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लोगों का सम्मान पाने के लिए विनम्रता जरूरी… ब्रह्माकुमारी भावना दीदी
सादर प्रकाशनार्थ
ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा यू-ट्यूब पर प्रतिदिन प्रसारित वेब सीरिज –
लोगों का सम्मान पाने के लिए विनम्रता जरूरी… ब्रह्माकुमारी भावना दीदी
रायपुर, 30 अगस्त: राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी भावना दीदी ने कहा कि इस संसार में जितनी भी महान आत्माएं हुई हैं उन सबने अपने जीवन में विनम्रता के गुण को धारण किया हुआ था। अगर हम विनम्रता रूपी गुण को धारण कर लें तो सफलता को प्राप्त कर सकते हैं। लोगों का सम्मान अर्जित कर सकते हैं।
ब्रह्माकुमारी भावना दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रायपुर सेवाकेन्द्र द्वारा सोशल मीडिया यू-ट्यूब पर प्रतिदिन शाम को 5.30 से 6.00 बजे प्रसारित होने वाले आनलाईन वेबसीरिज एक नई सोच की ओर में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। विषय था दिल जीतने की कला है विनम्रता। इस वेबसीरिज का प्रसारण शान्ति सरोवर रायपुर के चैनल पर किया जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि विनम्रता एक ऐसा गुण है जो लोगों के दिलों को जीतने में जादू की तरह काम करता है। किसी ने बहुत अच्छी बात कही है कि न हथियार से मिलती है और न अधिकार से मिलती है। लोगों के दिलों में जगह सिर्फ विनम्र व्यवहार से मिलती है। अगर हरेक इन्सान विनम्रता के गुण को धारण कर ले तो जीवन में चाहे कितनी भी समस्याएं आएं वह सभी हल हो सकती हंै। इस एक गुण से दुनिया में जितनी लड़ाइयाँ और टकराव चल रहा है वह सब समाप्त हो सकता है।
ब्रह्माकुमारी भावना दीदी ने कहा कि यदि हम सुखदायी जीवन बनाना चहते हैं तो विनम्रता को अपनाना होगा। थामस अल्वा एडिसन महान वैज्ञानिक थे जिन्होंने बल्ब का आविष्कार करके दुनिया को अंधेरे से निकाला। उनके जीवन की सत्य घटना सुनाते हुए उन्होंने बतलाया कि जब उन्होंने बल्ब का आविष्कार कर लिया तो उसको जलाने की जिम्मेदारी अपने सबसे जूनियर सहयोगी को दिया। गलती से उसके हाथ से छूटकर वह बल्ब टूट गया। सब लोग बहुत नाराज हुए। लेकिन थामस अल्वा एडिसन ने उस जूनियर को कुछ नहीं कहा और फिर से बल्ब बनाने में लग गए। इस बार बल्ब बन जाने पर उन्होंने फिर से उसी जूनियर को बुलाकर बल्ब को जलाने के लिए कहा। इस बार बल्ब जल गया और आविष्कार सफल हो गया। लोगों ने उनसे पूछा कि पहली बार आपके साल भर की मेहनत को खराब करने पर आपने उस जूनियर को डांटा क्यों नहीं तो थामस अल्वा एडीसन ने कहा कि टूटे हुए बल्ब को तो मैं जोड़ सकता हूँ किन्तु अगर उस जूनियर का आत्म विश्वास टूट जाता तो मैं उसे कभी नहीं जोड़ पाता।
ब्रह्माकुमारी भावना दीदी ने बतलाया कि अपने जीवन में विनम्रता को धारण करने के लिए सॉरी और थैंक यू यह दो ऐसे शब्द हैं जिनकी बहुत अधिक जरूरत है। जितना हो सके माफी मांग लीजिए और माफ कर दीजिए। क्षमाभाव रखें और सभी को दिल से धन्यवाद करें।
उन्होंने कहा कि अपने आपको बहुत छोटा समझकर चलें। छोटा बच्चा बन जाएं। हम बच्चे थे तो बुराइयों से बचे हुए थे। जो झुकता है वह आँधियों से भी बच जाता है। इसलिए जीवन में आगे बढऩा है तो झुकना सीखें। साथ ही दूसरों के विचारों को सम्मान दें। कुछ लोग अपने को सर्वश्रेष्ठ समझने की भूल कर बैठते हैं। हम दूसरों के विचारों को सुनेंगे तब ही दूसरे लोग भी हमारी बातों को सुनेंगे।
प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
रायपुर फोन: 0771-2253253, 2254254
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