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प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की 53 वीं पुण्यतिथि कल
सादर प्रकाशनार्थ
प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की 53 वीं पुण्यतिथि कल
रायपुर, 17 जनवरी, 2022: अन्तर्राष्टï्रीय संगठन प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के सदस्य 18 जनवरी को अपने संस्थापक पिताश्री प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की 53 वीं पुण्यतिथि को विश्व शान्ति दिवस के रूप में मनाएंगे। विश्व के पांचों महाद्वीपों में 137 देशों में विस्तारित 8500 (साढ़े आठ हजार) से भी अधिक सेवाकेन्द्रों में इस अलौकिक संस्थान के दस लाख सदस्य कल सारा दिन आत्म चिन्तन में बिताएंगे तथा राजयोग के अभ्यास के द्वारा समग्र विश्व में शान्ति के प्रकम्पन फैलायेंगे।
यह कार्यक्रम पूरे विश्व में एक साथ और एक ही समय पर आयोजित किए जाएंगे। राजधानी में श्रद्घाजंलि सभा का आयोजन विधानसभा रोड स्थित शान्ति सरोवर और चौबे कालोनी सहित सभी पन्द्रह सेवाकेन्द्रों में किया जाएगा। कल प्रात: काल से ही प्रार्थना सभाओं का दौर प्रारम्भ हो जाएगा। इसके पश्चात ब्रह्मा बाबा को श्रद्घाजंलि अर्पित की जाएगी एवं परमात्मा को भोग स्वीकार कराया जाएगा। संस्था के मुख्यालय माउण्ट आबू में भी व्यापक स्तर पर श्रद्घाजंलि सभा का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें भाग लेने के लिए विभिन्न देशों से लोग माउण्ट आबू में पहुँचे हैं।
ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार 18 जनवरी 1969 को पिताश्री ब्रह्मा बाबा ने सम्पूर्ण अवस्था को प्राप्त कर पार्थिव देह का कलेवर त्यागा था। इसलिए यह दिवस समग्र मानव जाति के लिए दिव्यता सम्पन्न जीवन बनाने का सन्देश लेकर आता है।
विश्व में शान्ति और सद्भावना के लिए कार्यरत ब्रह्माकुमारी संगठन ने आज सारे संसार में अपनी एक अलग ही पहचान बनाई है। संयुक्त राष्टï्र संघ ने ब्रह्मïाकुमारी संस्थान द्वारा सारे विश्व में की जा रही उल्लेखनीय सेवाओं को देखते हुए इसे यूनिसेफ तथा आर्थिक एवं सामाजिक परिषद में सलाहकार का दर्जा प्रदान किया है। इसके अलावा संयुक्त राष्टï्र संघ ने वर्ष 1981 में विश्व शान्ति दूत पदक प्रदान कर भी सम्मानित किया है।
प्रेषक: मीडिया प्रभाग,
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
रायपुर फोन: 0771-2253253, 2254254
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शिवरात्रि पर्व घूमधाम से मनाया गया
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गणतंत्र दिवस
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बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
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स्वयं को पहचानें और परमात्मा से जुड़ें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी: बी.के. श्रेया
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तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…
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अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…
रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया
दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।
तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।
दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।
शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:
सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।
भविष्य के लिए लिया संकल्प:
दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।
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