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डर से बचने के लिए ईश्वर विश्वासी बनें… ब्रह्माकुमारी श्वेता दीदी

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सादर प्रकाशनार्थ

ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा यू-ट््यूब पर प्रतिदिन प्रसारित वेब सीरिज –

डर से बचने के लिए ईश्वर विश्वासी बनें… ब्रह्माकुमारी श्वेता दीदी

रायपुर, 12 अगस्त: राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी श्वेता दीदी ने कहा कि डर की भावना हमारे जीवन में तनाव का कारण न बनें। जब तक वह हमें अटेंशन दिलाता है तब तक ठीक है लेकिन टेंशन पैदा न करे। डर से हमारी कार्य क्षमता कम हो जाती है। डर से बचने के लिए ईश्वर विश्वासी बनें।

ब्रह्माकुमारी श्वेता दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रायपुर सेवाकेन्द्र द्वारा सोशल मीडिया यू-ट््यूब पर प्रतिदिन शाम को 5.30 से 6.00 बजे प्रसारित होने वाले आनलाईन वेबसीरिज एक नई सोच की ओर (Towards New Thinking) में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। विषय था-डर पर विजय (Overcoming Fear)।

उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय हम सब अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। हरेक व्यक्ति को कभी न कभी डर के माहौल से दो चार होना पड़ता है। कई लोग डर को स्वाभाविक मान लेते हैं। यदि डर हमें सावधान कर रहा है, किसी बात की ओर हमारा ध्यान खींच रहा है तब तक तो ठीक है। लेकिन जब यह डर तनाव का कारण बन जाता है तब बिलकुल भी ठीक नहीं है। इसका सीधा असर हमारी कार्य क्षमता पर पड़ता है। वह कम हो जाती है। इतना ही नहीं हमारा पारिवारिक जीवन और स्वास्थ्य भी बिखर जाता है।

उन्होंने आगे बतलाया कि मेडिकल रिसर्च से पता चला है कि हमारे स्वास्थ्य पर मन की बातों का गहरा प्रभाव पड़ता है। अगर हमारा मन विश्वास और शान्ति से भरपूर हो तो हम चाहे कितनी भी बड़ी बिमारी से जूझ रहे हों उससे ठीक होने की सम्भावना बढ़ जाती है। लेकिन यदि हमें किसी भी बात की चिन्ता अथवा भय है तो हम स्वस्थ जीवन नहीं जी सकते हैं। तनाव और भय यह दोनों चीजें अनेक बीमारियों का कारण बनती हैं।

उन्होंने बतलाया कि एक महान दार्शनिक इमर्सन ने कहा है कि जिस चीज से डर लगता है उसे कर डालो तो डर खत्म हो जाएगा। शायद इसीलिए कहा जाता है कि डर के आगे जीत है। आखिर यह डर क्या है? यह एक तरह की कल्पना है। बार बार हमारा मन किसी चीज की कल्पना करके एक चित्र हमारे मन में पैदा करता है। जितनी बार यह चित्र बनता है उतना ही बार यह हमारे मन और बुद्घि पर गहरा असर छोड़ता जाता है। हमारा आत्मविश्वास कम होने लगता है। इसके पीछे मुख्य कारण है ज्ञान की कमी होना। जिस बात का भय सताता है उसको तुरन्त समाप्त कर दें, बार-बार याद न करें।

उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास की कमी के कारण मन में डर पैदा होता है। डर पैदा होने का मुख्य कारण है डरावनी फिल्में देखना और डरावनी कहानियाँ पढऩा। इन सभी बातों का मन पर प्रभाव पड़ता है। डर से बाहर निकलने का सबसे अच्छा तरीका है कि डर के प्रति अपनी सोच को परिवर्तित कर दीजिए। डर का सामना करने के लिए शक्ति चाहिए जो कि आत्म विश्वास से आएगी। अपनी क्षमताओं पर विश्वास करें। डर से बाहर निकलने के लिए परमात्मा पर विश्वास करें। उसे अपना सहारा बना लें। जितना अधिक ईश्वर पर विश्वास होगा उतना जल्दी डर से छुटकारा मिलेगा।

प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
रायपुर फोन: 0771-2253253, 2254254

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सबका भला हो, सब सुख पाएं
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