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Brahma Kumaris News

विश्व पर्यावरण दिवस

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– विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रकृति एवं वन सरंक्षण पर चर्चा हुई…
– पर्यावरण सरंक्षण को जन आन्दोलन बनाने की जरूरत… केदार कश्यप, वन मंत्री
– प्लास्टिक से प्रकृति का दम घुट रहा है… प्रेम कुमार, प्रबन्ध संचालक, वन विकास निगम
– प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने के लिए दृढ़ संकल्पित होने की जरूरत… ब्रह्माकुमारी सविता
रायपुर, 05 जून, 2026: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ग्राम विकास प्रभाग द्वारा शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर में पर्यावरण दिवस पर परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री, वन विकास निगम के प्रबन्ध संचालक प्रेम कुमार और ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने की। चर्चा का विषय था -प्रकृति से प्रेरित, जलवायु और हमारे भविष्य के लिए। (Inspired by Nature, For Climate, For Our Future)
इस अवसर पर बोलते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि आज प्रकृति के साथ जुडक़र भविष्य को सुखदायी बनाने की जरूरत है। अगर हम प्रकृति के साथ नहीं जुड़ेंगे तो हमारा भविष्य अन्धकारमय हो जाएगा। प्रकृति हमें बहुत सारी जीवनोपयोगी चीजें मुफ्त में देती है लेकिन हम उसकी कद्र नहीं करते। कोविड के समय पता चला कि जीवन के लिए आक्सीजन का कितना महत्व है?
उन्होंने प्रधानमंत्री के एक पेड़ माँ के नाम अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि यह मर्मस्पर्शी और प्रकृति को जोडऩे वाला अभियान है। इसे पूरे देश ने जन आन्दोलन के रूप में स्वीकार किया और जनसहभागिता से इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पर्यावरण सरंक्षण सिर्फ सरकारी कार्यक्रम न होकर आमजनों का कार्यक्रम बने तब सफलता मिलेगी। सबको अपनी ओर से प्रयास करना होगा। सुदूर अंचल के जनजाति के लोग पर्यावरण सरंक्षण के कार्य को अपनी संस्कृति के साथ जोडक़र कार्य रखे हुए हैं। वह लोग पढ़े लिखे नहीं हैं परन्तु आज भी अपने सुखद भविष्य के लिए वनों की रक्षा, जल सरंक्षण और प्रकृति से जुडक़र रहने का कार्य करते हैं। बस्तर में आज भी रसायनिक खेती नहीं बल्कि जैविक खेती होती है।
वन विकास निगम के प्रबन्ध संचालक प्रेम कुमार (आईएफएस) ने ग्लोबल वार्मिंग की चर्चा करते हुए कहा कि हमें पर्यावरण को बचाना है तो जंगल को बचाना होगा। धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है अगर दो डिग्री भी तापमान बढ़ा तो धरती रहने लायक नहीं रह जाएगी। अब हमें कार्बन उत्सर्जन को जीरो पर लाना होगा। यह तभी संभव होगा जब जितना कार्बन हम छोड़ते हैं वह सभी पेड़ों द्वारा अवशोषित हो जाएं। इसके लिए हमें खूब पेड़ लगाने होंगे। इसी प्रकार पानी को सरंक्षित करने के लिए नदियों को अविरल बहने दें। उसमें शहरों और कारखानों का प्रदूषित जल न छोड़ें।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए रायपुर सेवाकेन्द्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि प्रकृति और मानव का बहुत ही गहरा सम्बन्ध है। मनुष्य के विचारों का प्रकृति पर पड़ता है। वायु प्रदूषण के साथ ही मानसिक प्रदूषण को भी दूर करने की जरूरत है। प्रकृति ने हमारी जरूरत के मुताबिक सब कुछ दिया है लेकिन जब हम लोभवश उसका अत्यधिक दोहन करने लगते हैं तब समस्या शुरू होती है। हमें पानी की कीमत तब पता चली जब वह बोतल में बिकने लगा। इसी प्रकार आक्सीजन का महत्व हमें कोविड के दौरान पता चली। आज दृढ़ संकल्पित होने की जरूरत है कि हम प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे।
प्रारम्भ में राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी वनिषा दीदी ने कहा कि प्रकृति के बिना हमारा कोई अस्तित्व नहीं है। आधुनिकता और विकास की दौड़ में हम पर्यावरण सरंक्षण को न भूल जाएं।
 कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने किया। इस अवसर पर बच्चों ने नृत्य के माध्यम से पर्यावरण सरंक्षण का सन्देश दिया।