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हमारे कर्म ऐसे सुखदायी हों कि सब दुआएं दें… ब्रह्माकुमारी रिंकू दीदी
सादर प्रकाशनार्थ
ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा यू-ट्यूब पर प्रतिदिन प्रसारित वेब सीरिज –
हमारे कर्म ऐसे सुखदायी हों कि सब दुआएं दें… ब्रह्माकुमारी रिंकू दीदी
रायपुर, 21 अगस्त: राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी रिंकू दीदी ने कहा कि सन्तुलित जीवनशैली बनाने के लिए कार्य और परिवार के बीच सन्तुलन बनाकर रखना होगा। हम अपने काम में इतना न व्यस्त हो जाएं कि परिवार के लिए समय ही न रहे। जितना आवश्यक है उतना ही व्यस्त रहें। सबको सुख देने वाले ऐसे काम करें कि लोग दुआएं दें। हमारे कार्यों से किसी को तकलीफ न हो।
ब्रह्माकुमारी रिंकू दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रायपुर सेवाकेन्द्र द्वारा सोशल मीडिया यू-ट्यूब पर प्रतिदिन शाम को 5.30 से 6.00 बजे प्रसारित होने वाले आनलाईन वेबसीरिज एक नई सोच की ओर में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। विषय था: सन्तुलित कार्यशैली। इस वेबसीरिज का प्रसारण शान्ति सरोवर रायपुर के चैनल पर किया जाता है। इस वेबसीरिज के माध्यम से ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा जीवन की समस्याओं का समाधान ढूँढने के साथ ही आचरण में सुधार लाने के लिए लोगों का मार्गदर्शन किया जाता है। ताकि एक अच्छा समाज बनाने में मदद मिल सके।
ब्रह्माकुमारी रिंकू दीदी ने कहा कि कर्म के बिना जीवन सम्भव नहीं है। जब कार्य करना ही है तो क्यों न उसे उमंग उत्साह के साथ किया जाए। सवाल यह है कि कार्य व्यवहार करते हुए हमारे जीवन में सन्तुलन कैसे रहे? अगर हम चाहते हैं कि हमारे जीवन में सन्तुलन रहे तो हमें कार्य और परिवार के बीच सन्तुलन बनाकर रखना होगा। हम अपने काम में इतना न व्यस्त हो जाएं कि परिवार के लिए समय ही न रहे। जितना आवश्यक है उतनी ही व्यस्तता रहे। हमारे कर्म ऐसे हों कि लोग दुआएं दें। हमारे कर्मों से किसी को कष्ट न पहुंचे।
उन्होंने कहा कि सन्तुलित जीवन बनाने के लिए सबसे पहले मानसिक सन्तुलन को ठीक रखना होगा। हमने अपने मन में यह बात बिठाकर रखा है कि परिस्थिति ठीक रहेगी तब मेरा मन ठीक रहेगा। आध्यात्मिकता हमें यह सिखलाती है कि हम हरेक परिस्थितियों में सन्तुलन बनाकर रख सकते हैं। हमारी मनोदशा परिस्थितियों पर नही अपितु हमारे संकल्पों पर निर्भर होती है। हम अपने संकल्पों से परिस्थिति को बदल सकते हैं। यह हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर रहता है।
ब्रह्माकुमारी रिंकू दीदी ने कहा कि जितना हम अपने बैंक बैलेन्स पर ध्यान देते हैं। उतना ही ध्यान अगर हम अपने मन पर दें तो कार्यों के बीच सन्तुलन बनाया जा सकता है। हम कर्म करते हुए कर्म से न्यारे होकर रहें। हम कर्मों के प्रभाव में न आएं। जो भी कर्म हम करते हैं उसे प्रभु अर्पण कर दें। कार्य करने के उपरान्त परमात्मा का शुक्रिया करना न भूलें। अपने को निमित्त समझकर कर्म करें।
प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
रायपुर फोन: 0771-2253253,2254254
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सबका भला हो, सब सुख पाएं
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