Brahmakumaris Raipur
छात्र जीवन में सफल होने के लिए एकाग्रता जरूरी… ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी, सम्पादक, ज्ञानामृत
मोबाईल और टेलीविजन का आकर्षण एकाग्रता को भंग करता है…
– नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चों के शासकीय प्रयास बालक आवासीय विद्यालय में हुआ आयोजन
रायपुर, 30 जनवरी, 2023: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा विधानसभा रोड स्थित शासकीय प्रयास आवासीय विद्यालय में व्याख्यान आयोजित किया गया। विषय था- एकाग्रता से सफलता।
माउण्ट आबू से प्रकाशित मासिक पत्रिका ज्ञानामृत की सम्पादक ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी ने बतलाया कि यदि आप जीवन में सफलता पाना चाहते हैं तो एकाग्रता को अपनाना होगा। छात्र जीवन में मोबाईल, टी.वी. और सोशल मीडिया में समय देना उसे व्यर्थ गंवाना है। यह सभी क्षणिक आकर्षण हैं जो कि जीवन में कुछ काम नहीं आने वाले हैं। जाने वाला समय वापिस लौटकर नहीं आएगा। समय बीत जाने के बाद पछताने के सिवाय कुछ नहीं बचेगा।
उर्मिला दीदी ने आगे बतलाया कि अगर मन भटकता है और पढ़ाई में मन नहीं लगता है। शिक्षक द्वारा बतलाई गई बातें याद नहीं रहती हैं तो इसका मतलब यह है कि हमारे जीवन में एकाग्रता की कमी है। हमारी आँख, कान, नाक, जिव्हा और मुख आदि कर्मेन्द्रियों का आकर्षण भी हमारी एकाग्रता को भंग करता है। हमें इन कर्म इन्द्रियों का गुलाम नहीं बनना है बल्कि इन इन्द्रियों के आकर्षणों पर जीत प्राप्त करनी होगी।
उन्होंने फिल्मी हीरो का जिक्र करते हुए कहा कि हीरो वह नहीं जो चेहरे से सुन्दर हो। बल्कि हीरो वह है जो अनेकों का जीवन संवार दे। बहुत सारे लोगों का सहारा बने। उन्होंने बच्चों को अपने फील्ड में हीरो बनने की सलाह देते हुए कहा कि आप अपनी क्लास के हीरो बनो। अपने गांव के हीरो बनो। लोग आपको देखकर कहें कि वाह बच्चा हो तो ऐसा हो। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए इन्द्रियों के आकर्षण को जीतना होगा। शान्ति, धीरज और प्रेमपूर्वक रहना सीखना होगा।
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बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
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स्वयं को पहचानें और परमात्मा से जुड़ें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी: बी.के. श्रेया
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तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…
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अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…
रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया
दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।
तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।
दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।
शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:
सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।
भविष्य के लिए लिया संकल्प:
दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।
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