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१. सोच बदल लो, जीवन बदल जाएगा… ब्रह्माकुमार शक्तिराज सिंह

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१. सोच बदल लो, जीवन बदल जाएगा… ब्रह्माकुमार शक्तिराज सिंह
२. तनावमुक्त रहने के लिए सभी को सुख दें … ब्रह्माकुमार शक्तिराज सिंह

रायपुर,४ मई, २०१९: इन्टरनेशनल माइण्ड व मेमोरी मैनेजमेन्ट ट्रेनर ब्रह्माकुमार शक्तिराज सिंह ने कहा कि अपनी सोच को बदलने सेे जीवन बदल जाएगा। अनुसंधान से पता चला है कि हमारे मन में पूरे दिन भर में साठ हजार के लगभग विचार पैदा होते हैं जिसमें से साठ प्रतिशत फालतू (व्यर्थ) होते हैं। अब हमें इन विचारों की गति को कम करना है। ताकि हमारी शक्ति व्यर्थ में खत्म न हो।
ब्रह्माकुमार शक्तिराज सिंह आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा विधानसभा मार्ग पर स्थित शान्ति सरोवर मेंं आयोजित खुशियों की चाबी नामक कार्यक्रम के दूसरे दिन मन का सकारात्मक प्रबन्धन विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि लोगों के पास सोफासेट, ड्राईंग सेट, क्राकरी सेट, ज्वेलरी सेट आदि सभी सेट रखे हुए हैं लेकिन माउण्ड सेट नहीं है। वह अपसेट पड़ा हुआ है।

माइण्ड को सेट करने के लिए मेडिटेशन जरूरी:
उन्होंने बतलाया कि इस देश में बड़े-बड़े मेडिकल कालेज, इन्जीनियरिंग कालेज, लॉ कालेज आदि सब मिल जाएंगे लेकिन माइण्ड को सेट करना सिखाने के लिए कोई कालेज नहीं है। यह कार्य ब्रह्माकुमारी संस्थान में सिखलाया जाता है। माइण्ड को सेट करने के लिए राजयोग मेडिटेशन सबसे अच्छा तरीका है। जैसे मोबाईल की बैटरी को रोज चार्ज करते हैं, उसी प्रकार माइण्ड को भी रोज चार्ज करने की जरूरत है। रात को जब हम सोते हैं तो सिर्फ शरीर को आराम मिलता है किन्तु मेडिटेशन करने से आत्मा को शान्ति की अनुभूति होती है।

मेडिटेशन से खराब रिलेशन भी सुधरते है:
उन्होंने कहा कि निगेटिव एनर्जी से आत्मा रूपी बैटरी डिस्चार्ज होती है। घर में यदि कलह-क्लेष है इसका मतलब है कि बैटरी डिस्चार्ज है। मेडिटेशन के माध्यम से परमात्मा को याद करने से परमात्म शक्ति हमें प्राप्त होती है। उन्होंने बतलाया कि यदि लगातार इक्कीस दिनों तक खराब रिलेशन वाले व्यक्ति को पाजिटिव वायब्रेशन दिए जाएं तो उसके प्रभाव से खराब रिलेशन भी ठीक हो जाते हैं।

अध्यात्म से भाई-चारा बढ़ता है :
उन्होंने निगेटिविटी को दूर करने का सबसे अच्छा उपाय बतलाते हुए कहा कि हम सभी आत्माएं एक पिता परमात्मा की सन्तान होने के कारण आपस में भाई-भाई हैं। जब यह ईश्वरीय ज्ञान हमें मिल जाता है और हम सामने वाले को जो है जैसा है स्वीकार कर लेते हैं तो अस्सी प्रतिशत झगड़ा समाप्त हो जाता है। आत्मा एक सूक्ष्म शक्ति है। वह शरीर के द्वारा कर्म करती है। हम सारे दिन में जितने भी लोगों के सम्पर्क में आते हैं उनके साथ हमारा कार्मिक एकाउण्ट बनता जाता है। जो कि हमें अपने जीवन में चुकाकर बराबर करना होता है। इसलिए जीवन में जब भी कोई विपरीत परिस्थिति आए, दु:ख या संकट आए तो सदैव यह समझना कि पिछले जन्म का हिसाब-किताब खत्म हो रहा है। इससे स्ट्रेस फ्री बने रहेंगे।

प्रेषक: मीडिया प्रभाग,
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
फोन: ०७७१- २२५३२५३, २२५४२५४
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