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तनावमुक्ति एवं शान्ति अनुभूति शिविर

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मनुष्य खुशी को बाहरी वस्तुओं में ढूंढ रहे हैं… ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी
रायपुर, 23 अप्रैल 2026: वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी ने कहा कि मनुष्य खुशी को भौतिक पदार्थों में ढूँढ रहे हैं किन्तु भौतिक पदार्थों से स्थायी खुशी नही मिल सकती। राजयोग से ही जीवन में स्थायी खुशी प्राप्त की जा सकती है। राजयोग के लिए स्वयं की पहचान जरूरी है।
ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा अविनाश केपीटल होम्स सड्ढू रायपुर में आयोजित तनावमुक्ति एवं शान्ति अनुभूति शिविर के पहले दिन खुशी का आधार-आत्मानुभूति विषय पर अपने विचार रख रही थीं। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने जीवन को चिन्ता रहित, सुख-शान्ति सम्पन्न बनाना चाहते हैं तो यह जानना निहायत जरूरी है कि मैं कौन हूॅं?
उन्होंने बतलाया कि इस दुनिया में जितनी भी जड़ पदार्थ हैं, वह स्वयं अपने ही उपयोग के लिए नही बने हैं। सभी जड़ पदार्थों का उपभोग करने वाला उससे भिन्न कोई न कोई चैतन्य प्राणी होता है। हमारा यह शरीर भी जड़ पदार्थों से बना पांच तत्वों का पुतला है तो जरूर इसका उपयोग करने वाला इससे भिन्न कोई चैतन्य शक्ति होनी चाहिए।
ब्रह्माकुमारी  अदिति दीदी ने कहा कि जब हम कहते हैं कि मुझे शान्ति चाहिए? तो यह कौन है जो कहता है कि मुझे शान्ति चाहिए? शरीर शान्ति नही चाहता। शरीर की शान्ति तो मृत्यु है। आत्मा कहती है कि मुझे शान्ति चाहिए। उन्होने बतलाया कि आत्मा एक चैतन्य शक्ति है। शक्ति को स्थूल नेत्रों से देखा नही जा सकता लेकिन मन और बुद्घि से उसका अनुभव किया जाता है। जैसे बिजली एक शक्ति है। वह दिखाई नही देती किन्तु बल्ब जल रहा है और पंखा चल रहा है तो हम कहेंगे किबिजली है।
उसी प्रकार आत्मा के गुणों का अनुभव करके उसकी उपस्थिति का अहसास होता है। आत्मा का स्वरूप अतिसूक्ष्म ज्योतिबिन्दु के समान है। उसे न तो नष्टï कर सकते हैं और न ही उत्पन्न कर सकते हैं। वह अविनाशी है। आत्मा के शरीर से निकल जाने पर न तो शरीर कोई इच्छा करता हैं और न ही किसी तरह का कोई प्रयास करता है। मृत शरीर के पास ऑंख, मुख, नाक आदि सब कुछ होता है लेकिन वह न तो देख सकता है, न ही बोल अथवा सुन सकता है।
ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी ने आगे कहा कि आत्मा तीन शक्तियों के माध्यम से अपना कार्य करती है। वह किसी भी कार्य को करने से पहले मन के द्वारा विचार करती है फिर बुद्घि के द्वारा यह निर्णय करती है कि उसके लिए क्या उचित है और क्या अनुचित? तत्पश्चात किसी भी कार्य की बार-बार पुनरावृत्ति करने पर वह उस आत्मा का संस्कार बन जाता है।
उन्होंने बतलाया कि आत्मा की सात मूलभूत विशेषताएं होती हैं- ज्ञान, सुख, शान्ति, आनन्द,पवित्रता, प्रेम, और शक्ति। यह सभी आत्मा के मौलिक गुण हैं, जो कि शान्ति की अवस्था में हमें अनुभव होते हैं। उन्होने कहा कि हमारा मन किसी न किसी व्यक्ति, वस्तु या पदार्थ की स्मृति में भटकता रहता है। अब उसे इन सबसे निकालकर एक परमात्मा की याद में एकाग्र करना है। इसी से आत्मा में आत्मविश्वास और शक्ति आएगी।

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नशामुक्त युवा फॅार विकसित भारत संकल्प अभियान.

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नशामुक्त युवा फॅार विकसित भारत संकल्प अभियान…
– प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली से किया वर्चुवल शुभारम्भ…
– शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर रायपुर में नशा मुक्त भारत बनाने का लिया संकल्प…
– युवाओं को नशामुक्त करने सामूहिक प्रयास की जरूरत…डॉ. हंसा रावल, अमेरिका

रायपुर, 02 अगस्त 2026: भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा नाराकोटिक्स कन्ट्रोल ब्यूरो के साथ प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा किए गए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अनुरूप पूरे देश भर में दस करोड़ लोगों का नशामुक्ति के लिए प्रेरित करते हुए प्रतिज्ञा कराने का संकल्प लिया गया।

आज इस देशव्यापी अभियान का वर्चुअल शुभारम्भ प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी द्वारा किया गया। इस अवसर पर रायपुर के शान्ति सरोवर मेें आयोजित कार्यक्रम में नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, राज्य अल्प संख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, भाजपा  प्रवक्ता शताब्दि पाण्डे एवं तौकीर राजा, अमेरिका सेना की पूर्व कर्नल डॉ. हंसा रावल, ब्रह्माकुमार मार्क भाई, वन विकास निगम के प्रबन्ध संचालक प्रेम कुमार, क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी, रायपुर संचालिका बीके सविता दीदी ने हिस्सा लिया।

इस अवसर पर बोलते हुए अमेरिकी सेना की पूर्व कर्नल डॉ. हंसा रावल ने कहा कि अमेरिका में जब मैं सेवा देती थी तो वहाँपर ईलाज के लिए बहुत से नशे के शिकार युवक-युवतियों को लाते थे। अमेरिका में मैने नोटिस किया कि वहाँके इण्डियन्स बदनामी की डर से अपने बच्चों के नशे की बात को छिपाते थे। जबकि इसके विपरीत अमेरिकन्स को जैसे ही पता चलता था कि बच्चा नशा कर करने लगा है तो उसे तुरन्त पुलिस बुलाकर उसे एक दिन के लिए जेल में डलवा देते थे। अगर बच्चों को नशामुक्त करना है तो छिपाएं नहीं तुरन्त उसका इलाज कराएं। सभी मिलकर प्रयास करेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी।

वन विकास निगम के प्रबन्ध संचालक प्रेम कुमार (आईएफएस) कहा कि हमारे देश की पैंसठ प्रतिशत आबादी युवा है। यह युवा आगे चलकर डॉक्टर, इन्जीनियर, वैज्ञानिक बनेंगे और देश के निर्माण में अपना योगदान देंगे। अगर यह युवा ही भटक जाएंगे तो इन्हें कौन रास्ता दिखाएगा? हरेक व्यक्ति जीवन में सुख चाहता है। सुख प्राप्त करने के अनेक मार्ग हैं। चाहे वह अध्यात्म से मिले या नशे से। अध्यात्म और संस्कार के मामले में हमारा देश अग्रणी है। सारे विश्व से लोग शान्ति के लिए यहाँ आते हैं।

क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने कहा कि युवा सशक्त बनेगा तो देश सशक्त बनेगा। जब दस करोड़ व्यक्ति एक साथ नशामुक्ति का सकंल्प करेंगे तो वह सकंल्प नहीं रह जाएगा बल्कि सामाजिक क्रान्ति बन जाएगी। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं है। यह एक राष्ट्रीय जागरण का कार्य है।

भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता शताब्दि पाण्डे ने कहा कि पूरे विश्व में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने और आत्मबल को बढ़ाने का सराहनीय कार्य ब्रह्माकुमारी संस्था कर रही है। उससे भी आगे बढ़कर युवा वर्ग को नशे से छुटकारा दिलाने का प्रशंसनीय कार्य यह संस्था करने जा रही है। स्वस्थ समाज के निर्माण का यह अच्छा प्रयास है।

रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने सभी को नशा मुक्त जीवन के लिए प्रतिज्ञा कराई। उन्होंने कहा कि प्रतिज्ञा को सिर्फ दोहराएं नहीं वरन् इसे आत्मसात करने का संकल्प करें।

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Shradhanjali __Ratanmohini Dadi ji

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MATS University , Raipur

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