Brahmakumaris Raipur
तीन सौ फीट लम्बी गुफा में बनाया गया है द्वादश ज्योतिर्लिंग…
सादर प्रकाशनार्थ
– शान्ति सरोवर में दिन भर लोगों का तांता लगा रहा…
– द्वादश ज्योतिर्लिंग की झाँकी 21 फरवरी तक रहेगी…
– तीन सौ फीट लम्बी गुफा में बनाया गया है द्वादश ज्योतिर्लिंग…
रायपुर, 18 फरवरी: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा विधानसभा रोड पर शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर में द्वादश ज्योतिर्लिंग को देखने के लिए आज दिन भर शिवभक्तों का तांता लगा रहा।
लोग बड़े ही भक्तिभाव से द्वादश ज्योतिर्लिंग का दर्शन करने आते थे और भोलेनाथ के दर्शन कर धन्य अनुभव करते थे। इस अवसर पर नन्हे मुन्ने बाल कलाकारों द्वारा सृष्टि का इतिहास बतलाते हुए सतयुग त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग में प्राचीन भारत की गौरवगाथा का सजीव चित्रण देख भाव विभोर हो उठते थे। महाशिवरात्रि पर्व के आध्यात्मिक रहस्य को कमेन्ट्री के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यह बतलाया गया है कि यह परमात्मा शिव के दिव्य अवतरण की ही यादगार है। जब इस धरा पर चारों ओर अज्ञान अन्धकार छाया होता है तथा मनुष्यात्माएं काम, क्रोध, लोभ, मोह एवं अहंकार रूपी विकारों के वशीभूत हो जाती हैं। तब ऐसे अतिधर्मग्लानि के समय पर मनुष्यों को निर्विकारी और पवित्र बनाने के लिए परमात्मा शिव का दिव्य अवतरण इस धरा पर होता है।
द्वादश ज्योतिर्लिंग को मनोरम तरीके से तीन सौ फीट लम्बी गुफा के अन्दर प्रदर्शित किया गया है। यहीं पर शिव दर्शन आध्यात्मिक प्रदर्शनी भी लगाई गई है। जहाँपर प्रशिक्षित गाईड एक-एक चित्र पर समझाकर लोगों की जिज्ञासा को शान्त करते हैं। जो लोग और अधिक जानकारी चाहते हैं उनके लिए नि:शुल्क सात दिवसीय राजयोग शिविर की भी व्यवस्था की गई है।
ब्रह्माकुमारी संस्थान की रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने बतलाया कि 21 फरवरी तक आयोजित इस शिव दर्शन झाँकी को प्रतिदिन शाम को 6 से रात्रि 9 बजे तक देखा जा सकता है। प्रवेश नि:शुल्क है।
प्रेषक: मीडिया प्रभाग,
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
शान्ति सरोवर, रायपुर सम्पर्क: ९४२५५ ०२२५५
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शिवरात्रि पर्व घूमधाम से मनाया गया
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गणतंत्र दिवस
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बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला
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स्वयं को पहचानें और परमात्मा से जुड़ें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी: बी.के. श्रेया
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तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…
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अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…
रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया
दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।
तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।
दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।
शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:
सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।
भविष्य के लिए लिया संकल्प:
दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।
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