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चुनौतियों को अवसर में बदल कर उपलब्धियाँ हासिल करने का समय… – रमेश पोखरियाल
प्रेस विज्ञप्ति
चुनौतियों को अवसर में बदल कर उपलब्धियाँ हासिल करने का समय…
– रमेश पोखरियाल निशंक, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री
रायपुर, 05 सितम्बर: केन्द्रीय शिक्षामंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि आज पूरा विश्व दुख और संकट से होकर गुजर रहा है। इस संकट की घड़ी में चुनौतियों को अवसर में बदलकर हम उपलब्धियाँ हासिल कर सकते हैं। जब चुनौतियों का मजबूती के साथ सामना किया जाता है और नया सृजन करते हैं तो चुनौती अवसर में बदल जाती है। इस समय कोरोना काल में जरूरत इस बात की है कि व्यक्ति अपने मनोबल को उँचा करके रखे और एक दो का सहयोग करे।
श्री निशंक आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के शिक्षाविद सेवा प्रभाग द्वारा शिक्षक दिवस पर आयोजित वेबीनार में बोल रहे थे। विषय था- नये युग के लिए नई शिक्षा। इस ऑनलाईन वेबीनार का प्रसारण यू्-ट्यूब के शान्ति सरोवर चैनल पर किया गया।
उन्होंने कहा कि मानव संसाधन मंत्रालय के लिए यह अवसर उपलब्धि बनकर आया है। हम आनलाईन शिक्षा को बच्चे बच्चे तक पहुंचा रहे हैं। ब्रह्माकुमारी संस्थान का भी प्रयास है कि नये सृजन के साथ नये सुखद युग की शुरूआत हो। इस संस्थान ने शिक्षा के द्वारा नये युग का निर्माण करने की बात कही है। शिक्षा किसी भी परिवार अथवा समाज की धूरी होती है। तक्षशिला और नालन्दा जैसे संस्थान इस देश में रही हैं। सारी दुनिया के लोग शिक्षा ग्रहण करने के लिए यहाँ आते थे।
उन्होंने कहा कि हमें सबके कल्याण की भावना वाली शिक्षा चाहिए। ज्ञान, विज्ञान और अनुसंधान वाली शिक्षा चाहिए। हर क्षेत्र में शिखर तक पहुंचाने वाली शिक्षा चाहिए। वह शिक्षा चाहिए जो अन्धकार को मिटाकर प्रकाश की ओर ले जाए। वह शिक्षा जो संस्कार दे, विचार दे, वह शिक्षा जो मानव को मानव बनाने के महाअभियान में महत्वपूर्ण योगदान दे। ऐसी शिक्षा हमें चाहिए। अभी हम नई शिक्षा नीति लेकर आ रहे हैं जो समग्र भारत को श्रेष्ठ भारत बनाने में योगदान कर सके।
छत्तीसगढ़ के शिक्षामंत्री डॉ. प्रेम साय सिंह ने कहा कि देश में बड़े-बड़े स्कूल खुल गए हैं लेकिन वह लोग सिर्फ धन कमाने के लिए कार्य कर रहे हैं। फीस भी उनकी उँची होती है। दु:ख की बात है कि पालक भी उन स्कूलों की ओर आकर्षित हो जाते हैं। हमारी सरकार का प्रयास है कि पालकों का शोषण न हो। स्कूलों में शिक्षा सिर्फ नौकरी पाने के लिए न हो अपितु पढ़ाई के साथ नैतिक मूल्यों की भी शिक्षा देने की जरूरत है। शिक्षा के जरिए अच्छे और चरित्रवान नागरिक बनाने का प्रयास हो। हमारी शिक्षा आत्म विश्वास बढ़ाने वाली हो। उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि यह संस्थान लोगों को नैतिक मूल्यों की शिक्षा देकर बहुत अच्छा कार्य कर रहा है। ऐसे ही प्रयासों से बेहतर समाज बन सकेगा।
उन्होंने कोरोना काल में स्कूलों के बन्द होने पर भी अपने प्राणों की परवाह न करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को नमन करते हुए कहा कि ऐसे महामारी के समय भी वह लोग अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे हैं। बच्चों को शिक्षा के साथ कोरोना से बचने के उपायों की भी जानकारी दी जाए तो हम इस महामारी को देश से निकालने में सफल हो सकेंगे।
ब्रह्माकुमारी संस्थान के कार्यकारी सचिव एवं शिक्षाविद सेवा प्रभाग के अध्यक्ष ब्रह्माकुमार मृत्युजंय भाई ने कहा कि नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से सम्पन्न समाज बनाने में शिक्षकों की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण होती है। वर्तमान समय शिक्षा के क्षेत्र में अनेक कुरीति आ गई है। शिक्षा एक व्यापार बन गया है। वास्तव में शिक्षा मनुष्य को सुसंस्कारित करने और उसके जीवन को श्रेष्ठ बनाने की विधि है। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था आध्यात्मिक शिक्षा देकर मनुष्यों को दैवीगुणों से सम्पन्न बनाने का कार्य कर रही है। परमात्मा खुद शिक्षक बनकर हम आत्माओं को मनुष्य से देवात्मा बनने का तरीका सीखा रहे हैं। कोई भी व्यक्ति यहाँ की शिक्षाओं को अपनाकर जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है।
पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. केसरी लाल वर्मा ने कहा कि पूरा विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। रोजगार और वैश्विक परिस्थितियों में तीव्र गति से परिवर्तन आ रहा है। ऐसे समय पर जरूरत है कि शिक्षा को भी नये युग के अनुकूल तैयार करें। समय के साथ ज्ञान का अद्यतन होना और युगीन आवश्यकताओं के अनुरूप अपने को ढालना जरूरी है। भारत में प्राचीन और सनातन ज्ञान और विचार की परम्परा रही है। उसके आलोक में शिक्षा दी जाए और आधुनिक ज्ञान विज्ञान की भी शिक्षा दी जाए। देश में बहुत बड़ी संख्या उन युवाओं की हैं जो कि उच्च शिक्षा से वंचित हैं। यदि हम समाज और राष्ट्र को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो उन युवाओं को आगे लाना होगा ताकि वह उच्च शिक्षा प्राप्त कर कर सकें। हमारी शिक्षा स्व रोजगार देने वाली हो। ऐसी शिक्षा हो जो नैतिक और मानवीय गुण से सम्पन्न अच्छे नागरिक तैयार कर सकें। शिक्षा में नवाचार की जरूरत है।
वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी शीलू दीदी ने कहा कि वर्तमान शिक्षाप्रणाली में बहुत सुधार की जरूरत है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए कि वह हमें व्यसनों मुक्ति दिलाए। हमें कष्टों और दुर्गुणों से छुटकारा दिलाए एवं भाई-चारा और सद्गुणों की शिक्षा दे। सिर्फ अक्षर ज्ञान देकर बच्चों का उत्थान नहीं कर सकते हैं। शिक्षकों का जीवन भी प्रेरणादायक होना चाहिए। जीवन में बदलाव आध्यात्मिकता को अपनाने से आएगी। बच्चों को भी बचपन से ही आध्यात्मिक शिक्षा देने की जरूरत है।
ब्रह्माकुमारी संस्थान की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी ने कहा कि जीवन में शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान है। शिक्षा ने देश को अच्छे इन्जीनियर, डॉक्टर और वकील दिए हैं लेकिन वर्तमान शिक्षा ने अच्छे इन्सान नहीं बनाए। इस समय समाज में नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की गिरावट चिन्तनीय है। बच्चों को आज आध्यात्मिक शिक्षा की बहुत अधिक जरूरत है। आध्यात्मिकता मनुष्य को सशक्त बनाती है।
इस अवसर पर रायपुर के स्थानीय गायक स्वप्निल कुशतर्पण एवं कु. शारदा नाथ ने सुमधुर गीत प्रस्तुत कर भावविभोर कर दिया। बाद में कु. परिणीता और कु. पद्मिनी ने सुन्दर नृत्य प्रस्तुत कर मनोरंजन किया। वेबीनार का कुशल संचालन ब्रह्माकुमारी श्वेता दीदी ने किया।
प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
रायपुर फोन: 0771-2253253, 2254254
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रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने आज अन्तर्राष्ट्रीय कथावाचक पडित प्रदीप मिश्रा से मुलाकात की
रायपुर, (छ.ग.) 29 मई 2024: रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने आज अन्तर्राष्ट्रीय कथावाचक पण्डित प्रदीप मिश्रा से मुलाकात कर उन्हें शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर में पधारने और यादगार स्वरूप वृक्षारोपण करने तथा ब्रह्माभोजन स्वीकार करने के लिए आमंत्रित किया। ब्रह्माकुमारी सविता दीदी के साथ बीके रश्मि और बीके भावना दीदी भी थीं।
विदित हो कि राजधानी रायपुर के निकट अम्लेश्वर में अन्तर्राष्ट्रीय कथावाचक पण्डित प्रदीप मिश्रा शिव पुराण कथा सुना रहे हैं जिसमें दूर-दूर से हजारों की संख्या में लोग बड़ी श्रद्घा से कथा श्रवण के लिए आते हैं। आयोजक बीके महेश भाई के परिचित थे। इसलिए आयोजकों ने बहनों को कार्यक्रम में पधारने के लिए पास भेजा था। कथा के अन्त में आरती के समय आयोजकों ने एनाउन्स करके बीके सविता दीदी को मंच पर बुलाया और पण्डित जी से मिलवाया।
बीके सविता दीदी ने उन्हें गुलदस्ता और शाल/श्रीफल भेंटकर स्वागत किया। बाद में उन्हें छत्तीयगढ़ की सेवाओं से अवगत कराते हुए शान्ति सरोवर में पधारने और ब्रह्माभोजन स्वीकार करने का आग्रह किया।
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अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस
- Kiranmayee Nayak
बेटों को महिलाओं की इज्जत करना सिखलाना होगा… श्रीमती डॉ. किरणमयी नायक
– महिलाओं की खुशहाली के लिए लैंगिक समानता जरूरी…श्रीमती डॉ. किरणमयी नायक
– अध्यात्म से दूर होने से महिलाओं में सद्गुणों की कमी… ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी
– अध्यात्म से दूर होने के कारण परिवारों में बिखराव … ब्रह्माकुमारी सविता दीदी
रायपुर, 05 मार्च 2024: अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के महिला प्रभाग द्वारा विधानसभा मार्ग स्थित शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर में महिला जागृति आध्यात्मिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। विषय था- महिला सशक्तिकरण के लिए सकारात्मक परिवर्तन ।
समारोह में बोलते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती डॉ. किरणमयी नायक ने कहा कि बेटा और बेटी में भेद करके बेटियों को कमजोर बनाने की सदियों से चली आ रही परम्परा को बन्द करें। इस बदलाव की शुरूआत अपने घर से करनी होगी। जब तक यह भेदभाव करना खत्म नहीं करेंगे महिलाएं खुशहाल नहीं बन सकती है। आज जरूरत है कि हम बेटियों को दुर्गा के रूप में संस्कारित करें। बेटों को बेटियों की तरह और बेटियों को बेटों की तरह पालना शुरू करें। बेटों को महिलाओं की इज्जत करना सीखलाएं। जब घर में वह महिलाओं की इज्जत करना सीखेंगे तब वह बाहर जाकर महिलाओं का सम्मान करेंगे।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के बिना संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। फिर भी भारतीय समाज में महिलाओं को दूसरा दर्जा दिया जाता है इसके लिए महिलाएं स्वयं ही दोषी हैं। हम यह न सोचें कि बेटों से वंश आगे चलेगा क्योंकि यदि बहु ही नहीं होगी तो सृष्टि में उत्पत्ति कैसे होगी? घर में बेटी पैदा होने पर बहु को तंग न करें। हम बदलेंगे तो जग बदलेगा।
ब्रह्माकुमारी संस्थान की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने कहा कि नारी परिवार की धूरी है। वह घर को स्वर्ग बनाने वाली और बच्चों को सुसंस्कारित करने वाली है। आदिकाल से नारी पूज्यनीय और वन्दनीय रही है। आजकल वह भले ही आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से सशक्त हुयी है किन्तु अध्यात्म से दूर होने के कारण उसके अन्दर सहनशीलता, नम्रता और मधुरता जैसे सद्गुणों की कमी हो गयी है। आध्यात्मिकता को अपनाने से हमें समस्याओं का सामना करने की शक्ति मिलती है। राजयोग के अभ्यास से आत्मा का सम्बन्ध परमात्मा से जोड़कर उनसे शक्तियाँ प्राप्त कर महिला फिर शिवशक्ति बन सकती है।
जिला पंचायत रायपुर की अध्यक्ष श्रीमती डोमेश्वरी वर्मा ने कहा कि महिला ईंट और गारे के मकान को घर बनाती है। बच्चों को शिक्षित और संस्कारित कर वह घर, परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में सहयोग करती है। शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी है। माताओं पर यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। शिक्षा बच्चों को कुमार्ग पर गिरने नहीं देगा और संस्कार उसे डूबने नहीं देगा।
पं. जवाहर लाल नेहरू स्मृति मेडिकल कॉलेज की भूतपूर्व डीन डॉ. आभा सिंह ने कहा कि महिला सशक्तिकरण से आशय उसके सर्वांगीण विकास से है। डॉ. अम्बेडकर ने कहा था कि किसी समाज की प्रगति के बारे में जानना हो तो उस समाज की महिलाओं को देखो। उसके बारे में जान लेने से समाज की स्थिति का पता चल जाएगा। समाज की सबसे महत्वपूर्ण इकाई महिलाएं हैं। इस पुरूष प्रधान समाज में महिलाओं की शिक्षा से लेकर शादी तक सब कुछ पुरूष ही तय करता है। इसमें पुरूष और स्त्री दोनों की समान भागीदारी जरूरी है। दायित्व निर्वाह करने के चक्कर में बेटियों की जल्दी शादी नहीं करनी चाहिए।
रायपुर सेवाकेन्द्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि एक समय था जब समाज में खुशहाली थी। संयुक्त परिवार में सभी मिल-जुलकर रहते थे। एक दूसरे का सम्मान करते थे। किन्तु आज आध्यात्मिक शिक्षा से दूर होने के कारण परिवारों में बिखराव आ रहा है। जीवन में खुशी के लिए महिला सशक्तिकरण जरूरी है। सकारात्मक सोच रखें, एक-दूसरे की भावना का सम्मान करना सीख जाएं तो परिवार में खुशहाली आ सकती है।
वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती प्रियंका कौशल ने कहा कि सारे विश्व में ब्रह्माकुमारी संस्थान अकेली ऐसी संस्थान है जिसका आद्योपान्त संचालन नारी शक्ति के द्वारा किया जाता है। उन्होंने सभा में उपस्थित महिलाओं से आध्यात्मिकता को अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि अपने जीवन में परिवर्तन लाकर ही हम विश्व परिवर्तन के कार्य में मददगार बन सकते हैं।
Brahmakumaris Raipur
भाई दूज पर रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने राज्यपाल सहित अनेक वीआईपीज को तिलक लगाया
भाई दूज पर रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने राज्यपाल सहित अनेक वीआईपीज को तिलक लगाया
रायपुर, 15 नवम्बर, 2023: भाई दूज के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य के माननीय राज्यपाल भ्राता बिश्वभूषण हरिचन्दन जी और महाराष्ट्र के माननीय राज्यपाल रमेश बैस जी (जो कि दीपावली मनाने के लिए मुम्बई से अपने घर रायपुर आए हुए थे) को रायपुर संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सविता दीदी के द्वारा आत्म स्मृति का तिलक लगाकर मुख मीठा कराया गया।
इस अवसर पर वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने छ.ग. उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एवं वर्तमान में छ.ग. राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरडिय़ा जी, दैनिक भास्कर के स्टेट एडीटर भ्राता शिव दुबे जी, पत्रिका के स्टेट एडीटर भ्राता राजेश लाहोटी जी, हरिभूमि के प्रधान सम्पादक भ्राता हिमांशु द्विवेदी जी, पूर्व मंत्री भ्राता बृजमोहन अग्रवाल जी, सूचना आयुक्त भ्राता अशोक अग्रवाल जी (आईएएस), पूर्व मंत्री भ्राता विधान मिश्रा जी आदि को भी भाई दूज क तिलक लगाकर दीपावली का ईश्वरीय प्रसाद (टोली) प्रदान किया।
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