Brahmakumaris Raipur
तपस्वीमूर्त बीके सूरज भाई की क्लास शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर, रायपुर (छ.ग.)
आज मैं एकाग्रता पर बात करूंगा। मन की एकाग्रता से ही सिद्घियाँ मिलती है। पढ़ाई के लिए भी एकाग्रता जरूरी है। बहुत छोटी उम्र में मैने गीता पढ़ी थी। उसमें शब्द था योग दर्शन और सांख्य दर्शन। उसे जानने के लिए मैंने किताबें खरीदी। उस किताब की हिन्दी संस्कृत मिली हुयी हिन्दी होने के कारण मुझे बहुत ही कठिन लगी। ज्यादा कुछ तो समझ में नहीं आया लेकिन एक बात समझ में आ गयी कि जो मनुष्य बत्तीस मिनट तक मन को एकाग्र कर दे उसे मन चाहे सिद्घियाँ मिल जाएंगी। जब समर्पित होकर मधुबन में आए तो उस समय पाण्डव भवन के आसपास कुछ नहीं था। मानो कि पाण्डव भवन जंगल में था। हमें बहुत अच्छा एकान्त का समय मिला तो मैने लक्ष्य बनाया कि मैं अपनी एकाग्रता को बहुत ज्यादा बढ़ाउँ। जो -जो बातें एकाग्रता को बढ़ाने में मदद करती हैं उनका विकास करूँ।
उन्होंने अगले तीन महिनों के लिए रायपुर के भाई -बहनों को पुरूषार्थ बतलाते हुए कहा कि जब मैं जनवरी २०२४ में योगभ_ी कराने के लिए रायपुर आउंगा तब तक आप लोग यह तपस्या करना। यह हमारा ब्रह्माकुमारी संस्था का मार्ग तपस्या और साधनाओं का मार्ग है। तपस्या इसलिए कहते हैं क्योंकि तपस्या माना सरल भाषा में कहँू तो बहुत प्रैक्टिस। तो हम अगर बहुत प्रैक्टिस करते हैं तो हर चीज में आगे बढ़ जाते हैं। प्रैक्टिस ही सब कुछ है। तो हम अपने को तैयार करें कि मुझे बहुत अच्छी साधना करनी है। हम देख रहे हैं कि समय भी समाप्ति की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह बहुत तेजी से विनाश की ओर बढ़ता जा रहा है।
विश्व युद्घ की ओर संसार बढ़ता जा रहा है लेकिन उससे भी भारी होंगे प्राकृतिक प्रकोप, भूकम्प आदि। इनके आगे किसीकी नहीं चलेगी। समय को जानते हुए हम सब अपने से बातें करें। यह सब तरीके हैं एकाग्रता को बढ़ाने की। भगवान से बातें करें। मुझे इस संगम युग पर बाबा से सर्व खजाने ले लेने हैं। यह समय दोबारा नहीं आएगा। भगवान खुले हाथ भाग्य बांट रहा है। मुझे भरपूर भाग्य लेना है। बाकि सब कुछ तो जन्म-जन्म मिलता रहेगा। तीन युगों तक हम भरपूर रहेंगे बाकि चौथा युग भी आधा युग तक हम सम्पन्न रहेंगे। सिर्फ धन की ही बात नहीं है अपितु संसार में जो भी कुछ प्राप्तियाँहोती हैं उसकी कोई कमी जीवन में नहीं रहेगी। किन्तु परमात्म मिलन का सुख जो कि अभी मिलता है मुझे उसमें सम्पन्नता लानी है। यही समय है सुन्दर अनुभवों का। बाकि तो युगों तक परमात्मा को ढूंढते ही रहेंगे। यह चिन्तन हमें अनेक उन व्यर्थ विचारों से मुक्त करेगा जो मन को भटकाती हैं। एक बार आपने नेट पर कोई गलत चीज देख ली बुद्घि भटक गई ख्याल आएगा कि नहीं यह मेरा लक्ष्य नहीं है। मुझे तो बाबा से सब कुछ लेना है। एकाग्रता माना अब एक संकल्प पक्का कर दें कि मुझे एक बाबा से ही सब कुछ लेना है। बाबा ने मुरली में कहा था कि मैं तुम्हें सब कुछ देकर, खाली होकर वतन में जाकर विश्राम करता हूँ। मुरलियों में ऐसी बातें बार-बार नहीं आती हैं। एकाधबार ही बाबा ऐसा कहते हैं। हालांकि बाबा खाली तो कभी होते नहीं। मैं बाबा से बातें करता था कि मैं आपको खाली करूंगा। आप भी बाबा से ऐसी बातें करें।
बाबा को पवित्र महान आत्माएं ही चाहिए जो उनके सर्व खजानों को समा लें। खजाना है ज्ञान का, गुणों और शक्तियों का। जो यहाँ ज्ञान के खजाने से भरपूर रहेंगे। खुद लेंगे और दूसरों को देंगे वह जन्म-जन्म धनवान रहेंगे। जो शक्तियों के खजाने से भरपूर होंगे उनके सिर पर अनेक बार सत्ता का ताज आएगा। जो पवित्रता के खजाने से भरपूर होंगे उनके हर जन्म में धर्म की शक्ति हर जन्म उनके साथ चलेगी। जो समय को सफल करेंगे तो समय हर जन्म में हर कदम पर उन्हें सफलता दिलाएगा। जो संकल्पों का खजाना जमा करेंगे हर जन्म में उनके विचार महान होंगे। उनके विचारों का संसार में सम्मान होगा। जो गुणों के खजाने से भरपूर होंगे हर जन्म में वह गुणवान रहेंगे तो सम्बन्धों का सुख उन्हें मिलेगा। जो संगमयुग पर परमात्म प्यार में मग्न होंते हैं उन्हें जन्म-जन्म सम्बन्धों में प्यार मिलता है। सम्बन्धों का प्यार बहुत बड़ी चीज होती है। आजकल यही सम्बन्ध तो बिगड़ गया हैै। जिन देवियोंं ने अपने साथियों को प्यार नहीं दिया, उनके मन्दिर में पुजारी नहीं होते। वहाँ कोई दीपक जलाने वाला भी नहीं होता। खाली पड़ा रहता है। कभी-कभी कोई जाकर दीप जला आता है। मुझे खजानों से स्वयं को भरपूर करना है।यह पावरफुल संकल्प हमें व्यर्थ संकल्पों से मुक्त करेगा।
जिन बच्चों में पढ़ाई का, अपने भविष्य को सुन्दर बनाने का और कैरियर को चमकाने का लक्ष्य रहता है वह इधर-उधर व्यर्थ की बातों में नहीं लगे रहते हैं। वह मोबाईल आदि गैजेट्स से भी दूर रहते हैं। अच्छा और महान लक्ष्य हमें एक्टिव भी करता है और व्यर्थ विचारों से भी बचाता है। आजकल युवको में मानसिक रोग बहुत बढ़ता जा रहा है। कारण तो बहुत है लेकिन असली कारण है उसके पूर्व जन्मों का खाता। इन्टरनेट आदि उसमें आग में घी का काम करता है। उकाग्रचित्त होना है हमें तो विजुवालाईज करो। आत्मा को देखने का अभ्यास करें। चित्र बनाओ। एक मिनट अभ्यास कर लिया जाए तो अनेक व्यर्थ संकल्प इसमें समाकर समाप्त हो जाएंगे। विजुवालाईज में बहुत बड़ी ताकत है। इसको बढ़ाते-बढ़ाते अशरीरीपन का बहुत अभ्यास करना है। इसी में दूसरा अभ्यास मैं आत्मा परमधाम में हूँ। बैठ जाओ घर में जाकर। एक मिनट। आपको अनुभव होगा परमधाम में कोई संकल्प नहीं होगा। परमधाम में जाकर बैठने से लगेगा अनेक संकल्प आत्मा में समाकर समाप्त हो गए। यह बहुत सुन्दर तरीका है मन की एकाग्रता को बढ़ाने का। व्यर्थ संकल्पों को हटाने का यह अच्छा तरीका है। साथ ही स्वमानों का और पांच स्वरूपों का अभ्यास करें। पांच स्वरूपों में स्वमान भी आ जाएंगे। रोज एक-दो स्वमान ले लें। कर्म में उसका रोज अभ्यास करें। जो लोग कहते हैं कि मेरा योग नहीं लगता, मन भटकता है। वह सब ठीक हो जाएगा। हमारा स्वमान मन की भटकन को समाप्त करता है। रहस्य यह है कि स्वमान एक पावरफुल संकल्प है। आपने संकल्प किया कि मैं पुण्य आत्मा हँू, मैं इष्ट देवी हूँ, मैं पवित्रता की देवी हूँ। यह बहुत बड़े महान संकल्प हैं। एक-एक महान संकल्प से सैंकड़ों व्यर्थ संकल्प समाप्त हो जाते हैं। इसलिए स्वमान पर बहुत ध्यान देना है। आपके घर में वायब्रेशन्स फैलेंगे, आपके घर में सुख-शान्ति होगी।
मैं सभी को होमवर्क देता हूँ अगले ढाई मास के लिए अपने-अपने घरों में सुबह उठकर (भले ही सब सोए हों) उठकर या बैठकर यह संकल्प करें कि मैं पवित्रता की देवी हूँ, मैं परमपवित्र आत्मा हूँ। तीन मिनट यह वायब्रेशन्स फैलाना अपने घर में। बस अपने को इन गुड फीलिंग में, पवित्र संकल्पों में लाना है। यह बात याद कर लो। मुझ आत्मा से पवित्र किरणें, गोल्डन किरणें निकल रही हैं। फील करना कि गोल्डन किरणों से घर भर गया है। पूरे घर में दृष्टि घुमा लो। संकल्पों को रिपीट कर सकते हैं। अगले दिन संकल्प करना कि मैं शिवशक्ति हूँ, मुझसे पूरे घर में लाल किरणें फैल रही हैं। मेरा पूरा घर लाल किरणों से भर गया है। मेरे घर में सभी महान आत्माएं हैं, मेरा घर पुण्य आत्माओं से सजा हुआ है। यह सब देवकुल की पवित्र आत्माएं हैं। यह तीन संकल्प कर देना आपको सात दिन में ही रिजल्ट पता चल जाएगा। आपको बाहर से आने वाले यह बात बतलाएंगे। आपके घरवाले बतलाएंगे।
बाबा को याद करते समय अपने मन में बाबा का चित्र बना लीजिए। बाबा के चित्र पर एकाग्रचित्त होना है हमें। अपनी आँखों के सामने, सामने की दीवार पर, सिर के उपर बाबा को महसूस करिए। फिर परमधाम में चले जाइए। पहले आधा-आधा मिनट करें फिर एक मिनट तक बढ़ाएं। या तो मन को हम संकल्प दें या फिर मन स्वयं संकल्प करेगा। ब्रह्माबाबा को आखिरी तीन-चार सालों में ब्रह्माबाबा को यह बहुत याद रहने लगा था कि जो कुछ इन आँखों से दिखता है वह नहीं रहेगा। मुझे सब कुछ छोड़कर अब वापस घर चलना है।
हमारी रूहानियत, पवित्रता, आध्यात्मिकता, ज्ञान-योग और शुद्घ विचार भारत को महान बनाने में बहुत बड़ा काम कर रहे हैं। हमारे शुद्घ विचार प्रकृति को पावन कर रहे हैं।




