Brahma Kumaris News
ब्रह्माकुमारी संस्थान ने किया सेवाभावी चिकित्सकों का सम्मान
सेवा समाचार
– ब्रह्माकुमारी संस्थान ने किया सेवाभावी चिकित्सकों का सम्मान
– चिकित्सक जीवन दाता होता है… ब्रह्माकुमारी कमला दीदी, क्षेत्रीय निदेशिका
– बालाजी सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पीटल में सम्पन्न हुआ कार्यक्रम
रायपुर, 2 नवम्बर, 2022: समाज में सबसे सम्माननीय पेशा चिकित्सक का होता है। चिकित्सक मरीज को नया जीवन देता है। इसलिए समाज में उन्हें ईश्वर के समान दर्जा मिला हुआ है।
यह उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी ने सेवाभावी चिकित्सकों का सम्मान करते समय व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि जीवन यापन के लिए मनुष्य बहुत से उद्यम करता है किन्तु चिकित्सक का पेशा सबसे सम्मानजनक माना जाता है। इसलिए इसे व्यवसाय कहना उचित नहीं होगा। बल्कि यह सेवा कार्य है।
उन्होंने हास्पीटल के डायरेक्टर डॉ. देवेन्द्र नायक की सराहना करते हुए कहा कि वह बहुत ही सेवाभावी चिकित्सक हैं। उन्होंने अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डॉक्टर साहब बड़े ही लगन के साथ नि:स्वार्थ भावना से मरीजों का इलाज करते हैं। इसलिए लोगों की उन्हें बहुत दुआएं मिल रही है जिसके परिणाम स्वरूप उनका हास्पीटल निरन्तर तरक्की कर रहा है। अब तो उनके हास्पीटल के साथ मेडिकल कालेज और नर्सिंग होम भी वह संचालित कर रहे हैं।
बालाजी सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पीटल के डायरेक्टर डॉ. देवेन्द्र नायक ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान उनके लिए परिवार की तरह है। इस संगठन के लोगों का ईलाज करके उन्हें आत्मिक प्रसन्नता होती है। उन्होंने यह अनुभव किया है कि योगी और तपस्वी होने के कारण यहाँ के लोगों की रिकवरी बहुत जल्दी होती है। मेडिटेशन करने से स्वास्थ्य अच्छा होता है।
इस अवसर पर ब्र. कु. कमला दीदी, सविता दीदी और किरण दीदी ने डॉ. देवेन्द्र नायक, श्रीमती नीता नायक सहित हॉस्पीटल के प्रमुख सेवाभावी चिकित्सकों का शॉल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी रश्मि, वनिषा और भावना बहन भी उपस्थित थीं।
प्रस्तुति – ब्रह्माकुमारी सविता, रायपुर (छ.ग.)
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बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
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स्वयं को पहचानें और परमात्मा से जुड़ें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी: बी.के. श्रेया
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तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…
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अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…
रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया
दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।
तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।
दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।
शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:
सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।
भविष्य के लिए लिया संकल्प:
दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।
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