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हमारा भाग्य हमारी मुट्ठी में, हम जो चाहें बन सकते हैं – ब्रह्माकुमारी चित्रलेखा दीदी
सादर प्रकाशनार्थ
ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा यू-ट्यूब पर प्रतिदिन प्रसारित वेब सीरिज का तीसरा दिन –
हमारा भाग्य हमारी मुट्ठी में, हम जो चाहें बन सकते हैं – ब्रह्माकुमारी चित्रलेखा दीदी
रायपुर, 08 अगस्त: राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी चित्रलेखा दीदी ने कहा कि भाग्य हमारे कर्मों की परछायी है। हमारे कर्मों से भाग्य का निर्धारण होता है। इसलिए हमें अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। जीवन में अगर ज्ञान की रोशनी है तो भाग्योदय होना निश्चित है। बचपन से सुनते आए हैं कि हमारा भाग्य हमारी मुट्ठी में है। हम जो बनना चाहते हैं, वह बन सकते हैं।
ब्रह्माकुमारी चित्रलेखा दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रायपुर सेवाकेन्द्र द्वारा सोशल मीडिया यू -ट््यूब पर प्रतिदिन शाम को ५.३० से ६.०० बजे प्रसारित होने वाले आनलाईन वेबसीरिज एक नई सोच की ओर (Towards a new thinking) में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। विषय था-भाग्य हमारी मुट्ठी में (Luck in My Hands)।
उन्होंने आगे कहा कि जब तक भाग्य हमारे हित में होता है तब तक तो ठीक है लेकिन जैसे ही परिस्थितियाँ हमारे प्रतिकूल होती हैं हम दूसरों को कोसना शुरू कर देते हैं कि इसके कारण मुझे नुकसान उठाना पड़ा है? अपनी असफलता के लिए हम दूसरे लोगों को उत्तरदायी ठहराने लग जाते हैं। यहाँ तक की भगवान को भी कोसने में देरी नहीं करते कि हे भगवान तूने मेरी ऐसी तकदीर क्यों बनायी। सोचने की बात है जब ईश्वर के लिए हम सभी बच्चे एक समान हैं तो वह अपने बच्चों के साथ पक्षपात कैसे कर सकते हैं?
उन्होंने बतलाया कि ऐसे में कई लोग हताश होकर ज्योतिषी के पास चले जाते हैं। अन्धविश्वास के फलस्वरूप अनेक प्रयास करने लग पड़ते हैं? एक घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा अतिविश्वास भी काम कर जाता है। जैसा कि एक मरीज के साथ हुआ। जब वह डाक्टर के पास ईलाज के लिए गया तो डॉक्टर ने उसे दवाई की पर्ची लिखकर दिया और कहा कि इसे रोज एक गिलास पानी के साथ पांच दिनों तक लेना। पांच दिनों के बाद जब वह ठीक होकर डॉक्टर के पास पुन: चेकअप के लिए गया तो डॉक्टर उसको देखकर खुश हो गया। डॉक्टर ने उससे दवाई की पर्ची मांगी ताकि कन्फर्म कर सके कि उसने कौन सी दवाई ली है? पर्ची देखकर डॉक्टर ने हैरानी से पूछा कि यह पर्ची इतनी सड़ी हुई हालत में कैसे है? तो मरीज ने कहा कि आपने तो इसे रोज एक गिलास पानी में डालकर पीने के लिए कहा था। यानि उसने कुछ भी दवाई नहीं खायी थी। सिर्फ दवाई की पर्ची को पानी में डुबोकर उस पानी को पिया था। यह उसका डॉक्टर पर अतिविश्वास था जिसने उसे ठीक कर दिया।
उन्होंने आगे बतलाया कि वर्तमान संगमयुग में परमपिता परमात्मा शिव ने भाग्य बनाने की कलम हमारे हाथों में दी है। कहा जाता है कि भगवान उनकी मदद करते हैं जो कि अपनी मदद करने के लिए खुद आगे आते हैं। यह दुनिया कर्म प्रधान है। इसलिए हमें अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कर्मों को श्रेष्ठ बनाने के लिए राजयोग मेडिटेशन की चर्चा करते हुए कहा कि राजयोग मेडिटेशन से हमारे विचार और कर्म दोनों में श्रेष्ठता आती है। श्रेष्ठ कर्म करने से हमारा भाग्य स्वत: ही श्रेष्ठ बन जाता है।
प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
रायपुर फोन: 0771-2253253, 2254254
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सबका भला हो, सब सुख पाएं

