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भारत देश अति प्राचीन और अविनाशी खण्ड है ……. ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी
भारत देश अति प्राचीन और अविनाशी खण्ड है ……. ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी
रायपुर, ०४ मई : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा चौबे कालोनी में आयोजित समर कैम्प के अन्तर्गत सृष्टि के आदि, मध्य और अन्त का दिग्दर्शन विषय पर बोलते हुए ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी ने कहा कि विश्व के मानचित्र पर हमारा भारत देश अति प्राचीन और अविनाशी खण्ड है क्योंकि इसका इतिहास पांच हजार वर्ष पुराना है। किसी भी अन्य देश का इतिहास इतना पुराना और गौरवशाली नही है।
ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी ने कहा कि मनुष्य आत्माओं के गुण और कर्तव्यों के आधार पर विश्व के इतिहास को चार युगों में बांटा गया है। इसमें सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग चार कालखण्ड होते हैं। प्रत्येक की अवधि बारह सौ पचास वर्ष होती है। सतयुग और त्रेतायुग इस संसार का सतोप्रधान अर्थात स्वर्णिम काल है। जहॉं पर दिव्यगुणों से सम्पन्न होने के कारण मनुष्य आत्माएं देवी और देवता कहलाते थे। उस समय को ही स्वर्ग, बैकुण्ठ अथवा रामराज्य कहकर आज तक याद किया जाता है।
धीरे-धीरे पुनर्जन्म के चक्र में आकर मनुष्य आत्माएं अपनी निजी पहचान को भूलकर स्वयं को शरीर समझने लग जाते हैं तथा देह अभिमान के फलस्वरूप काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार आदि विकारों के वशीभूत होकर दु:खी और अशान्त हो जाते हैं। जिसके परिणामस्वरूप द्वापरयुग से भक्ति मार्ग का प्रादुर्भाव होता है। सबसे पहले एक निराकार शिव की ही पूजा होती थी किन्तु बाद में भक्ति भी तमोप्रधान हो गई। लोग अनेकानेक देवी-देवताओं की पूजा करने लगे। कलियुग के अन्त में जड़ तत्वों जैसे पेड़ पौधों की भी पूजा होने लगी। भक्ति मेें श्रद्घा का स्थान स्वार्थ ने ले लिया।
ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी ने बतलाया कि इस दुनिया की आबादी धीरे-धीरे बढ़ रही है, इसका मतलब है कि जरूर कहीं पर आत्माओं का निवास भी होना चाहिए, जहॉं से समय-समय पर आत्माएं इस भू मण्डल पर आती जा रही हैं। उन्होने बतलाया कि सूर्य, चांद और तारागण से भी ऊपर एक और दुनिया है जहॉं पर लाल रंग का सुनहरा प्रकाश व्याप्त है, जिसे छठा ब्रह्मï तत्व भी कहते हैं, इसलिए इस लोक को ब्रह्मïलोक, परमधाम, शान्तिधाम आदि आदि नामों से जाना जाता है। शरीर छोडऩे के बाद मनुष्यात्माएं यहॉं पर ही निवास करती हैं। परमात्मा भी वहॉं ही रहते हैं तथा अतिधर्मग्लानि के समय इस धरा पर अवतरित होते हैं, इसलिए परमात्मा को जब कोई याद करते हैं तो न चाहते हुए भी सिर ऊपर की ओर उठ जाता है।
उन्होने बतलाया कि जैसे आम के बीज से आम का ही पौधा उत्पन्न होता है, ठीक उसी प्रकार शरीर छोडऩे के पश्चात मनुष्य भी मनुष्य के रूप में ही जन्म लेता है, अपने कर्मों का फल भोगने के लिए उसे पशु योनि में जाने की जरूरत नही होती। अगर मनुष्य को कर्मों का फल भोगने के लिए पशु बनना पड़ता तो आज दुनिया में मनुष्यों की जनसंख्या सिमटकर रह जाती। अधिकांश मनुष्य पशु योनि में चले जाते।
प्रेषक: मीडिया प्रभाग,
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
दूरभाष: २२५३२५३,२२५४२५४
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Brahma Kumaris News
बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
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स्वयं को पहचानें और परमात्मा से जुड़ें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी: बी.के. श्रेया
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तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…
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अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…
रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया
दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।
तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।
दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।
शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:
सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।
भविष्य के लिए लिया संकल्प:
दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।
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Meditation for World Unity & Trust
ब्रह्माकुमारीज शान्ति सरोवर में विश्व ध्यान दिवस मनाया गया…
– मन को शान्त रखने के लिए ध्यान जरूरी है… रूप नारायण सिन्हा, अध्यक्ष योग आयोग
– ध्यान से स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है… ब्रह्माकुमारी सविता दीदी
– तनावमुक्त समाज बनाने में मददगार है ध्यान… डॉ. सरिता बाजपेयी, आर्ट ऑफ लीविंग
– जीवन में शान्ति के लिए ध्यान जरूरी… ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी
रायपुर, 21 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर सड्ढू में विश्व ध्यान दिवस मनाया गया। विषय था: विश्व एकता और विश्वास के लिए ध्यान (Meditation for World Unity & Trust)।
समारोह मेें बोलते हुए छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष रूप नारायण सिन्हा ने कहा कि मन को शान्त रखने और अपने आपको व्यवस्थित रखने के लिए ध्यान बहुत ही जरूरी है। जब आप अपने आपको जानने लगते हैं और ध्यानस्थ हो जाते हैं तब एकाग्रता आती है। एकाग्रता के लिए सतत् अभ्यास चाहिए। उन्होंने ब्रह्माकुमारीजऔर शान्ति सरोवर की महिमा करते हुए कहा कि ऐसी पावन जगह पर आने से मन का भटकाव बन्द हो जाता है। मन पर स्थान का भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। इसीलिए कहा गया है कि जीवन में तपस्वी और ध्यानी लोगों का सम्पर्क जरूरी है। उन्होंने प्रेरक कहानी के माध्यम से अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि साधक के द्वारा साधना करने से साध्य की प्राप्ति होती है।
रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि ध्यान का मुख्य उद्देश्य समाज में सद्भावना उत्पन्न करना है। ध्यान हमें बाहरी दुनिया से जुडऩे की बजाए अपने भीतर झांकने और आत्म विश्लेषण करने का अवसर प्रदान करता है। यह हमारी बुद्घि को तेज और स्मरण शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। उन्होंने राजयोग मेडिटेशन का उल्लेख करते हुए बतलाया कि इससे मन शान्त होता है और एकाग्रता बढ़ती है। यह शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करने, हृदय के स्वास्थ्य में सुधार करने और रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। ध्यान से हम अपनी आन्तरिक शक्तियोंं को जागृत सकते हैं जिससे न केवल हमारा जीवन स्वस्थ और सन्तुलित बनता हे बल्कि हम शान्तिपूर्ण, संवेदनशील और श्रेष्ठ समाज की स्थापना में योगदान दे सकते हैं।
आर्ट ऑफ लीविंग की डॉ. सरिता बाजपेयी ने कहा कि ध्यान के द्वारा हम तनावमुक्त समाज बना सकते हैं। ध्यान में हम अपने मन के विचारों को रोकने का प्रयास न करें। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। जीवन में आगे बढऩे के लिए स्वीकार भाव बहुत जरूरी है। हम जो हैं और जैसे हैं उसे स्वीकार करें तब ही आनन्द का अनुभव कर सकेंगे। जिस प्रकार शरीर को शक्ति देने के लिए तीन बार भोजन जरूरी है उसी प्रकार मन की शान्ति के लिए दिन में कम से कम दो बार ध्यान अवश्य करें। यह आत्मा का भोजन है। इससे स्ट्रेस बाहर निकलेगा और जीवन में शान्ति खुशी एवं आनन्द की प्राप्ति होगी।
ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी ने कहा कि जीवन में शान्ति के लिए ध्यान जरूरी है। यह ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने मन और विचारों को नियंत्रित करता है। यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है और मन को सशक्त बनाता है। आज की भागदौड़ की जिन्दगी में राजयोग मेडिटेशन एक वरदान की तरह है जो कि हमें तनाव और चिन्ता से मुक्त कर खुशहाल जीवन जीने में मदद करता है।
कार्यक्रम का सुचारू रूप से संचालन ब्रह्माकुमारी सिमरन दीदी ने किया।
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