Brahmakumaris Raipur
रायपुर में तीन दिनी गहन योग साधना का शुभारम्भ… त्याग करने से मिलता है सम्मान….. ब्रह्माकुमारी विमला दीदी
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर में अपने नियमित विद्यार्थियों के लिए तीन दिवसीय गहन योग साधना का आयोजन किया गया है। आज इसका शुभारम्भ क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी, जबलपुर की ब्रह्माकुमारी विमला दीदी, रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी, किरण दीदी सहित अन्य बहनों ने दीप प्रज्वलित करके किया। विषय है-महसूसता द्वारा सम्पूर्णता सम्पन्न गहन योग साधना।
वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी विमला दीदी ने कहा कि जो व्यक्ति त्याग करता है उसको समाज में सम्मान मिलता है। त्याग करने से भाग्य बनता है। अपनी कमजोरियों को दूर करके ही तपस्वी जीवन का आनन्द लिया जा सकता है। पुरूषार्थ में आगे बढऩे के लिए यह जानना जरूरी है कि कौन से संस्कार हमारे मार्ग में विघ्न स्वरूप बन रहे हैं? कई बार हम दैनिक जीवन में व्यस्तता और तनाव के कारण आत्म निरीक्षण करना भूल जाते हंै। इस योग साधना शिविर में हमें आत्म निरीक्षण कर अपना कल्याण करना है।
ब्रह्माकुमारी विमला दीदी ने आगे कहा कि समाज में दिन प्रतिदिन तनाव और अवसाद बढ़ता जा रहा है। कुछ लोग बहुत ज्यादा सोचने लगे हैं। भगवान ने इन्सान के रूप में हमें दो प्रमुख शक्तियॉं दी हैं जिन्हें सही ढंग से उपयोग करके जीवन को महान बनाया जा सकता है। यह दो शक्तियॉं है-समय और संकल्प शक्ति। समय का मूल्य समझकर उसका सदुपयोग करने वाले व्यक्तिका जीवन मूल्यवान बन जाता है। इसलिए समय को छोटी-छोटी बातों में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। व्यर्थ बातों से हमारी आन्तरिक शक्तियॉं नष्ट होती हैं। हमारे आज के श्रेष्ठ विचार कल के अच्छे भविष्य का निर्माण करेंगे।
इससे पहले रायपुर सेवाकेन्द्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने सभी आगन्तुकों का स्वागत किया। क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की।
इस शिविर में रायपुर के अलावा कुम्हारी, चरौदा, सिलतरा, सिमगा, हिरमी, उपरवारा, पलौद, मन्दिर हसौद, तिल्दा, भाटापारा, आरंग, महासमुन्द, बसना, बागबाहरा, सरायपाली, खरोरा, बलौदाबाजार, पलारी, भटगांव, कुतरा, राजगांगपुर, सेंथला और टिटिलागढ़ आदि जगहों से आए हुए लोग हिस्सा ले रहे हैं।
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बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
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स्वयं को पहचानें और परमात्मा से जुड़ें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी: बी.के. श्रेया
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तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…
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अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…
रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया
दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।
तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।
दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।
शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:
सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।
भविष्य के लिए लिया संकल्प:
दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।
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