Connect with us

News

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग महोत्सव का शुभारम्भ

Published

on

1

Photo 2योग मनुष्य को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग… न्यायमूर्ति श्रीवास्तव, प्रमुख लोकायुक्त

रायपुर, १७ जून, २०१८: प्रमुख लोकायुक्त न्यायमूर्ति एस. एन. श्रीवास्तव ने कहा कि योग मानव मात्र को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग है। यह मन बुद्घि और चित्त को स्वस्थ बनाता है। इससे ही सशक्त और मानवतावादी समाज बनाने में मदद मिलेगी।
न्यायमूर्ति श्रीवास्तव आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा विधानसभा रोड स्थित शान्ति सरोवर में आयोजित योग महोत्सव का शुभारम्भ करने के बाद अपने उद्गार व्यक्त कर रहे थे। चर्चा का विषय था – स्वस्थ तन, प्रसन्न मन और सुखी जीवन का आधार राजयोग। उन्होंने आगे कहा कि योग एक संस्कृत शब्द युज धातु से बना है जिसका अर्थ होता है मिलन। समाज के एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से जोडऩे की कला हमें योग से मिलती है। योग चित्त को अच्छे कार्य में प्रवृत्त करता है। ताकि आगे चलकर पश्चाताप न करना पड़े।
उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्थानों के प्रयासों से ही हमारी भारतीय संस्कृति और प्राचीन योग बचा हुआ है। यह संस्थान पूरे विश्व में समर्पित भाव से योग का प्रसार करने में योगदान दे रही है।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी संस्थान की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि राजयोग एक सर्वोत्तम योग पद्घति है। इससे मनुष्य का तन और मन दोनों स्वस्थ और सात्विक बनता है। व्यायाम और योगासन करने से शरीर भले ही पुष्ट और बलवान बन जाए लेकिन मन की आन्तरिक शक्तियों को जागृत करने में पूर्ण सफलता नहीं मिलती। मन को तनावमुक्त और शक्तिशाली बनाने के लिए राजयोग मेडिटेशन अत्यन्त लाभकारी सिद्घ हुआ है।
उन्होंने कहा कि हमारे हर संकल्प से पाजिटिव या निगेटिव एनर्जी उत्पन्न होती है और वो हमारे शरीर में हार्मोन्स पैदा करती है। अस्सी प्रतिशत बीमारियों का मूल कारण नकारात्मक सोच से उत्पन्न उर्जा ही है। राजयोग का अभ्यास करने से हमारे सोच और विचार दोनों पाजिटिव हो जाते हैं। इस प्रकार मनोविकारों के कारण उत्पन्न होने वाले रोगों से बच सकते हैं।
इससे पहले विषय को स्पष्ट करते हुए इन्दौर जोन की मुख्य क्षेत्रीय समन्वयक ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने कहा कि राजयोग में सभी योग समाहित हैं। यह सभी योगों का राजा है। क्योंकि इसके  द्वारा हम कर्मेन्द्रियों के राजा बन जाते हैं। राजयोग के माध्यम से आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है। इस योग से तन और मन दोनों के रोगों को ठीक किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि राजयोग एक जीवन पद्घति है। यह कोई सन्यास मार्ग नहीं है। यह हमें कर्मयोगी बनाता है। जिससे हम हर कार्य परमात्मा की याद में रहकर कर सकते हैं। योग से दूर हो जाने के कारण जीवन में तनाव बढ़ रहा है। जिसके परिणामस्वरूप हमारा शरीर अनेक रोगों का शिकार होता जा रहा है।
प्रेषक: मीडिया प्रभाग,
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय,
रायपुर सम्पर्क मो.: ९६४४९६४६७४

 

Continue Reading