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Rakhi News: Raipur (CG)- Tying Rakhi to Governor, CM, Ministers, Chief Secretary & Security Personnels etc

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Photo 1Respected B. K. Kamla Didi Director of Brahmakumaris Indore Zone, tied the sacred thread – Raakhi to the His Excellency Governor of Chhattisgarh Mr. Balram Ji Das Tandon, Hon’ble Chief Minister Dr. Raman Singh Ji and Women and Children Development Minister Smt. Ramshila Sahu. Then B. K. Savita Bahen Tied Rakhi to Chairman of Legislative Assembly Mr. Gourishankar Agrawal, Agriculture & Water Resources Minister Mr. Brijmohan Agrawal, Minister for PWD Mr. Rajesh Munat, Chief Secretary, Upper Chief Secretory, Director Aims, IIM, IIT etc.

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बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला

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शांति शिखर में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन: बी.के. श्रेया दीदी ने सिखाया जीवन जीने की कला

  • स्वयं को पहचानें और परमात्मा से जुड़ें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी: बी.के. श्रेया

  • तीन दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में सैकड़ों लोगों ने लिया राजयोग का लाभ…

  • अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ के माध्यम से मानसिक रोगों और तनाव से मुक्ति का मार्ग बताया…

रायपुर, 23 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ‘शांति शिखर’ केंद्र में तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक शिविर का भव्य समापन हुआ। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी श्रेया

दीदी ने शिविर के दौरान शहरवासियों को तनावमुक्त जीवन जीने और आंतरिक शक्तियों को जागृत करने के गुर सिखाए। यह शिविर प्रतिदिन दो सत्रों में (सुबह 7:00 से 8:30 और शाम 7:00 से 8:30 बजे) आयोजित किया गया था।

तीन दिनों का सफर: स्वयं की खोज से आध्यात्मिक उपचार तक शिविर के पहले दिन का विषय ‘री-कनेक्ट विद योर इनरसेल्फ’ (Reconnect with your Innerself) रहा। दीदी ने बताया कि आज मनुष्य बाहर की दुनिया से तो जुड़ा है, लेकिन स्वयं से दूर हो गया है। जब तक हम अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानेंगे, हम खुश नहीं रह सकते।

दूसरे दिन ‘रीचार्ज द सोल’ (Recharge the Soul) विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मोबाइल को चार्ज करने की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर रिचार्ज करना पड़ता है। एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन ही आत्मा की बैटरी को चार्ज करने का तरीका है।

शिविर के तीसरे और अंतिम दिन ‘स्पिरिचुअल हीलिंग थ्रू मेडिटेशन’ (Spiritual Healing through Meditation) पर विशेष सत्र हुआ। दीदी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश बीमारियाँ मनोदैहिक (Psychosomatic) हैं, जिनका मूल कारण मन में छिपी चिंता और नकारात्मकता है। मेडिटेशन के माध्यम से हम स्वयं को हील (स्वस्थ) कर सकते हैं और पुराने मानसिक घावों को भर सकते हैं।

राजयोग मेडिटेशन का कराया दिव्य अनुभव:

सत्र की मुख्य विशेषता दीदी द्वारा कराई गई गहन राजयोग कमेन्ट्री रही। उन्होंने अपनी मधुर वाणी से उपस्थित जनसमूह को शरीर से अलग ‘स्व स्वरूप’ (आत्मा) का अनुभव कराया। परमात्मा के साथ जुड़कर दिव्य किरणों के माध्यम से मन की सफाई और हीलिंग का अभ्यास कराया गया। शिविरार्थियों ने अनुभव किया कि कैसे मेडिटेशन के माध्यम से मन का भारीपन दूर हो गया और शांति का संचार हुआ।

भविष्य के लिए लिया संकल्प:

दीदी ने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट राजयोग का अभ्यास करने का ‘चैलेंज’ दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिस्थितियाँ कभी भी हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन हमारा ‘रिस्पॉन्स’ हमारे हाथ में है। अंत में, शिविर में आए लोगों ने अपने बुरे संस्कारों को छोड़ने और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। शांति शिखर के इस आध्यात्मिक उत्सव से लोग नई ऊर्जा और उमंग लेकर विदा हुए।

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Soft Skills for Administators : बी.के. श्रेया दीदी

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CG Prashashan Academy

– प्रशासनिक अधिकारियों को मिला आंतरिक सशक्तिकरण का मंत्र…
– छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी निमोरा में हुआ आयोजन…
– बड़ी संख्या में आईएएस अधिकारियों ने हिस्सा लिया…
– बिमारी का मूल कारण हमारी मानसिक स्थिति में छिपा है…ब्रह्माकुमारी श्रेया दीदी, मुम्बई
नवा रायपुर: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय मुम्बई की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी श्रेया दीदी ने कहा कि अपने हर विचार के लिए हम स्वयं जिम्मेदार होते हैं। मन की शान्ति के लिए जरूरी है कि हम सही सोचें। डॉक्टर्स का कहना है कि शरीर की हर बिमारी का मूल कारण हमारी मानसिक अवस्था में छिपा हुआ है। इसलिए किसी बात को मन में दबाकर न रखें। उसे किसी के आगे बतलाकर हल्के हो जाएं।
वह ब्रह्माकुमारीज के प्रशासनिक सेवा प्रभाग द्वारा छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी निमोरा में शासकीय अधिकारियों के लिए आयोजित वर्कशाप में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। विषय था- प्रशासनिक अधिकारियों में आवश्यक व्यक्तिगत कौशल (Soft Skills for Administators)।
ब्रह्माकुमारी श्रेया दीदी ने आगे कहा कि जैसा हमारा चिंतन होगा, वैसा ही हमारा चरित्र और जीवन बनेगा। सकारात्मक दृष्टिकोण ही सफलता की असली कुंजी है। वर्तमान समय में बाहरी चुनौतियों से अधिक आंतरिक स्थिति को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब हम अपने मन को नियंत्रित कर लेते हैं, तो बाहरी परिस्थितियाँ स्वत: ही हमारे अनुकूल होने लगती हैं।
उन्होंने बतलाया कि हमारा मन कमजोर होगा तो छोटी-छोटी समस्याएं भी पहाड़ जैसी महसूस होगी। अपनी कार्यक्षमता और निर्णय शक्ति को बढ़ाने के लिए मेडिटेशन द्वारा आत्मबल को बढ़ाने और उसे मजबूत करने की आवश्यकता है। कार्यस्थल पर बढ़ता दबाव और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाना तभी संभव है जब हम प्रतिदिन स्वयं के लिए समय निकालकर मेडिटेशन करेंगे। यदि शासन-प्रशासन में बैठे लोग मानसिक रूप से शांत और प्रसन्न रहेंगे, तो उनकी कार्यक्षमता में न केवल वृद्धि होगी बल्कि समाज को भी एक बेहतर नेतृत्व मिलेगा।
श्रेया दीदी ने विचारों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारा मन एक उपजाऊ भूमि की तरह है। इसमें हम जैसे विचार बोएंगे, वैसी ही फसल काटेंगे। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें अपनी अंतरात्मा की आवाज को पहचानना होगा। यदि हम शान्तचित्त होकर कार्य करेंगे, तो कठिन से कठिन समस्या का समाधान सहजता से मिल जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा में आने वाली चुनौतियों को बाधा मानने के बजाय उन्हें अपनी क्षमता निखारने का अवसर मानना चाहिए। सहनशीलता कमजोरी नहीं, बल्कि एक महान शक्ति है। अच्छा प्रशासक बनने के लिए शान्त रहना जरूरी है। हमने तनाव को नैचुरल समझ लिया है जो कि हमें बीमार कर रहा है। सबसे प्रेमपूर्वक व्यवहार करें तो प्रशासन ठीक से चलेगा। सबको सम्मान दें तो आपको भी सम्मान मिलेगा। गुस्से का संस्कार न बनाएं। अपनी उर्जा को व्यर्थ न गवाएं। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी को जीवन में स्वच्छता, सादगी और सत्यता को अपनाने का संकल्प दिलाया।
प्रारम्भ में छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संचालक टी.सी. महावर ने गुलदस्ता भेंटकर ब्रह्माकुमारी श्रेया दीदी का स्वागत किया। इस अवसर पर प्रशासन अकादमी के महानिदेशक सुब्रत साहू, सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एम.के. राउत और अशोक अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

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Meditation for World Unity & Trust

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ब्रह्माकुमारीज शान्ति सरोवर में विश्व ध्यान दिवस मनाया गया…
– मन को शान्त रखने के लिए ध्यान जरूरी है… रूप नारायण सिन्हा, अध्यक्ष योग आयोग
– ध्यान से स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है… ब्रह्माकुमारी सविता दीदी
– तनावमुक्त समाज बनाने में मददगार है ध्यान… डॉ. सरिता बाजपेयी, आर्ट ऑफ लीविंग
– जीवन में शान्ति के लिए ध्यान जरूरी… ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी

रायपुर, 21 दिसम्बर, 2025: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर सड्ढू में विश्व ध्यान दिवस मनाया गया। विषय था: विश्व एकता और विश्वास के लिए ध्यान (Meditation for World Unity & Trust)।

समारोह मेें बोलते हुए छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष रूप नारायण सिन्हा ने कहा कि मन को शान्त रखने और अपने आपको व्यवस्थित रखने के लिए ध्यान बहुत ही जरूरी है। जब आप अपने आपको जानने लगते हैं और ध्यानस्थ हो जाते हैं तब एकाग्रता आती है। एकाग्रता के लिए सतत् अभ्यास चाहिए। उन्होंने ब्रह्माकुमारीजऔर शान्ति सरोवर की महिमा  करते हुए कहा कि ऐसी पावन जगह पर आने से मन का भटकाव बन्द हो जाता है। मन पर स्थान का भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। इसीलिए कहा गया है कि जीवन में तपस्वी और ध्यानी लोगों का सम्पर्क जरूरी है। उन्होंने प्रेरक कहानी के माध्यम से अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि साधक के द्वारा साधना करने से साध्य की प्राप्ति होती है।

रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि ध्यान का मुख्य उद्देश्य समाज में सद्भावना उत्पन्न करना है। ध्यान हमें बाहरी दुनिया से जुडऩे की बजाए अपने भीतर झांकने और आत्म विश्लेषण करने का अवसर प्रदान करता है। यह हमारी बुद्घि को तेज और स्मरण शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। उन्होंने राजयोग मेडिटेशन का उल्लेख करते हुए बतलाया कि इससे मन शान्त होता है और एकाग्रता बढ़ती है। यह शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करने, हृदय के स्वास्थ्य में सुधार करने और रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। ध्यान से हम अपनी आन्तरिक शक्तियोंं को जागृत सकते हैं जिससे  न केवल हमारा जीवन स्वस्थ और सन्तुलित बनता हे बल्कि हम शान्तिपूर्ण, संवेदनशील और श्रेष्ठ समाज की स्थापना में योगदान दे सकते हैं।

आर्ट ऑफ लीविंग की डॉ. सरिता बाजपेयी ने कहा कि ध्यान के द्वारा हम तनावमुक्त समाज बना सकते हैं। ध्यान में हम अपने मन के विचारों को रोकने का प्रयास न करें। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। जीवन में आगे बढऩे के लिए स्वीकार भाव बहुत जरूरी है। हम जो हैं और जैसे हैं उसे स्वीकार करें तब ही आनन्द का अनुभव कर सकेंगे। जिस प्रकार शरीर को शक्ति देने के लिए तीन बार भोजन जरूरी है उसी प्रकार मन की शान्ति के लिए दिन में कम से कम दो बार ध्यान अवश्य करें। यह आत्मा का भोजन है। इससे स्ट्रेस बाहर निकलेगा और जीवन में शान्ति खुशी एवं आनन्द की प्राप्ति होगी।

ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी ने कहा कि जीवन में शान्ति के लिए ध्यान जरूरी है। यह ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने मन और विचारों को नियंत्रित करता है। यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है और मन को सशक्त बनाता है। आज की भागदौड़ की जिन्दगी में राजयोग मेडिटेशन एक वरदान की तरह है जो कि हमें तनाव और चिन्ता से मुक्त कर खुशहाल जीवन जीने में मदद करता  है।

कार्यक्रम का सुचारू रूप से संचालन ब्रह्माकुमारी सिमरन दीदी ने किया।

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