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Brahmakumaris Raipur

तपस्वीमूर्त बीके सूरज भाई की क्लास शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर, रायपुर (छ.ग.)

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आज मैं एकाग्रता पर बात करूंगा। मन की एकाग्रता से ही सिद्घियाँ मिलती है। पढ़ाई के लिए भी एकाग्रता जरूरी है। बहुत छोटी उम्र में मैने गीता पढ़ी थी। उसमें शब्द था योग दर्शन और सांख्य दर्शन। उसे जानने के लिए मैंने किताबें खरीदी। उस किताब की हिन्दी संस्कृत मिली हुयी हिन्दी होने के कारण मुझे बहुत ही कठिन लगी। ज्यादा कुछ तो समझ में नहीं आया लेकिन एक बात समझ में आ गयी कि जो मनुष्य बत्तीस मिनट तक मन को एकाग्र कर दे उसे मन चाहे सिद्घियाँ मिल जाएंगी। जब समर्पित होकर मधुबन में आए तो उस समय पाण्डव भवन के आसपास कुछ नहीं था। मानो कि पाण्डव भवन जंगल में था। हमें बहुत अच्छा एकान्त का समय मिला तो मैने लक्ष्य बनाया कि मैं अपनी एकाग्रता को बहुत ज्यादा बढ़ाउँ। जो -जो बातें एकाग्रता को बढ़ाने में मदद करती हैं उनका विकास करूँ।

उन्होंने अगले तीन महिनों के लिए रायपुर के भाई -बहनों को पुरूषार्थ बतलाते हुए कहा कि जब मैं जनवरी २०२४ में योगभ_ी कराने के लिए रायपुर आउंगा तब तक आप लोग यह तपस्या करना। यह हमारा ब्रह्माकुमारी संस्था का मार्ग तपस्या और साधनाओं का मार्ग है। तपस्या इसलिए कहते हैं क्योंकि तपस्या माना सरल भाषा में कहँू तो बहुत प्रैक्टिस। तो हम अगर बहुत प्रैक्टिस करते हैं तो हर चीज में आगे बढ़ जाते हैं। प्रैक्टिस ही सब कुछ है। तो हम अपने को तैयार करें कि मुझे बहुत अच्छी साधना करनी है। हम देख रहे हैं कि समय भी समाप्ति की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह बहुत तेजी से विनाश की ओर बढ़ता जा रहा है।

विश्व युद्घ की ओर संसार बढ़ता जा रहा है लेकिन उससे भी भारी होंगे प्राकृतिक प्रकोप, भूकम्प आदि। इनके आगे किसीकी नहीं चलेगी। समय को जानते हुए हम सब अपने से बातें करें। यह सब तरीके हैं एकाग्रता को बढ़ाने की। भगवान से बातें करें। मुझे इस संगम युग पर बाबा से सर्व खजाने ले लेने हैं। यह समय दोबारा नहीं आएगा। भगवान खुले हाथ भाग्य बांट रहा है। मुझे भरपूर भाग्य लेना है। बाकि सब कुछ तो जन्म-जन्म मिलता रहेगा। तीन युगों तक हम भरपूर रहेंगे बाकि चौथा युग भी आधा युग तक हम सम्पन्न रहेंगे। सिर्फ धन की ही बात नहीं है अपितु संसार में जो भी कुछ प्राप्तियाँहोती हैं उसकी कोई कमी जीवन में नहीं रहेगी। किन्तु परमात्म मिलन का सुख जो कि अभी मिलता है मुझे उसमें सम्पन्नता लानी है। यही समय है सुन्दर अनुभवों का। बाकि तो युगों तक परमात्मा को ढूंढते ही रहेंगे। यह चिन्तन हमें अनेक उन व्यर्थ विचारों से मुक्त करेगा जो मन को भटकाती हैं। एक बार आपने नेट पर कोई गलत चीज देख ली बुद्घि भटक गई ख्याल आएगा कि नहीं यह मेरा लक्ष्य नहीं है। मुझे तो बाबा से सब कुछ लेना है। एकाग्रता माना अब एक संकल्प पक्का कर दें कि मुझे एक बाबा से ही सब कुछ लेना है। बाबा ने मुरली में कहा था कि मैं तुम्हें सब कुछ देकर, खाली होकर वतन में जाकर विश्राम करता हूँ। मुरलियों में ऐसी बातें बार-बार नहीं आती हैं। एकाधबार ही बाबा ऐसा कहते हैं। हालांकि बाबा खाली तो कभी होते नहीं। मैं बाबा से बातें करता था कि मैं आपको खाली करूंगा। आप भी बाबा से ऐसी बातें करें।

बाबा को पवित्र महान आत्माएं ही चाहिए जो उनके सर्व खजानों को समा लें। खजाना है ज्ञान का, गुणों और शक्तियों का। जो यहाँ ज्ञान के खजाने से भरपूर रहेंगे। खुद लेंगे और दूसरों को देंगे वह जन्म-जन्म धनवान रहेंगे। जो शक्तियों के खजाने से भरपूर होंगे उनके सिर पर अनेक बार सत्ता का ताज आएगा। जो पवित्रता के खजाने से भरपूर होंगे उनके हर जन्म में धर्म की शक्ति हर जन्म उनके साथ चलेगी। जो समय को सफल करेंगे तो समय हर जन्म में हर कदम पर उन्हें सफलता दिलाएगा। जो संकल्पों का खजाना जमा करेंगे हर जन्म में उनके विचार महान होंगे। उनके विचारों का संसार में सम्मान होगा। जो गुणों के खजाने से भरपूर होंगे हर जन्म में वह गुणवान रहेंगे तो सम्बन्धों का सुख उन्हें मिलेगा। जो संगमयुग पर परमात्म प्यार में मग्न होंते हैं उन्हें जन्म-जन्म सम्बन्धों में प्यार मिलता है। सम्बन्धों का प्यार बहुत बड़ी चीज होती है। आजकल यही सम्बन्ध तो बिगड़ गया हैै। जिन देवियोंं ने अपने साथियों को प्यार नहीं दिया, उनके मन्दिर में पुजारी नहीं होते। वहाँ कोई दीपक जलाने वाला भी नहीं होता। खाली पड़ा रहता है। कभी-कभी कोई जाकर दीप जला आता है। मुझे खजानों से स्वयं को भरपूर करना है।यह पावरफुल संकल्प हमें व्यर्थ संकल्पों से मुक्त करेगा।

जिन बच्चों में पढ़ाई का, अपने भविष्य को सुन्दर बनाने का और कैरियर को चमकाने का लक्ष्य रहता है वह इधर-उधर व्यर्थ की बातों में नहीं लगे रहते हैं। वह मोबाईल आदि गैजेट्स से भी दूर रहते हैं। अच्छा और महान लक्ष्य हमें एक्टिव भी करता है और व्यर्थ विचारों से भी बचाता है। आजकल युवको में मानसिक रोग बहुत बढ़ता जा रहा है। कारण तो बहुत है लेकिन असली कारण है उसके पूर्व जन्मों का खाता। इन्टरनेट आदि उसमें आग में घी का काम करता है। उकाग्रचित्त होना है हमें तो विजुवालाईज करो। आत्मा को देखने का अभ्यास करें। चित्र बनाओ। एक मिनट अभ्यास कर लिया जाए तो अनेक व्यर्थ संकल्प इसमें समाकर समाप्त हो जाएंगे। विजुवालाईज में बहुत बड़ी ताकत है। इसको बढ़ाते-बढ़ाते अशरीरीपन का बहुत अभ्यास करना है। इसी में दूसरा अभ्यास मैं आत्मा परमधाम में हूँ। बैठ जाओ घर में जाकर। एक मिनट। आपको अनुभव होगा परमधाम में कोई संकल्प नहीं होगा। परमधाम में जाकर बैठने से लगेगा अनेक संकल्प आत्मा में समाकर समाप्त हो गए। यह बहुत सुन्दर तरीका है मन की एकाग्रता को बढ़ाने का। व्यर्थ संकल्पों को हटाने का यह अच्छा तरीका है। साथ ही स्वमानों का और पांच स्वरूपों का अभ्यास करें। पांच स्वरूपों में स्वमान भी आ जाएंगे। रोज एक-दो स्वमान ले लें। कर्म में उसका रोज अभ्यास करें। जो लोग कहते हैं कि मेरा योग नहीं लगता, मन भटकता है। वह सब ठीक हो जाएगा। हमारा स्वमान मन की भटकन को समाप्त करता है। रहस्य यह है कि स्वमान एक पावरफुल संकल्प है। आपने संकल्प किया कि मैं पुण्य आत्मा हँू, मैं इष्ट देवी हूँ, मैं पवित्रता की देवी हूँ। यह बहुत बड़े महान संकल्प हैं। एक-एक महान संकल्प से सैंकड़ों व्यर्थ संकल्प समाप्त हो जाते हैं। इसलिए स्वमान पर बहुत ध्यान देना है। आपके घर में वायब्रेशन्स फैलेंगे, आपके घर में सुख-शान्ति होगी।

मैं सभी को होमवर्क देता हूँ अगले ढाई मास के लिए अपने-अपने घरों में सुबह उठकर (भले ही सब सोए हों) उठकर या बैठकर यह संकल्प करें कि मैं पवित्रता की देवी हूँ, मैं परमपवित्र आत्मा हूँ। तीन मिनट यह वायब्रेशन्स फैलाना अपने घर में। बस अपने को इन गुड फीलिंग में, पवित्र संकल्पों में लाना है। यह बात याद कर लो। मुझ आत्मा से पवित्र किरणें, गोल्डन किरणें निकल रही हैं। फील करना कि गोल्डन किरणों से घर भर गया है। पूरे घर में दृष्टि घुमा लो। संकल्पों को रिपीट कर सकते हैं। अगले दिन संकल्प करना कि मैं शिवशक्ति हूँ, मुझसे पूरे घर में लाल किरणें फैल रही हैं। मेरा पूरा घर लाल किरणों से भर गया है। मेरे घर में सभी महान आत्माएं हैं, मेरा घर पुण्य आत्माओं से सजा हुआ है। यह सब देवकुल की पवित्र आत्माएं हैं। यह तीन संकल्प कर देना आपको सात दिन में ही रिजल्ट पता चल जाएगा। आपको बाहर से आने वाले यह बात बतलाएंगे। आपके घरवाले बतलाएंगे।

बाबा को याद करते समय अपने मन में बाबा का चित्र बना लीजिए। बाबा के चित्र पर एकाग्रचित्त होना है हमें। अपनी आँखों के सामने, सामने की दीवार पर, सिर के उपर बाबा को महसूस करिए। फिर परमधाम में चले जाइए। पहले आधा-आधा मिनट करें फिर एक मिनट तक बढ़ाएं। या तो मन को हम संकल्प दें या फिर मन स्वयं संकल्प करेगा। ब्रह्माबाबा को आखिरी तीन-चार सालों में ब्रह्माबाबा को यह बहुत याद रहने लगा था कि जो कुछ इन आँखों से दिखता है वह नहीं रहेगा। मुझे सब कुछ छोड़कर अब वापस घर चलना है।

हमारी रूहानियत, पवित्रता, आध्यात्मिकता, ज्ञान-योग और शुद्घ विचार भारत को महान बनाने में बहुत बड़ा काम कर रहे हैं। हमारे शुद्घ विचार प्रकृति को पावन कर रहे हैं।

 

 

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सुहाना सफर-एन एडवेन्चर इन टू अवेयरनेस

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जीवन की राह को आसान बनाने की अनूठी पहल…
– ब्रह्माकुमारीज के यातायात एवं यात्री प्रभाग का आयोजन…
– यात्री कृपया ध्यान दें – के अन्तर्गत सुहाना सफर कार्यक्रम हुआ…
– जीवन के सफर में हमारी मुस्कान ही हमारी असली पहचान… ब्रह्माकुमारी कविता दीदी

रायपुर, छत्तीसगढ़: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के यातायात एवं यात्रा प्रभाग द्वारा जीवन की यात्रा को आसान, आनन्दमय और सफल बनाने के लिए यात्री कृपया ध्यान दें -कार्यक्रम का आयोजन किया गया। चर्चा का विषय था सुहाना सफर-एन एडवेन्चर इन टू अवेयरनेस। इस कार्यक्रम के माध्यम से भौतिक यात्रा और जीवन यात्रा के बीच समानताएं दर्शाते हुए प्रतिभागियों को आन्तरिक शान्ति और खुशी का मार्ग बतलाया गया।

समारोह में मुम्बई से पधारी यातायात प्रभाग की नेशनल कोआर्डीनेटर ब्रह्माकुमारी कविता दीदी, विधायक पुरन्दर मिश्रा, पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला, एडीआरएम बजरंग अग्रवाल, सीनियर डीसीएम अवधेश कुमार त्रिवेदी, ब्रह्माकुमारी सविता दीदी और ब्रह्माकुमार सुवास भाई ने हिस्सा लिया।

यातायात प्रभाग की नेशनल कोऑर्डीनेटर ब्रह्माकुमारी कविता दीदी ने सभी को जीवन में होने वाले बदलाव को स्वीकार करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जिस प्रकार एक यात्री अपनी यात्रा के दौरान टिकट, पहचान पत्र और दवाईयाँआदि लेकर चलता है उसी प्रकार जीवन के सफर में हमारी मुस्कान ही हमारी असली पहचान है और लोगों से मिलने वाली दुआएं ही दवा का काम करती हैं। इस रोमांचक यात्रा में उन्होंने विभिन्न स्टेशन के माध्यम से मानवीय मूल्यों और जीवन दर्शन की शिक्षा भी दी।

आधुनिक चुनौतियों की चर्चा करते हुए उन्होंने पर्यावरण के प्रति जागरूकता और अपने कर्मों के प्रति सजगता बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने नो नेटवर्क जोन के माध्यम से डिजिटल दुनिया की बजाए वास्तविक सम्बन्धों और राजयोग मेडिटेशन को अपनाने पर जोर दिया। अन्त में प्रतिभागियों को राजयोग के अभ्यास द्वारा स्वयं को परमात्मा से जोडऩे का अनुभव कराया गया ताकि उनका हर पल सुहाना बन सके।

विधायक पुरन्दर मिश्रा ने कहा कि यातायात की समस्या एक जटिल समस्या है। इसे हल करने के लिए सबको संगठित रूप से प्रयास करने की जरूरत है। हमें देशहित और राज्य के हित में एकजुट होकर काम करना होगा इसी में हमारा स्वयं का हित भी निहित है। इसमें जनजागरण की प्रमुख भूमिका हो सकती है।

पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने कहा कि यातायात एक ऐसा प्रभाग है जो कि हम सबके जीवन से जुड़ा हुआ है। हम अक्सर यह सुनते आए हैं कि जितना कम सामान होगा उतना सफर आसान होगा। प्रकृति का स्वभाव है देना। वह हमें हवा, पानी प्रदान करती है। हमारा शरीर पांच तत्वों से बना है इसलिए हमारा स्वभाव भी देने का होना चाहिए। जीवन में कुछ पाना चाहते हैं तो दूसरों को देना सीखें।

अपर मण्डल प्रबन्धक (एडीआरएम) बजरंग अग्रवाल ने कहा कि हमारा जीवन सरल होना चाहिए जटिल नहीं। सरलता से जीवन में खुशी मिलती है। जीवन में जो कुछ मिला है उस पर सन्तोष रखें। ईश्वर का और प्रकृति का धन्यवाद करें।

वरिष्ठ वाणिज्य प्रबन्धक (सीनियर डीसीएम) अवधेश कुमार त्रिवेदी ने कहा कि जीवन और रेलगाड़ी में काफी समानताएं हैं। हमें पता नहीं है कि जीवन का लक्ष्य क्या है? सब भाग रहे हैं। लेकिन कहीं तो रूकना पड़ेगा। हमेेें ठहरकर जीवन की सार्थकता पर चिन्तन करना होगा।

प्रारम्भ में रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज के बाल कलाकारों द्वारा मनमोहक स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में यातायात प्रभाग से जुड़े लोग एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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सुरक्षा सेवा प्रभाग

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सादर प्रकाशनार्थ
– स्व सशक्तिकरण से राष्ट्र का सशक्तिकरण अभियान का शुभारम्भ हुआ…
– सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने व तनाव मुक्ति हेतु ब्रह्माकुमारीज का प्रयास…
– प्रत्येक कार्य को कर्तव्य समझकर पूरी निष्ठा और तन्मयता के साथ करें… अरूण देव गौतम
– अगले क्षण क्या हो जाए निश्चित नहीं, इसलिए इस क्षण को खुशी से जीयें…ई.वी. स्वामीनाथन
नवा रायपुर 07 जून, 2026: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के अनुषांगिक संगठन राजयोगा एजुकेशन एण्ड रिसर्च फाउण्डेशन के सुरक्षा प्रभाग द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में सुरक्षा बलों के मनोबल में वृद्घि करने तथा तनाव मुक्ति हेतु आयोजित विशेष अभियान का शुभारम्भ नवा रायपुर के सेक्टर-20 स्थित शान्ति शिखर में किया गया।
कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, सीआईएसएफ के कमाण्डेन्ट मनिन्दर सिंह, बीएसएफ के कमाण्डेन्ट एस.आर. खान सहित बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों के अधिकारी और जवान उपस्थित थे। विषय था: स्व-सशक्तिकरण से राष्ट्र का सशक्तिकरण (Self Empowerment to Nation Empowerment)।
पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम ने कहा कि मन में जब द्वन्द छिड़ा हो तो उसका समाधान गीता के माध्यम से प्राप्त होता है। मन बड़ा बलवान होता है। इसे बहुत अच्छी तरह से गीता में समझाया गया है। जिस दिन अपने मन को समझ जाएंगे उस दिन बहुत सारी दुविधाओं से मुक्त हो जाएंगे। कभी गुस्सा नहीं आए मन शान्त रहे यह बहुत बड़ी साधना है। प्रत्येक कार्य को कर्तव्य समझकर करें तो मन विचलित नहीं होगा। किसी से दुश्मनी निकालते हैं या मार देते हैं तो मन में पश्चाताप होता है किन्तु देशहित में दुश्मन को कर्तव्य समझकर करेंगे तो मन में पश्चाताप नहीं होगा। अपने कार्य को पूरी निष्ठा और तन्मयता के साथ करें।
उन्होंने योग और निद्रा की चर्चा करते हुए बतलाया कि योग में बुद्घि को जागृत रखें, सजग होकर कर्म करें और अपनी चेतना को बरकरार रखें तो आप जिन्दगी में कभी निराश नहीं होंगे कभी तनाव में नहीं आएंगे।
लाईफ कोच एवं ट्रेनर ई.वी. स्वामीनाथन ने कहा कि देश की रक्षा हम तब कर सकेंगे जब हम स्वयं सुरक्षित रहें और स्वयं की रक्षा के लिए शरीर और मन का स्वस्थ होना जरूरी है। अगर हमने अपने मन का ध्यान नहीं रखा तो कुछ समय बाद हृदयरोग और बाईपास की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए स्वस्थ जीवन शैली का अपनाना होगा ताकि मन के साथ-साथ शरीर भी स्वस्थ रहे। स्वास्थ्य के लिए व्यायाम बहुत महत्वपूर्ण है। जब से हम लोग योग दिवस मनाने लगे हैं तब से लोग ज्यादा हेल्थ कान्सियस हो गए हैं। सुबह-सुबह लोग पैदल चलते हैं लेकिन किस मानसिक अवस्था में वाकिंग कर रहे हैं वह बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। उस समय खुशी से अच्छे विचारों में रमण करते हुए वाकिंग करें।
उन्होंने कहा कि जब आप ड्यूटी पूरी करके घर जाते हैं तो आफिस के तनाव को घर लेकर न जाएं।  उन्होंने हर कार्य को बहुत खुशी से करने की सलाह देते हुए कहा कि हमारे जीवन में अगले क्षण क्या हो जाए कुछ भी निश्चित नहीं है इसलिए इस क्षण को खुशी के साथ वाह-वाह करके जीना सीखो।
क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने कहा कि स्वसशक्तिकरण के लिए स्व की पहचान जरूरी है। प्रेम, सुख, शान्ति आदि आत्मा के मूल गुण है। जब हम धैर्यपूर्वक बहुत सोच-समझकर कोई कार्य करते हैं तब सफलता मिलती है।
सुरक्षा सेवा प्रभाग की गतिविधियों की जानकारी देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के ज्वाइन्ट डायरेक्टर कैप्टन शिव सिंह ने सुरक्षा सेवा प्रभाग की सेवाओं की जानकारी देते हुए बतलाया कि यह विंग २००१ में बना और इसकी प्रेरणा स्वयं फौज के अधिकारी ने दी। आज यह विंग समय-समय पर अभियान के द्वारा कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक अपनी सेवाएं दे रहा है।
प्रारम्भ में रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। ब्रह्माकुमारी आशा दीदी ने आभार प्रदर्शन किया। सभा का कुशल संचालन सेवानिवृत्त कर्नल बी. सी. सती ने किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में बच्चों ने नृत्य नाटिका के द्वारा सैनिको के शौर्य और बलिदान को प्रदर्शित किया।
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समर कैम्प का समापन.

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ब्रह्माकुमारीज समर कैम्प –
रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ समर कैम्प का समापन…
– माता पिता की सीख जीवनभर हमारा मार्गदर्शन करती हैं…न्यायमूर्ति गौतम चौरडिय़ा
– बच्चों के चारित्रिक विकास में ब्रह्माकुमारीज का समर कैम्प मददगार… उज्जवल पोरवाल, अपर कलेक्टर
– बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आध्यात्मिक शिक्षा जरूरी..ब्रह्माकुमारी सविता दीदी
रायपुर, 11 मई 2026: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित प्रेरणा समर कैम्प का समापन रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ सम्पन्न हुआ। शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर मे आयोजित समापन समारोह में छ.ग. राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरडिय़ा,छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष विनोद अरोरा, अपर कलेक्टर उज्जवल पोरवाल, रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी, ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी और ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी ने विचार व्यक्त किए।
छ.ग. राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरडिय़ा ने समर कैम्प आयोजित करने के लिए ब्रह्माकुमारी संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि कोई एक दिन में महान नहीं बनता है। जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है। कभी कोई बच्चा फेल हो जाए तो पैरेन्ट्स नाराज न हों। बच्चे को मारे-पीटे नहीं बल्कि उसे प्यार से शिक्षा का महत्व समझाएं। मदर्स डे पर माँ को याद करते हुए उन्होंने बतलाया कि उनकी माँ ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी। गांव से आयी थी फिर भी बड़ी विनयवान, विद्वान और समझदार थी। उनकी माता जी के द्वारा दी गई मानवीय मूल्यों की शिक्षा आज भी उनका मार्गदर्शन करती है।
उन्होंने कहा कि बच्चे बहुत कोमल होते हैं उन्हें प्यार से शिक्षा और सावधानी देकर सम्भालिए। बच्चों को भयमुक्त बनाइए ताकि वह अपने मन की बात पैरेन्ट्स के साथ कर सकें। वह स्वयं भी कभी परीक्षा में असफल रहे किन्तु बाद में माँ की प्रेरणा से प्रावीण्य सूची में उत्तीर्ण हुए। वह आज जो कुछ भी हैं वह अपनी माँकी बदौलत ही हैं।
अपर कलेक्टर उज्जवल पोरवाल ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस समर कैम्प की विशेषता यह रही कि यहाँ पर बच्चों के व्यक्तित्व के हर पहलू पर ध्यान दिया गया। इसी का सबूत है कि आज सबने बहुत ही सुन्दर कल्चरल कार्यक्रम प्रस्तुत किया। उन्होंने आग्रह किया कि इसकी अवधि दस दिनों से बढ़ाकर पन्द्रह दिनों का कर देना चाहिए। वर्तमान समय पूरे विश्व में युद्घ का माहौल है। दुनिया में उथल-पथल मची हुई है। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है कि ऐसे समय पर बच्चों ने मेडिटेशन द्वारा शान्ति का अनुभव किया। बच्चों को राजयोग मेडिटेशन सिखलाया गया जिससे उनकी एकाग्रता बढ़ी है।
छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष विनोद अरोरा ने बच्चों के द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि इससे बच्चों में रचनात्मकता की झलक दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि जीवन में थोड़ा स्ट्रेस जरूरी है। इसके बिना जीवन में तरक्की नहीं कर सकते। तनाव को कम करने की कला सीखने की जरूरत है। बच्चों को असफलता से  परेशान होने की जरूरत नहीं है। यह आपको अनुभवी बनाने के लिए आता है। उन्होंने पैरेन्ट्स को सुझाव देते हुए कहा कि घर में मोबाईल में ही नही लगे रहें बच्चों के लिए भी समय निकालें।
रायपुर केन्द्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि माता-पिता और बच्चों के बीच प्रेम, सम्मान और समझ हो तो घर स्वर्ग जैसा हो जाता है। बच्चों के लिए पहली पाठशाला घर ही होता है। उन्होंने बतलाया कि राजयोग से बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है। बच्चों के साथ ही बड़ों के लिए भी राजयोग मेडिटेशन जरूरी है। इससे एकाग्रता बढ़ती है और मन को शान्ति मिलती है।
कार्यक्रम की शुरूआत में ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी ने मूल वक्तव्य दिया। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने किया। समर कैम्प में विजयी बच्चों को पुरस्कार व प्रमाण पत्र भी दिया गया।
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