for a new Social Order- Role of Media)।
कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. मानसिंह परमार ने कहा कि आज सोशल मीडिया सबसे ज्यादा अनसोशल हो गया है। जिसके भी हाथ में मोबाईल है वह पत्रकार बन गया है। जिस तरह प्रिन्ट मीडिया जिम्मदारी से काम कर रहा है वैसे ही इलेक्ट्रानिक मीडिया को भी अपनी जिम्मेदारी समझकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रिन्ट मीडिया के लिए देश में प्रेस कौसिंल ऑफ इण्डिया बनाया गया है। फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड है उसी तरह अब पूरे देश में प्रिन्ट मीडिया, विज्ञापन, फिल्म, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया के लिए एक अखिल भारतीय स्तर पर प्रेस कौंसिल ऑफ इण्डिया बनाने की जरूरत है जिसमें सिर्फ पत्रकारिता से जुड़े सम्पादकों या मालिकों को ही पदाधिकारी बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि हमें देश को और यहाँ की सामाजिक व्यवस्था को आगे बढ़ाना है तो मीडिया को गांव की ओर जाना होगा। मीडिया को अब सामाजिक सरोकारों की पत्रकारिता करनी पड़ेगी क्योंकि इसी से हमारेे देश और समाज को आगे बढऩे की राह मिलेगी। वर्तमान समय मीडिया शहरों तक सिमट गया है। दिल्ली में कोहरा हो जाए तो दिन भर खबरें चलने लगती हैं। वह राष्ट्रीय खबर बन जाती हैं लेकिन गांव में यदि कुछ हो जाए तो वह राष्ट्रीय अखबारों में नहीं छप पाता है।
इन्दौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने कहा कि इस समय लोगों के पास भौतिक सुख के सारे साधन मौजूद हैं किन्तु फिर भी उनके जीवन में सुख और शान्ति नहीं है। वर्तमान समय आन्तरिक सशक्तिकरण की आवश्यकता है। इसके अभाव में विपरीत परिस्थितियाँआने पर लोग उसका सामना नहीं कर पाते हैं और मनोबल के कमजोर होने के कारण आत्महत्या कर बैठते हैं। काम, कोध, लोभ, मोह और अहंकार के कारण समाज में विकृति पैदा हो रही है। ऐसे समय में मीडिया का दायित्व हो जाता है कि वह समाज को रचनात्मक बातें बतलाए। अध्यात्म हमें बतलाता है कि हम शरीर को चलाने वाली चैतन्य शक्ति आत्मा हैं। स्वयं को आत्मा समझकर परमात्मा को याद करने से हमारा जीवन मूल्यनिष्ठ बन जाता है।
उज्जैन की निदेशिका ब्रह्माकुमारी उषा दीदी ने कहा कि मीडिया पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। मीडिया के माध्यम से हम जो कुछ देखते, पढ़ते व सुनते हैं उसका चिन्तन चलता है। इसलिए मीडिया को ऐसी चीजें ही परोसनी चाहिए जिससे कि देखने व पढऩे वालों में सकारात्मक चिन्तन चले। आज लोगों के पास सारी भौतिक चीजें उपलब्ध है किन्तु उनके जीवन में सुख और शान्ति नहीं है। एक समय था कि हमारा देश देवभूमि कहलाता था लेकिन दैवीगुणों के अभाव में आज मनुष्य दानव बन चुका है। ऐसी-ऐसी घटनाएं पढऩे को मिलती हैं कि सिर शर्म से झुक जाता है। हरेक चीज का मल्य आँकते आँकते मनुष्य खुद मूल्यहीन बन चुका है। मानवीय मूल्यों की स्थापना में मीडिया अहम भूमिका निभा सकता है।
महासमुन्द से आए वरिष्ठ पत्रकार आनन्द राम ने कहा कि इस समय जिसके पास भी मोबाईल है वह पत्रकार हो गया है। एक समय था जब गिने चुने बुद्घिजीवियों के हाथ में मीडिया की कमान थी। किन्तु चिन्ता की बात है कि फेसबुक, यूट््यूब आदि डिजिटल माध्यमों की भरमार सेे हर व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिल गयी है। मीडिया को ब्लैकमेलिंग का जरिया बनाना चिन्ताजनक है।
अमृत सन्देश के सम्पादक गिरीश वोरा ने कहा कि मूल्यनिष्ठ समाज बनाने के लिए मीडिया को आगे आना होगा। आजकल नशे से बहुत लोगों की मौत हो रही है। इसलिए लोगों को नशाखोरी सेे दूर करने के लिए मीडिया को जनजागृति लाने का कार्य करना होगा।
इससे पहले परिसंवाद में उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि कलम में तलवार से भी ज्यादा ताकत है। मूल्यनिष्ठ समाज बनाने के लिए पत्रकार को अपनी लेखनी का उपयोग समाज और देश की तरक्की के लिए करना होगा। परिसंवाद का कुशल संचालन भारत एक्सप्रेस न्यूज चैनल रायपुर की सम्पादक वरिष्ठ पत्रकार प्रियंका कौशल ने किया।
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बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
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स्वयं को पहचानें और परमात्मा से जुड़ें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी: बी.के. श्रेया
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तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…
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अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…
रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया
दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।
तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।
दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।
शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:
सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।
भविष्य के लिए लिया संकल्प:
दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।
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