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स्वस्थ रहने के लिए भोजन, व्यायाम और आराम तीनों जरूरी… डॉ. अदिति सिंघल
सादर प्रकाशनार्थ
स्वस्थ रहने के लिए भोजन, व्यायाम और आराम तीनों जरूरी… डॉ. अदिति सिंघल
रायपुर, 10 जून: गिन्नीज बुक ऑफ रिकार्ड होल्डर सुप्रसिद्घ लेखिका डॉ. अदिति सिंघल ने केन्द्रीय सुरक्षा बल (सीआरपीएफ) के नवा रायपुर स्थित 211 वीं बटालियन के जवानों को शरीरिक और मानसिक तौर पर फिट रहने के लिए जरूरी एक्सरसाईज कराया। इस अवसर पर कमाण्डेन्ट संजीव रंजन एवं ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी सहित बड़ी संख्या में जवान उपस्थित थे।
डॉ. अदिति सिंघल ने बतलाया कि राजयोग मेडिटेशन से एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है तथा तनाव खत्म हो जाता है। हम जिस समय और जो कार्य करते हैं, उस समय केवल उसी कार्य के विषय में ध्यान केन्द्रित होना चाहिए। मन को नियंत्रित करने के लिए अच्छा तरीका यह है कि मन को अपना दोस्त बना लें। अपने मन से बातें करें उसे खाली न रखें। एकाग्रता को बढ़ाने के लिए वर्तमान में जीना सीखें। बीती बातों का ख्याल न करें।
नई दिल्ली की डॉ. अदिति सिंघल आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा नवा रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में एकाग्रता की शक्ति (Power of Concentration) विषय पर बोल रही थीं। उन्होंने एकाग्रता के लाभ गिनाते हुए कहा कि इससे कार्यक्षमता का विकास होता है, कार्य में परिपूर्णता आती है। निर्णय क्षमता का विकास होता है। स्मरण शक्ति बढ़ती है और मन के संकल्प शान्त होते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया जैसे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन, व्यायाम और आराम तीनों ही चीजें जरूरी होती हैं। ठीक वैसे ही मन को स्वस्थ और तनावमुक्त रखने के लिए श्रेष्ठ विचार, परमात्मा को शुक्रिया करने की आदत और रोज सुबह उठते ही मेडिटेशन करके परमात्म शक्तियों से स्वयं भरपूर करने की आदत डाल लें। हमारे शुद्घ विचार मन के लिए भोजन का काम करते हैं। सुबह का मेडिटेशन हमें दिन भर तरोताजा रखेगा। हम सदैव उर्जा से भरपूर रहेंगे। किसी बात में हताश या निराश नहीं होंगे।
उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली की डॉ. अदिति सिंघल जानी-मानी इन्टरनेशनल मैथ्स एण्ड मेमोरी ट्रेनर हैं। मेमोरी और त्वरित गणना के लिए तीन बार आपका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में नाम शामिल किया गया है। इसके अलावा इण्डिया बुक ऑफ रिकार्ड द्वारा आपको बेस्ट मेमोरी ट्रेनर के रूप में अवार्ड प्रदान किया जा चुका है। आपने छ: किताबें भी लिखी हैं।
प्रेषक: मीडिया प्रभाग,
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
सम्पर्क: 94252-02355, 94255-02255
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बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
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स्वयं को पहचानें और परमात्मा से जुड़ें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी: बी.के. श्रेया
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तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…
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अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…
रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया
दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।
तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।
दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।
शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:
सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।
भविष्य के लिए लिया संकल्प:
दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।
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