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सदैव खुश रहने के लिए सन्तुष्ट रहना सीखें… ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी
सादर प्रकाशनार्थ
ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा यू-ट्यूब पर प्रतिदिन प्रसारित वेब सीरिज –
सदैव खुश रहने के लिए सन्तुष्ट रहना सीखें… ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी
रायपुर, 17 अगस्त: राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी ने कहा कि हमारी खुशी किसी व्यक्ति वस्तु या वैभव पर आधारित नहीं हो। खुशी को स्थायी बनाने के लिए अपने दृष्टिकोण को बदलना होगा। जब हम अपनी तुलना दूसरों से करने लगते हैं तब दुखी होते हैं। उन्होंने कहा कि समय से पहले और भाग्य से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता है। आपकी तकदीर में जो है वह आपको जरूर मिलेगा उसे कोई छिन नहीं सकता। इसलिए जो कुछ आपके पास है उसमें सन्तुष्ट रहना सीखें।
ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रायपुर सेवाकेन्द्र द्वारा सोशल मीडिया यू-ट््यूब पर प्रतिदिन शाम को 5.30 से 6.00 बजे प्रसारित होने वाले आनलाईन वेबसीरिज एक नई सोच की ओर में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। विषय था: असीम खुशियाँ। इस वेबसीरिज का प्रसारण शान्ति सरोवर रायपुर के चैनल पर किया जाता है।
ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी ने बतलाया कि खुशी का हमारे जीवन में अहम भूमिका होती है। जिस तरह किसी तस्वीर में रंग न भरी जाए तब तक वह तस्वीर अधूरी होती है। उसी तरह यदि खुशी नहीं है तो जीवन में हताशा व निराशा पैदा होती है। खुशी मनुष्य की एक आन्तरिक अवस्था का नाम है जिसमें उसका मन एवं तन एक विशेष प्रकार की ताजगी और स्फूर्ति महसूस करता है। संसार में एक भी ऐसा मनुष्य नहीं होगा जो खुश नहीं रहना चाहता हो। लेकिन आजकल परेशानी और परिस्थितियों के कारण वह दु:खी और अशान्त हो जाता है।
उन्होंने कहा कि इन्सान ने हर क्षेत्र में तरक्की की है। सब कुछ प्राप्त करने के बाद भी वह खुशी से वंचित क्यों है? दरअसल आज का मनुष्य खुशियों को भौतिक वस्तुओं में खोज रहा है। यह अल्पकालिक खुशी होती है। सच्ची खुशी के लिए स्वयं की पहचान जरूरी है। अपने निज स्वरूप को जानकर जब हम मेडिटेशन के द्वारा उस स्वरूप में टिक जाते हैं तो खुशी का अनुभव कर सकते हैं। सुख, शान्ति, आनन्द प्रेम आदि हम आत्माओं के नैसर्गिक गुण है। इसे भौतिक वस्तुओं में खोजने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि खुशी हमारी अपनी सम्पत्ति है। यह किसी व्यक्ति वस्तु या वैभव पर आधारित न हो। खुशी को स्थायी बनाने के लिए अपने दृष्टिकोण को बदलना होगा। परिस्थितियों का निर्माण हमारी सोच के आधार पर निर्भर होता है। हमें अपनी सोच को ऐसा बनाना होगा कि हरेक घटना को देखते हुए हम सकारात्मक सोचें। जब हम अपनी तुलना दूसरों से करने लगते हैं तब दुखी होते हैं। उन्होंने कहा कि समय से पहले और भाग्य से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता है। आपकी तकदीर में जो है वह आपको जरूर मिलेगा उसे कोई छिन नहीं सकता। जो आपके पास है उसमें सन्तुष्ट रहना सीखें।
प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
रायपुर फोन:0771-2253253, 2254254
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